Category Archives: लेख

गोवा क्रांति दिवस : