Category Archives: लेख

नौतपा और भारतीय जीवन दर्शन...

-महेन्द्र तिवारी भारतीय उपमहाद्वीप की जलवायु विश्व की सबसे विविध और जटिल जलवायु प्रणालियों में गिनी जाती है। यहाँ ऋतुओं का परिवर्तन केवल मौसम का बदलाव नहीं होता, बल्कि यह कृषि, अर्थव्यवस्था, समाज और मानव जीवन की गति को भी निर्धारि...

सांस्कृतिक विविधता भारत की अन्तर्राष्ट्रीय धरोहर है...

बाल मुकुन्द ओझा संवाद और विकास के लिए सांस्कृतिक विविधता का विश्व दिवस 21 मई को मनाया जाता है। यूनेस्को द्वारा इस दिन को मनाने का उद्देश्य विभिन्न देशों की संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों को समझना तथा उनका सम्मान करना है। हर दे...

एआई का दुरुपयोग नहीं सदुपयोग हो...

-अशोक बैद आज एआई का जमाना है और मानव जीवन में दिन प्रतिदिन इसका उपयोग बढ़ता जा रहा है पर देखने में आ रहा है कुछ लोग इसका सदुपयोग की जगह दुरुपयोग ज्यादा करने लगे हैं जिससे एआई वरदान की जगह अभिशाप बनता जा रहा है। लोग एआई का दुरुपयोग...

बेजुबान पक्षी और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संगम...

– महेन्द्र तिवारी आज के आधुनिक युग में वैश्विक स्तर पर शहरीकरण अत्यंत तीव्र गति से बढ़ रहा है। इस प्रगति के साथ ही दुनिया भर के महानगर और शहर एक अत्यंत विकराल समस्या से जूझ रहे हैं, और वह समस्या है कचरा प्रबंधन की। हमारे शहर...

झुलसाती गर्मी के साथ आंधी – बारिश और लू का चौतरफा अटैक...

-बाल मुकुंद ओझा यह मौसम गर्मी का है। इस दौरान जलवायु परिवर्तन के अज़ब गज़ब नज़ारों से देश और दुनिया को को दो दो हाथ करने पड़ रहे है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने चेतावनी जारी कर कहा है कि देश के बड़े हिस्से में भीषण लू चल रही है, और दिल...

नियंत्रित अनिश्चितता के दौर में अमेरिका और चीन...

– महेन्द्र तिवारी वैश्विक राजनीति के वर्तमान दौर में अमेरिका और चीन के बीच बीजिंग में आयोजित हुई उच्च स्तरीय बैठक को एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है। वर्तमान समय में संपूर्ण विश्व एक जटिल...

सांस्कृतिक धरोहरों की सुरक्षा में संग्रहालयों की नई चुनौतियां...

-सुनील कुमार महला संग्रहालयों के महत्व, इनके इतिहास, इनकी संस्कृति और विरासत के संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने के क्रम में प्रतिवर्ष 18 मई को अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस (इंटरनेशनल म्यूजियम डे) मनाया जाता है। कहना ग़ल...

कब तक दोहराई जाती रहेंगी निर्भया जैसी त्रासदियां?...

-ः ललित गर्ग दिल्ली के नांगलोई में एक निजी बस के भीतर महिला के साथ हुई बस कंडक्टर एवं ड्राइवर के दुष्कर्म की घटना ने एक बार फिर पूरे देश की चेतना को झकझोर दिया है। यह घटना केवल एक आपराधिक वारदात नहीं, बल्कि उस भयावह सामाजिक और प्र...

हाई ब्लड प्रेशर बना साइलेंट किलर...

बाल मुकुन्द ओझा विश्व उच्च रक्तचाप दिवस हर वर्ष 17 मई को मनाया जाता है। दरअसल आजकल की सभी बीमारियां खराब जीवनशैली से जुड़ी होती हैं, ऐसे में ब्लड प्रेशर की समस्या को कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है। ब्लड प्रेशर को मैनेज करने के लि...

डेंगू पर नियंत्रण के प्रभावी प्रयास...

-बाल मुकुन्द ओझा राष्ट्रीय डेंगू दिवस प्रतिवर्ष 16 मई को पूरे भारत में मनाया जाता है। डेंगू के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने और बचाव के तरीके समझाने के उद्देश्य से यह दिवस मनाया जाता है। हमारे देश में हमने काफी हद तक डेंगू पर काबू पाने का...

नेताओं के सिर चढ़कर बोल रहा है नफरत का काला जादू...

बाल मुकुन्द ओझा राम और कृष्ण के देश में इस समय एक दूसरे के प्रति नफरत और घृणा की बयार बह रही है। पूर्व से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक तक बयानवीरों ने जैसे नफरती बयानों का ठेका ले लिया है। हिन्दू – मुस्लिम तो आज़ादी के बाद से...

संस्कार और खुशियों का खजाना है परिवार...

बाल मुकुन्द ओझा विश्व परिवार दिवस 15 मई को मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र ने 1994 को अंतर्राष्ट्रीय परिवार वर्ष घोषित किया था। समूचे संसार में लोगों के बीच परिवार की अहमियत बताने के लिए हर साल 15 मई को अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस म...

शारीरिक श्रम के प्रति लापरवाह हो रहे हमारे युवा...

-बाल मुकुंद ओझा शरीर को स्वस्थ और फिट रखने की कोशिशें एक बार फिर परवान पर है। विभिन्न शोध रिपोर्टों में साफतौर पर इंगित किया गया है कि आजकल की भागदौड़ भरी और व्यस्त लाइफस्टाइल ने बच्चे से बुजुर्ग तक को समय से पूर्व ही शारीरिक रूप स...

मातृभाषा, संस्कृति और शिक्षा : राजस्थानी के पक्ष में ऐतिहासिक निर...

-सुनील कुमार महला भारत की भाषाई, सांस्कृतिक और शैक्षिक चेतना के लिए 12 मई 2026 का दिन ऐतिहासिक माना जाएगा। दरअसल, 12 मई 2026 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय(माननीय सुप्रीम कोर्ट) ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए राजस्थान सरकार को य...

इंडि की एकता : मुंह में राम बगल में छुरी...

-बाल मुकुन्द ओझा बंगाल, तमिलनाडु और केरलम चुनावों के बाद दिखावे के लिए विपक्ष की एकता के गीत अवश्य गाये जा रहे है मगर असल में इंडि गठबंधन में दरार चौड़ी होती जा रही है। अपनी करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी...

परीक्षा प्रणाली पर उठते सवाल : क्या प्रतिभा से ज्यादा मजबूत हो गय...

-सुनील कुमार महला हाल ही में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने नीट-यूजी परीक्षा के संदर्भ में एक विस्तृत प्रेस रिलीज़ जारी कर यह स्पष्ट किया है कि वह निष्पक्ष, सुरक्षित और भरोसेमंद परीक्षाएं कराने तथा परीक्षा प्रणाली की ईमानदारी बन...

वैश्विक संकट के दौर में दूरगामी सोच का परिणाम है प्रधानमंत्री की ...

-डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा ऐसा नहीं है कि भारत विदेशी मुद्रा के मामलें में संकट में हो बल्कि वास्तविकता तो यह है कि 10 अप्रेल, 2026 के आंकड़ों की ही बात करें तो भारत का विदेशी मुद्रा भण्डार आज उच्चतम स्तर पर है। 700 बिलियन अमेरिकी...

समाज को स्वस्थ रखने में नर्सिंग कर्मियों की अहम भूमिका...

-बाल मुकुन्द ओझा अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस 12 मई को मनाया जाता है। यह दिवस स्वास्थ्य सेवाओं में नर्सों के योगदान को सम्मानित करने तथा उनसे संबंधित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा के लिए मनाया जाता है। यह दिन हमारे लिए नर्सों कि कड़ी मेहनत,...

भाजपा को अगले साल होने वाले चुनावों में जीत की उम्मीद...

बाल मुकुन्द ओझा भाजपा ने बंगाल और असम में बड़ी जीत के बाद अब अगले साल होने वाले गोवा, गुजरात, मणिपुर, पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में अपनी चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। इनमें पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव फर...

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस : विज्ञान, नवाचार और आत्मनिर्भरता का ...

-सुनील कुमार महला राजस्थान के पोखरण में हुए सफल परमाणु परीक्षणों तथा भारत की ऐतिहासिक तकनीकी उपलब्धियों की स्मृति में प्रतिवर्ष 11 मई को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस मनाया जाता है। वास्तव में, यह दिवस केवल हमारे देश की वैज्ञानिक सफ...

महिला आरक्षण पर राजनीतिक दलों का दोहरा चरित्र...

-ः ललित गर्ग भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी विडंबनाओं में से एक यह है कि जिस देश में महिलाओं को “शक्ति”, “मातृशक्ति” और “आधी दुनिया” कहकर सम्मानित किया जाता है, वहीं राजनीति में उन्हें समान भागीदारी देने के प्रश्न पर लगभग सभी राजनीति...

गर्मी में पशु-पक्षियों का भी रखें ख्याल...

-बाल मुकुन्द ओझा गर्मियों का मौसम विशेषकर पशु पक्षियों के लिए बहुत कष्टप्रद होता है। गर्मी शुरू होने के साथ ही पशु-पक्षी पानी की तलाश में इधर-उधर भटकते रहते हैं। पशु-पक्षियों को जिंदा रहने के लिए हर रोज पानी की जरूरत होती है। गर्म...

मणिपुर हिंसा : आक्रोश में अवसर तलाशता विपक्ष...

-संजय सक्सेना भारत के पूर्वोत्तर का एक छोटा सा राज्य मणिपुर पिछले कई सालों से क्षेत्रीय हिंसा की खबरों के कारण पूरे देश में सुर्खियां बटोर रहा है। एक तरफ मोदी सरकार लगातार दावे कर रही है कि मणिपुर में हालात बेहतर करने के लिये लगात...

महात्मा गांधी के राजनीतिक गुरु और मार्गदर्शक गोपाल कृष्ण गोखले...

बाल मुकुन्द ओझा आज महान देशभक्त और स्वतंत्रता सेनानी गोपाल कृष्ण गोखले की जयंती है। गोखले महान विचारक, समाज सुधारक, शिक्षाविद और राजनीतिज्ञ थे, जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में अनुकरणीय नेतृत्व प्रदान किया। महात्मा गांधी उन्हें अपन...

गंगोत्री से गंगासागर तक वेग के साथ बढ़ती बीजेपी की ‘हिंदूधारा’...

-संजय सक्सेना पश्चिम बंगाल में जीत के बाद एक नया ट्रेंड दिखाई दे रहा है। पहले जो बीजेपी कहा करती थी कि हमें मुसलमानों का वोट नहीं मिलता है, अब वही बीजेपी खुलेआम कहती है कि वह हिंदुओं के वोट से चुनाव जीती है। इसके साथ ही यह भी जोड़...

बढ़ते स्क्रीन टाइम के खतरे से अनजान बच्चों का बचपन...

– बाल मुकुन्द ओझा भारत में बच्चों को मोबाइल और टीवी देखने की पूरी आज़ादी है। यहाँ उम्र की कोई बाधा नहीं है। सच तो यह है भारत में बच्चों का बचपन आभासी दुनियां में खो गया है। बच्चों में ज्यादा स्क्रीन टाइम को लेकर होने वाले दुष...

भाजपा का बढ़ता जनादेश : विपक्ष के लिए आत्ममंथन का समय...

-अरविंद रावल पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के परिणामों ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि नए युग का भारतीय मतदाता अब जात-पात, नफरत और अहंकार की राजनीति से ऊपर उठ चुका है। आज का मतदाता विकास और सुरक्षा को सर्वोपरि मानता है। व...

करारी हार के बाद अपना वजूद खोता वामपंथी आंदोलन...

– बाल मुकुन्द ओझा बंगाल और त्रिपुरा के बाद केरलम में करारी हार के बाद अब कम्युनिष्टों को देश के लोगों ने पूरी तरह सत्ता से बाहर कर दिया है। कम्युनिष्टों की राजनीति तीन लोक से न्यारी है। भाजपा के विरोध के चलते कम्युनिष्ट इंडि...

होर्डिंग, बैनर आदि लगाने में नियमों की अवहेलना क्यों?...

आजकल किसी भी नगर, शहर या छोटे गांवों तक में चले जाएं पूरा इलाका फ्लेक्स होर्डिंगों, बैनरों, पंपलेटों, पोस्टरों से अटा पड़ा है। आजकल फ्लेक्स होर्डिंग्स बैनर का काफी चलन बढ़ चुका है। चुनाव हो या धार्मिक आयोजन या किसी भी प्रकार का वि...

यूपी में चुनावी नगाड़े बजने शुरू : बुलडोज़र बाबा करेंगे पीडीए से दो...

बाल मुकुंद ओझा बंगाल के चुनावी घमासान के बाद अब यूपी में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों के नगाड़े बजने शुरू हो गए है। यहां भाजपा के बुलडोज़र बाबा का समाजवादी पार्टी के पीडीए से सीधा मुकाबला होगा। यह चुनाव देश के सर्वाधिक चर्चित...

उबलती धरती, डगमगाती थाली, संकट में किसान...

– डॉ. सत्यवान सौरभ जलवायु परिवर्तन के इस निर्णायक दौर में चरम गर्मी अब केवल एक मौसमी विचलन नहीं रह गई है; यह एक गहरे संरचनात्मक संकट के रूप में उभर रही है, जो वैश्विक खाद्य प्रणालियों की बुनियाद को हिला रही है। बढ़ते तापमान ...

सत्य और तथ्य को बेलाग उद्घाटित करना सच्ची पत्रकारिता है...

– बाल मुकुन्द ओझा संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा द्वारा 3 मई को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस घोषित किया गया, जिसे विश्व प्रेस दिवस के रूप में हर साल मनाया जाता है। प्रेस स्वतंत्रता के बुनियादी सिद्धांतों, मूल्यों और प्रेस की स...

अर्बन हीट आइलैंड का असर : क्यों तप रहे हैं भारत के शहर...

-सुनील कुमार महला ग्लोबल वार्मिंग आज पूरी दुनिया के सामने एक गंभीर समस्या के रूप में उभर रही है और इसका प्रभाव भारत में बेहद स्पष्ट और चिंताजनक रूप से दिखाई दे रहा है। हाल ही में जारी रियल-टाइम वैश्विक तापमान रैंकिंग के अनुसार, दु...

एग्जिट पोल का तिलिस्म : बंगाल में हाई वोल्टेज ड्रामा...

बाल मुकुन्द ओझा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया आजकल चुनाव में बड़ी भूमिका निभाने लगे है। चुनावी सर्वे करने वाली विभिन्न संस्थाओं से मिलकर किये जाने वाले सर्वेक्षणों में मतदाताओं का मूड जानने का प्रयास कर सटीक आकलन किया जाता है। कई बार ये सर्व...

गौतम बुद्ध के उपदेश और आज की दुनिया में उनकी प्रासंगिकता...

हर वर्ष वैशाख मास की पूर्णिमा तिथि पर बुद्ध पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु के नौवें अवतार महात्मा बुद्ध का जन्म हुआ था। इस वर्ष बुद्ध पूर्णिमा 1 मई 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी। ज्योतिषाचार्यों क...

दुनिया से सीख कर हम भी बदल सकते हैं देश में किसान और मजदूर के हाल...

राजेश जैन हर वर्ष एक मई आती है, भाषण होते हैं, मंच सजते हैं, श्रमिकों और किसानों के सम्मान में संदेश दिए जाते हैं और अगले ही दिन सब कुछ सामान्य हो जाता है। लेकिन सच्चाई यह है कि भारत में किसान और मजदूर आज भी विकास की मुख्यधारा के ...

दुनिया में सैन्य खर्च बढ़ा, भारत पांचवें स्थान पर...

-सुनील कुमार महला दुनिया के देश अपने रक्षा बजट या यूं कहें कि सैन्य खर्च में अभूतपूर्व बढ़ोत्तरी कर रहे हैं। वास्तव में, आज के समय में दुनिया भर में सैन्य खर्च कई कारणों से तेजी से बढ़ रहा है। प्रमुख कारणों की यदि हम यहां पर बात क...

संविधान और सियासत के जीते-जागते ज्ञानकोश थे संसदविज्ञ मधु लिमये...

बाल मुकुन्द ओझा मधु लिमये का जन्म 1 मई 1922 को महाराष्ट्र के पूना में हुआ था। भारत की राजनीति में मधु लिमये स्वच्छ, सादगी, ईमानदारी और वैचारिक प्रतिबद्धता के प्रबल पक्षधर के रूप में सर्व विख्यात रहे है। उन्होंने दो बार अपने विचारो...

हिल्टन होटल में गोलीबारी-निंदनीय और अफसोसजनक : शांति, सौहार्द और ...

-सुनील कुमार महला निवार 25 अप्रैल 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति की मौजूदगी में हिल्टन होटल में आयोजित रात्रिभोज कार्यक्रम के दौरान एक व्यक्ति द्वारा की गई गोलीबारी वास्तव में बहुत चिंता का विषय है।कितनी बड़ी बात है कि हमलावर की पहचान...

बेमिसाल कारीगरी का बेजोड़ नमूना है लाल किला...

29 अप्रैल का दिन भारत के इतिहास का अहम दिन है। विश्व विख्यात लाल किले की नींव 29 अप्रैल 1639 के दिन रखी गई थी। ऐतिहासिक लाल किले को यूनेस्को द्वारा वर्ष 2007 में विश्व धरोहर स्थल के रूप में चुना गया था। शानदार गुंबदों, बेहतरीन मेह...

आपकी बुरी आदतें आपके चार्जिंग केबल्स को खराब कर रही हैं...

ऋचा लोढ़ा चार्जिंग केबल्स हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का एक बेहद अहम हिस्सा हैं, लेकिन हम अक्सर उनकी अहमियत को तब तक नहीं समझते जब तक वे खराब नहीं हो जाते। फोन, टैबलेट या अन्य गैजेट्स की बैटरी खत्म होने पर सबसे पहले हमें अपने केबल की ...

कार्यस्थल पर सकारात्मक वातावरण का निर्माण जरुरी...

बाल मुकुंद ओझा दुनियाभर में 28 अप्रैल का दिन कार्यस्थल पर सुरक्षा एवं स्वास्थ्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन द्वारा यह दिन व्यावसायिक दुर्घटनाओं और बीमारियों की रोकथाम को बढ़ावा देने और कार्यस्थल पर स्वा...

आचार्य महाश्रमण की निर्गुण-चेतना से विश्व-शांति की नई दिशा...

– ललित गर्ग मानव इतिहास के इस अशांत और संक्रमणकालीन दौर में जब विश्व का परिदृश्य युद्ध, हिंसा, आतंकवाद और वैचारिक टकरावों से आच्छादित है, तब शांति, सह-अस्तित्व और मानवीय मूल्यों की पुकार पहले से कहीं अधिक तीव्र हो उठी है। ऐस...

बौद्धिक संपदा दिवस : खेलों के विकास में नवाचार...

बाल मुकुन्द ओझा विश्व बौद्धिक संपदा दिवस हर साल 26 अप्रैल को मनाया जाता है। बौद्धिक संपदा का अर्थ संपत्ति से है, जो बुद्धिमत्ता से सृजित हुई हो जैसे कि आविष्कार, पुस्‍तकें, चित्रकला, गीत, प्रतीक चिह्न, नाम, चित्र, या व्यापार में इ...

क्यों बीमा से दूर है आम भारतीय?...

— डॉ. सत्यवान सौरभ भारत आज दुनिया की सबसे तेज़ी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शुमार है। ऊंची विकास दर, डिजिटल क्रांति, बढ़ती आय और वैश्विक मंच पर मजबूत होती स्थिति—ये सब संकेत देते हैं कि देश आर्थिक रूप से आगे बढ़ रहा है। लेकिन इस च...

मलेरिया के खिलाफ एकजुट प्रयास जरुरी...

बाल मुकुन्द ओझा विश्व मलेरिया दिवस प्रत्येक वर्ष 25 अप्रैल को मनाया जाता है। दुनियाभर में हर साल मलेरिया के लाखों मामले सामने आते हैं। मलेरिया से मरने वालों की संख्या भी काफी ज्यादा होती है। विश्व मलेरिया दिवस हर साल एक थीम के साथ...

साइबर अपराध का बदलता चेहरा...

– महेन्द्र तिवारी डिजिटल युग ने मानव जीवन को जितना सरल और सुविधाजनक बनाया है, उतना ही जटिल और जोखिमपूर्ण भी बना दिया है। आज बैंकिंग से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य, खरीदारी और संचार तक लगभग हर काम इंटरनेट और मोबाइल के माध्यम से हो...

पृथ्वी पर हरियाली तो जीवन में खुशहाली...

बाल मुकुन्द ओझा पृथ्वी दिवस हर साल 22 अप्रैल को मनाया जाता है। इसकी स्थापना अमेरिकी सीनेटर जेराल्ड नेल्सन द्वारा 1970 में एक पर्यावरण शिक्षा के रूप में की गयी और अब इसे 192 से अधिक देशों में प्रति वर्ष मनाया जाता है। पृथ्वी दिवस 2...

भारतीय जहाजों पर फायरिंग के मायने ?...

– महेन्द्र तिवारी होर्मुज जलडमरूमध्य की भौगोलिक स्थिति इसे वैश्विक राजनीति के केंद्र में खड़ा करती है और 18 अप्रैल 2026 की घटना ने इस तथ्य को एक बार फिर निर्विवाद रूप से प्रमाणित कर दिया है। उस दिन की सुबह जब भारत के ध्वज वाल...

पौष्टिक आहार को लेकर दुनियाभर में व्यापक हलचल...

बाल मुकुन्द ओझा आज दुनियाभर में खानपान को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म हो रहा है। क्या खाये और क्या न खाये इस पर बहस चल रही है। स्वास्थ्य एवं पोषण का होना किसी भी मानव के लिए पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मस्तिष...

परिसीमन के पेंच में फंसा आधी आबादी का हक...

– महेन्द्र तिवारी भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में आधी आबादी की आकांक्षाओं को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला खड़ा किया है। सरकार द्वारा प्रस्तुत संविधान (131वां संशोधन) विधेयक का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2023 में पारित कानून को धर...

सुरक्षित सड़क पर चलना हर नागरिक का अधिकार...

बाल मुकुन्द ओझा देश में लगातार बढ़ते सड़क हादसों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ साफ़ चेताया है कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर लापरवाही किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कोर्ट ने यह भी माना कि ...

बिहार में संभावनाएं विकास की: अब सत्ता सम्राट की...

-ललित गर्ग बिहार की राजनीति लंबे समय से बदलाव, प्रयोग और नेतृत्व के उतार-चढ़ाव का साक्षी रही है। ऐसे परिदृश्य में जब लंबे इंतजार और जटिल कूटनीतिक समीकरणों के बाद पहली बार भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में शासन स्थापित होने की स्थित...

अक्षय तृतीया दान परम्परा के सूत्रपात का दिन...

हर देश की संस्कृति में कुछ पर्व त्यौंहार और विशिष्ट उत्सवों का समायोजन किया जाता है ताकि जीव जगत को नई दिशा, प्रकाश का नया मार्ग मिल सके। चारों और उल्लास, उमंग का वातावरण बन सके और वह जीवन में खुशियों के गुलाल बीखेर सके। भारत देश ...

विश्व धरोहर दिवस : सभ्यता की अमूल्य धरोहरों को बचाने का संकल्प...

-सुनील कुमार महला प्रत्येक वर्ष 18 अप्रैल को विश्व धरोहर दिवस मनाया जाता है। इसे विश्व विरासत दिवस, वर्ल्ड हेरिटेज डे तथा आधिकारिक रूप से अंतर्राष्ट्रीय स्मारक एवं स्थल दिवस (इंटरनेशनल डे फोर मोन्यूमेंट्स एंड साइट्स) कहा जाता है। ...

अनंत समृद्धि का दिन है अक्षय तृतीया...

रमेश सर्राफ धमोरा हमारे देश में समय-समय पर बहुत से त्यौहार मनाये जाते हैं। इसलिए हमारे देश को त्योहारों का देश भी कहते है। हिन्दू धर्मावलम्बियों के प्रमुख त्योहारों में से एक अक्षय तृतीया है जिसे हम आखा तीज भी कहते हैं। अक्षय तृती...

भारत में हीमोफीलिया का बढ़ता खतरा...

विश्व फेडरेशन ऑफ हीमोफीलिया द्वारा हर साल 17 अप्रैल को हीमोफिलिया दिवस मनाया जाता है। विश्व हीमोफिलिया दिवस 2026 का विषय निदान : देखभाल का पहला कदम रखा गया है। विश्व फेडरेशन ऑफ हीमोफिलिया के मुताबिक हीमोफिलिया एक रक्त विकार है जिस...

अंकों की दौड़ नहीं, समझ और संतुलन की ज़रूरत : सीबीएसई बोर्ड परीक्...

-सुनील कुमार महला हाल ही में, बुधवार को 15 अप्रैल 2026 को सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) ने कक्षा 10वीं का परीक्षा परिणाम घोषित किया, जिसमें इस वर्ष कुल 93.70% छात्र सफल हुए हैं। यह आंकड़ा पिछले वर्ष के 93.66% की तुलन...

पश्चिम एशिया के पास है, मीठे जल के श्रोतो की भारी कमीं...

एशिया महाद्वीप को अगर देखा जाए तो पश्चिमी एशिया और मध्य एशियाई प्रदेशों में मीठे जल के श्रोतों की काफ़ी कमी है। क्योंकि, इन क्षेत्रों में अधिकांश रेगिस्तान है और यहां की जलवायु भी शुष्क है। बरसात न के बराबर होती है, और गर्मी चरम प...

सजने लगा है बुढ़ापे का बाजार...

हमारे देश में बुजुर्गों की देखभाल का स्वरुप अब बदलने लगा है, हालाँकि यह कहानी अभी अमीर बुजुर्गों तक पहुंची है मगर इसके विस्तार की चर्चाएं सुनाई देने लगी है। बुजुर्गों को कल तक परिवार का वट वृक्ष मानकर देखभाल की जाती थी अब यह परिवा...

युवाओं के दो दुश्मन : चिंता और तनाव...

ऑफ़िस ऑफ़ नेशनल स्टैटिस्टिक्स [ओएनएस] के ताजा सर्वे में देशवासियों को युवाओं में थकान और तनाव को नजरअंदाज करने पर सचेत किया है। सर्वे में यह बात सामने आई है कि आज का युवा वर्ग ‘एंग्जायटी’ यानी चिंता का सबसे ज्यादा शिका...

होर्मुज की नाकेबंदी से टूटती अनगिनत उम्मीदें...

– महेन्द्र तिवारी होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के नक्शे पर महज एक संकरी रेखा है, लेकिन इस रेखा के दोनों किनारों पर आज जो ताकतें आमने-सामने खड़ी हैं, उनकी टकराहट की गूँज पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था की नींव तक पहुँच रही है। होर्मुज...

बुज़ुर्गों की आँखों में झलकती बेबसी हमारे समाज का आईना...

-नफीस आफरीदी भारतीय संस्कृति में वृद्धों के लिए सदैव आदर का स्थान रहा है। परिवार में वे मार्गदर्शक, अनुभव के स्रोत और नैतिक मूल्यों के संवाहक रहे। समाज में यदि बुज़ुर्गों को सम्मान, सुरक्षा और स्नेह मिलता है तो वह समाज न केवल सभ्य...

डॉ. आंबेडकर जयंती : लोग मुझे याद करेंगे, मेरे मरने के बाद...

बाल मुकुन्द ओझा आज 14 अप्रैल को पूरा देश डॉ भीम राव आंबेडकर की 135 वीं जयंती मना रहा है। देश में आज सर्वाधिक चर्चा बाबा साहेब आम्बेडकर की हो रही है। जब भी डॉ. आंबेडकर की जयंती आती है, समाजवादी चिंतक डॉ राम मनोहर लोहिया का यह कथन म...

अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के बीच इजऱायल का हिज़्बुल्लाह पर आक्राम...

सौरभ वार्ष्णेय पश्चिम एशिया एक बार फिर विरोधाभासों के दौर से गुजर रहा है। एक ओर अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता की संभावनाएं बन रही हैं, वहीं दूसरी ओर इजऱायल ने लेबनान में हिज़्बुल्लाह के ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं। यह स्थ...

जलियांवाला बाग नरसंहार : खून से लिखी आजादी की दास्तां...

बाल मुकुन्द ओझा जलियांवाला हत्याकांड को आज 107 साल पूरे हो चुके है लेकिन इसकी याद आज भी हमारी आंखों को नम कर जाती है। भारतीय इतिहास में 13 अप्रैल 1919 उन तारीखों में से एक है जो अंग्रेजों के अमानवीय चेहरे को सामने ला देता है। उस द...

सामाजिक न्याय के योद्धा महात्मा ज्योतिबा फुले...

बाल मुकुन्द ओझा आज महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती है। महात्मा फुले 19वीं सदी के एक महान समाज सुधारक, विचारक, समाजसेवी, लेखक, दार्शनिक तथा क्रान्तिकारी कार्यकर्ता थे। देश से छुआछूत को खत्म करने और समाज के वंचित तबके को सशक्त बनाने ...

किशोर आक्रामकता एवं हिंसा पर अंकुश लगाने की पहल हो...

-ललित गर्ग- भारतीय किशोरों में बढ़ रही हिंसक प्रवृत्ति एवं क्रूर मानसिकता चिन्ताजनक है, नये भारत एवं विकसित भारत के भाल पर यह बदनुमा दाग है। पिछले कुछ समय से किशोरों में बढ़ती हिंसा की प्रवृत्ति निश्चित रूप से डरावनी, मर्मांतक एवं ख...

क्रांतिसूर्य ज्योतिबा फुले...

-डॉ. निर्मल सुवासिया महात्मा ज्योतिबा फुले महाराष्ट्र के एक क्रांतिकारी विचारक, शिक्षक और समाज सुधारक थे जिन्होंने 19वीं सदी में शिक्षा में असमानता, जाति-व्यवस्था, स्त्री-अधिकार और किसान-समस्या के खिलाफ सबसे बड़ी लड़ाई लड़ी। 11 अप्...

घर में नहीं दाने अम्मा चली भुनाने...

बाल मुकुन्द ओझा यह कहावत पाकिस्तान पर सटीक बैठती है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 8 अप्रैल 2026 को अमेरिका और ईरान ने पाकिस्तान की मध्यस्थता में दो हफ्ते का अस्थायी सीजफायर कर लिया। मिडिल ईस्ट में युद्ध रोकने के प्रस्ताव को अमेरिका और...

बेमौसम बारिश ने बिगाड़ा जलवायु का संतुलन...

बाल मुकुन्द ओझा अप्रैल माह से गर्मी और तेज धूप की शुरुआत हो जाती है, लेकिन बेमौसम बारिश ने देशवासियों को चिंन्तित कर चौंका दिया है। आम आदमी के साथ खेत और खलिहानों लिए मुश्किलें खड़ी हो रही है।मौसम विभाग ने देश के कई हिस्सों में भा...

महिला सशक्तिकरण से बदलती भारत की विकास गाथा...

-विजया रहाटकर भारत की विकास गाथा को अक्सर संख्याओं, विकास दरों, अवसंरचना विस्तार और आर्थिक उपलब्धियों के रूप में व्यक्त किया जाता है। लेकिन, पिछले दशक का सबसे बड़ा बदलाव आँकड़ों से परे है। यह एक गहरे सामाजिक बदलाव में परिलक्षित होत...

क्या स्वच्छता अभियान ने बदली है गांव की तस्वीर?...

-रागिनी कुमारी स्वच्छता किसी भी समाज की बुनियादी पहचान होती है। यह केवल स्वास्थ्य से नहीं बल्कि सामाजिक विकास और सम्मान से भी जुड़ी होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता का स्तर किसी जिले के समग्र विकास का आईना होता है। बिहार का ...

बंगाल में रक्तरंजित चुनाव की आहट...

प.बंगाल में चुनाव की रणभेरी बज उठी है। पश्चिम बंगाल की कुल 294 विधानसभा सीटों के लिए होने वाला यह महासंग्राम दो चरणों में संपन्न होगा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को संपन्न होगा, जबकि दूसरे चरण की वो...

चांद की ओर मानव वापसी: नासा का आर्टेमिस-II मिशन...

-सुनील कुमार महला अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का आर्टेमिस II मिशन चंद्रमा की ओर अग्रसर है। उल्लेखनीय है कि नासा ने 1 अप्रैल 2026 को (भारतीय समयानुसार 2 अप्रैल सुबह 3:54 बजे) इस मिशन का सफल प्रक्षेपण किया। यहां पाठकों को बताता चलू...

कोरियन ड्रामा से भारतीय सीरियल तक : मनोरंजन की दिशा पर पुनर्विचार...

– ललित गर्ग विश्व के मनोरंजन जगत में पिछले कुछ वर्षों में यदि किसी देश ने टेलीविजन और वेब सीरीज के माध्यम से पूरी दुनिया को सबसे अधिक प्रभावित किया है तो वह दक्षिण कोरिया है। कोरियन ड्रामा आज केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सांस्कृ...

नमक सत्याग्रह ने बदल दी देश की तकदीर और तदबीर...

-बाल मुकुन्द ओझा देश और दुनिया के इतिहास में 6 अप्रैल 1930 का दिन बेहद खास है। आज ही के दिन महात्मा गांधी ने दांडी पहुंचकर समुद्रतट पर अंग्रेजों द्वारा बनाया नमक कानून को तोड़ा। इसी कारण यह दिन इतिहास में अमर हो गया। स्वतंत्रता आंद...

बेमौसम बारिश का कहर: किसानों की मेहनत पर प्रकृति की मार...

-सुनील कुमार महला भारत विश्व का एक प्रमुख कृषि प्रधान देश है, जहाँ आज भी बड़ी आबादी की आजीविका कृषि पर निर्भर है। दूसरे शब्दों में, भारत की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा खेती-किसानी से जुड़ा हुआ है। यहाँ कृषि मुख्यतः प्रकृति, विश...

विवाह संस्था और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच नई खाई...

-ललित गर्ग- आधुनिकता के संक्रमणकालीन दौर में सबसे अधिक यदि कोई संस्था प्रश्नों के घेरे में है, तो वह विवाह और रिश्तों की पारंपरिक अवधारणा है। बदलती जीवनशैली, आर्थिक आत्मनिर्भरता, तकनीक, वैश्वीकरण और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की बढ़ती चे...

समुद्र है तो जीव जंतुओं का अस्तित्व है...

बाल मुकुन्द ओझा भारत में हर साल 5 अप्रैल को राष्ट्रीय समुद्री दिवस मनाया जाता है। यह दिवस भारत के समुद्री इतिहास और विरासत को याद करने और भारतीय समुद्री क्षेत्र के महत्व को उजागर करने के लिए मनाया जाता है। आर्थिक दृष्टि से देखें त...

साहित्यिक पत्रकारिता के कालजयी रचनाकार माखन लाल चतुर्वेदी...

बाल मुकुन्द ओझा हिन्दी जगत् के ख्यात और नामधारी कवि, लेखक, पत्रकार पंडित माखन लाल चतुर्वेदी का जन्म 4 अप्रैल, 1889 ई. में बावई, मध्य प्रदेश में हुआ था। वे बोलचाल की सरल भाषा और ओजपूर्ण भावनाओं के अनूठे रचनाकार थे। आजादी से पूर्व क...

पश्चिम बंगाल बढ़ती अराजकताः लोकतंत्र के लिए चुनौती...

-ललित गर्ग पश्चिम बंगाल, जो कभी सांस्कृतिक चेतना, बौद्धिकता और राजनीतिक परिपक्वता का प्रतीक माना जाता था, आज एक ऐसे संक्रमणकाल से गुजर रहा है, जहां लोकतांत्रिक मूल्यों की जड़ें लगातार कमजोर होती प्रतीत हो रही हैं। जैसे-जैसे चुनाव क...

अपने भीतर के हनुमान को जगाने का पर्व...

-ललित गर्ग हनुमान जयंती केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि मानव जीवन के चरित्र-निर्माण, आत्मबल, संयम, सेवा और समर्पण की प्रेरणा देने वाला महान दिवस है। यह दिन हमें मंदिरों में दीप जलाने से अधिक अपने भीतर के अंधकार को दूर करने का संद...

आटिज्‍म का खतरा : मानसिक विकास हो रहा प्रभावित...

बाल मुकुन्द ओझा देश और दुनिया की अनेक शोध रिपोर्टों में बताया गया है कि कम उम्र में बच्चों को फोन थमाने से उनका मानसिक विकास प्रभावित होता है। एक रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों की मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की आदत उनमें वर्चुअल ऑटि...

बुजुर्गों के भरण-पोषण के लिये एक सराहनीय पहल...

-ललित गर्ग भारतीय संस्कृति में माता-पिता को देवतुल्य माना गया है-“मातृदेवो भव, पितृदेवो भव” केवल शास्त्रों की पंक्ति नहीं, बल्कि हमारी सामाजिक संरचना की आत्मा रही है। इसलिए यह किसी भी सभ्य समाज के लिए अत्यंत शर्मनाक स्थिति है कि ज...

हनुमान जयंती: भक्ति, शक्ति और समर्पण का अद्भुत संगम...

– महेन्द्र तिवारी हनुमान जयन्ती का पावन पर्व हिंदू धर्मानुयायियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रेरणादायी उत्सव है। यह दिन भगवान श्रीराम के परम भक्त हनुमान जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है, जो शक्ति, भक्ति, निष्ठा और...

नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई: आंकड़े, वास्तविकता और भविष्य...

नक्सलवाद भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए लंबे समय से एक गंभीर चुनौती रहा है। यह केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं है, बल्कि गहरे सामाजिक-आर्थिक असंतुलन से जुड़ी समस्या भी है। पाठकों को बताता चलूं कि नक्सलवाद मूलतः माओवाद की विचारधा...

प्रकृति से खिलवाड़ यानि आपदाओं को आमंत्रण...

प्रकृति व पर्यावरण एक-दूसरे के पूरक हैं। प्राकृतिक संपदाओं के महत्व को समझना, उनका किफायती उपयोग करना, उनके संरक्षण को प्राथमिकता देना हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग है। जल, जंगल और जमीन प्रकृति के तीन प्रमुख तत्व हैं जिनके बगैर हमा...

डिजिटलीकरण की रफ्तार और ‘डिजिटल जहर’ का खतरा...

-सुनील कुमार महला आज हमारा देश भारत तेजी से डिजिटाइजेशन की ओर अग्रसर है, और कहना ग़लत नहीं होगा कि इसमें स्मार्टफोन विशेषकर एंड्रॉयड का सबसे बड़ा योगदान है। यहां पाठकों को जानकारी देना चाहूंगा कि वैश्विक स्तर पर जहां एंड्रॉयड उपयो...

युद्ध के माहौल में याद आये भगवान महावीर...

बाल मुकुंद ओझा भगवान महावीर जयंती का पर्व इस वर्ष 31 मार्च को देश में मनाया जा रहा है। आज देश और दुनिया में सर्वत्र युद्ध, हिंसा, मारकाट, धार्मिक असहिष्णुता तथा नफरत का माहौल व्याप्त हो रहा है। लोग एक दूसरे के खिलाफ लड़ – मरन...

जलवायु परिवर्तनः भविष्य नहीं, वर्तमान का महाविनाशकारी संकट...

-ः ललित गर्ग आज मानव सभ्यता जिस सबसे बड़े संकट के सामने खड़ी है, वह युद्ध, महामारी या आर्थिक मंदी नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन है। दुनिया आज जलवायु संकट के ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां हर नया आंकड़ा खतरे की घंटी बनकर सामने आ रहा है। विश्व ...

विश्व के पक्ष में बढ़ता खर्च और गहराता संकट ईरान इजराइल संघर्ष से...

पश्चिम एशिया में चल रहा ईरान और इजराइल के बीच संघर्ष अब एक सीमित युद्ध नहीं रहा बल्कि यह धीरे धीरे एक व्यापक क्षेत्रीय टकराव का रूप लेता जा रहा है। लगभग एक महीने से जारी इस संघर्ष में अब यमन के हूती विद्रोहियों के शामिल होने से हा...

थिएटर : कला, अभिव्यक्ति और बदलाव का माध्यम...

-सुनील कुमार महला हर वर्ष 27 मार्च को विश्व रंगमंच दिवस (वर्ल्ड थिएटर डे) मनाया जाता है। वास्तव में,इसकी शुरुआत वर्ष 1961 में इंटरनेशनल थिएटर इंस्टीट्यूट (आइटीआइ) द्वारा की गई थी, जो यूनेस्को से जुड़ा एक प्रमुख सांस्कृतिक संगठन है...

दुनिया के सबसे धाकड़ और लोकप्रिय नेता बने नरेंद्र मोदी...

बाल मुकुंद ओझा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर वैश्विक स्तर पर सबसे लोकप्रिय नेता बनकर उभरे हैं। मोदी ने अमेरिका और ब्रिटेन जैसे शक्तिशाली देशों के राष्ट्रपतियों को लोकप्रियता के मामले में काफी पीछे छोड़ दिया है। समूची दुनिया...

मर्यादा, सुशासन और शांति के विश्वनायक श्रीराम...

-ललित गर्ग रामनवमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के नैतिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का पुण्य और पवित्र अवसर है। आज जब दुनिया युद्ध, हिंसा, आतंक, असहिष्णुता, पारिवारिक विघटन, राजनीतिक अविश्वास और नैतिक पतन जैसी अनेक स...

धर्म, जाति और धर्मांतरण: सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय...

-ललित गर्ग धर्म, जाति और धर्मांतरण का प्रश्न भारत के सामाजिक, संवैधानिक और राष्ट्रीय जीवन से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील और जटिल विषय है। हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिया गया यह निर्णय कि यदि अनुसूचित जाति का कोई व्यक्ति हिन्दू,...

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में गणेश शंकर विद्यार्थी की पत्रकारिता...

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास केवल राजनीतिक आंदोलनों और सशस्त्र क्रांतियों का इतिहास नहीं है, बल्कि यह उस ‘चौथे स्तंभ’ के जागरण की भी गाथा है, जिसने ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ जनमत बनाने में अभूतपूर्व भूमिका न...

कानून बनाम हकीकत: आखिर क्यों नहीं रुक रहीं सीवर मौतें ?...

-सुनील कुमार महला हमारे देश में सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान होने वाली मौतें एक अत्यंत गंभीर, संवेदनशील और शर्मनाक सच्चाई हैं। वास्तव में, यह समस्या केवल और केवल तकनीकी नहीं, बल्कि यह सामाजिक, प्रशासनिक और मानवाधिकारों से...

बिहार में मजदूरों का लिंक्डइन?...

– महेन्द्र तिवारी क्या मजदूरों का भी लिंक्डइन हो सकता है? ये सवाल सुनकर कई लोग आश्चर्य से भौहें चढ़ा लेंगे। लेकिन बिहार के दरभंगा जिले के चंद्रशेखर मंडल ने न सिर्फ ये सवाल उठाया, बल्कि इसे हकीकत में बदल दिया। हर सुबह शहरों क...

जागरूकता से मिटेगी टीबी से मुक्ति...

विश्व क्षय रोग दिवस हर साल 24 मार्च को दुनियाभर में मनाया जाता है। इस दिवस के आयोजन का मुख्य उद्देश्य क्षय यानि टीबी के रोग के बारे में जनसाधारण में सतर्कता जागरूकता बढ़ाना और लोगों को इसके इलाज के लिए सजग करना है। क्षय रोग अथवा ट...

लोहिया जयंती : कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी...

मशहूर कवि अल्लामा इकबाल की कविता की ये पंक्तियाँ ”कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी” डॉ राम मनोहर लोहिया पर एकदम सटीक बैठती है। लोहिया के कहे गए एक एक शब्द आज भी लोगों की जुबान पर है। भारत में गैर कांग्रेसवाद के जन्...

क्यों धुरंधर 2 ने रचे नए कीर्तिमान...

आदित्य धर के निर्देशन में बनी और रणवीर सिंह अभिनीत ‘धुरंधर 2’ ने भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक ऐसा अध्याय लिख दिया है जिसे आने वाले कई दशकों तक याद रखा जाएगा। बॉक्स ऑफिस पर इस फिल्म ने जो सुनामी पैदा की है, उसने न केव...

सोशल मीडिया और घटती खुशियां: क्या कहती है वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्...

फिनलैंड एकबार फिर से विश्व का सबसे खुशहाल देश बन गया है। पाठकों को बताता चलूं कि फिनलैंड लगातार 9वीं बार दुनिया का सबसे खुशहाल देश बना है। 19 मार्च 2026 नवसंवत्सर के दिन (गुरुवार को) जारी वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट-2026 में भारत 116...

बढ़ता जंगल खुशियों का मंगल...

अंतरराष्ट्रीय वन दिवस प्रतिवर्ष 21 मार्च को मनाया जाता है। अपनी मातृभूमि की मिट्टी और वन सम्पदा का महत्व समझने तथा वनों और जंगलों का संरक्षण करने के उद्देश्य से यह दिवस मनाया जाता है। वैश्विक स्तर पर कुल वन क्षेत्र लगभग 4.14 अरब ह...

एक चिड़िया, अनेक चिड़िया, घर में क्यों नहीं आती चिड़िया...

भला किसने गौरैया को अपने आंगन, घर, खिड़की पर चहचहाते नहीं देखा होगा? अभी इसका जवाब हाँ है, लेकिन जिस तरह के हालात बन रहे हैं उसमें आने वाली पीढ़ी के लिए इसका जवाब न भी हो सकता है। साथ ही हममें से लगभग पुराने दौर के सभी लोगों ने 19...

नकली उत्पादों का बाजार : हर तीसरा व्यक्ति हुआ शिकार...

नकली सामान की समस्या से इस समय पूरी दुनिया जूझ रही है। एक अनुमान के मुताबिक, वैश्विक बाजार में नकली सामान की हिस्सेदारी 5 प्रतिशत तक है। भारत में हालात ज्यादा चिंताजनक है। देश में नकली उत्पादों का बाजार तेजी से बढ़ रहा है, यहां 30...

राजस्थान दिवस का उत्सवी आगाज...

राज्य की भजनलाल सरकार ने हिन्दू नववर्ष (वर्ष प्रतिपदा) पर राजस्थान स्थापना दिवस मनाने का उत्सवी आगाज किया है। राज्य सरकार जनभागीदारी के साथ राजस्थान दिवस मनाने जा रही है। 30 मार्च को मनाया जाने वाला राजस्थान दिवस इस बार 19 मार्च क...

प्रकृति की नन्ही दूत है चिड़िया...

रमेश सर्राफ धमोरा विश्व गौरैया दिवस नन्ही घरेलू गौरैया और अन्य पक्षियों को समर्पित है। गौरैया की संख्या में हो रही तीव्र गिरावट के बारे में जागरूकता पैदा करने और लोगों को इन परिचित पक्षियों की रक्षा करने के लिए प्रोत्साहित करने हे...

फास्टैग एनुअल पास हुआ अब महंगा...

– महेन्द्र तिवारी भारत में सड़क परिवहन व्यवस्था पिछले एक दशक में जिस तेजी से बदली है, वह देश के बुनियादी ढांचे के विकास की कहानी को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। पहले राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा करना कई बार थकाऊ अनुभव बन जाता...

विलुप्त होते जा रहे है जीव जंतु और वनस्पतियां...

बाल मुकुन्द ओझा जलवायु परिवर्तन से दुर्लभ प्रजाति वाले जीव-जंतु और वनस्पतियां लुप्त होती जा रही हैं। जमीन, वायु और समुद्री जीव जंतुओं और वहां की वनस्पतियां इस संकट से जूझ रही हैं। जलवायु परिवर्तन ने प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक द...

घातक और जानलेवा बीमारियों का रक्षा कवच है टीकाकरण...

देश में 16 मार्च को राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस आमजन में जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। इस वर्ष की थीम सभी के लिए टीकाकरण मानवीय रूप से संभव है रखी गई है। इस थीम का मुख्य संदेश है कि यदि सामूहिक प्रयास और मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था...

सोनम वांगचुक और लद्दाख के स्वायत्तता का भविष्य...

– महेन्द्र तिवारी केंद्र सरकार ने हाल ही में लद्दाख के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक पर लगे राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। जोधपुर जेल में 170 दिनों की हिरासत के बाद ...

ट्रंप के दावे और टूटता तिलस्म...

डोनाल्ड ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति और उनके आक्रामक व्यापारिक दृष्टिकोण ने वैश्विक भू-राजनीति में भारत और अमेरिका के संबंधों को एक जटिल धरातल पर लाकर खड़ा कर दिया है। हाल के घटनाक्रम और ट्रंप के बयानों से यह आभास हो...

डिजिटल ठगी का बढ़ता जाल : हर 24 घंटे में हो रही 38 करोड़ रुपये की...

इस वर्ष हम उपभोक्ता दिवस ऐसे माहौल में मना रहे है जब उपभोक्ता साइबर ठगी के आगे बेबस नज़र आ रहे है। उपभोक्ता ठगी के नए नए तरीके इस्तेमाल में लिए जा रहे है। हालांकि डिजिटल दुनिया ने बेशक हमारी जिंदगी को आसान बना दिया है, लेकिन इसके स...

दुनिया उठा रही है तीन देशों के युद्ध का खामियाजा...

बाल मुकुंद ओझा तीन देशों के युद्ध में इस समय समूची दुनिया प्रभावित हो रही है। अर्थव्यवस्था चौपट हो रही है और तेल गैस का संकट खड़ा हो गया है। भारत अपनी गुट निरपेक्षता के लिए जाना जाता है और इस समय भारत भी कई प्रकार के संकट झेलने को ...

इच्छा मृत्यु केवल कानून ही नहीं, मानवीय गरिमा का प्रश्न...

-ः ललित गर्ग भारतीय समाज में यह गहरी धारणा रही है कि परिवार के किसी सदस्य की सेवा तब तक की जाए, जब तक उसके प्राण स्वाभाविक रूप से समाप्त न हो जाएं। जीवन की रक्षा और उसकी देखभाल को एक नैतिक कर्तव्य के रूप में देखा जाता रहा है। यही ...

जलियांवाला बाग से कैक्सटन हॉल तक : शहीद-ए-आजम ऊधम सिंह की अमर गाथ...

-सुनील कुमार महला शहीद-ए-आजम सरदार उधम सिंह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उन दीपस्तंभों में से एक हैं, जिनका नाम साहस और अटूट संकल्प का प्रतीक है। दूसरे शब्दों में कहें तो उधम सिंह (राम मोहम्मद सिंह आज़ाद) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम...

स्वास्थ्य के लिए खतरे की घंटी है परिवहन प्रदूषण...

दुनिया भर के बहुत से देशों में सड़कों पर वाहनों की निरंतर बढ़ती संख्या परिवहन प्रदूषण का एक प्रमुख स्रोत है। हमारा देश भारत भी इस समय परिवहन प्रदूषण की विभीषिका से जूझ रहा है। सड़कों का आधारभूत ढांचा हमारी अर्थव्यवस्था का सुदृढ़ आधार...

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का स्वर्णिम अध्याय : दांडी मार्च...

-सुनील कुमार महला भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की दृष्टि से 12 मार्च 1930 का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक है। जैसा कि इसी दिन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने गुजरात के साबरमती आश्रम से दांडी नामक स्थान तक लगभग 390 किलोमीटर (241 मील...

सामाजिक ताने बाने को नष्ट भ्रष्ट कर रही वेब सीरीज...

बालमुकुंद ओझा आजकल वेब सीरीज की चर्चा ज्यादा हो रही है। क्या आप जानते है वेब सीरीज क्या होती है और इसका मतलब क्या होता है। वेब सीरीज दरअसल इंटरनेट पर जारी धारावाहिक या वीडियो एपिसोड की एक श्रृंखला होती है और इसे वेब शो के नाम से भ...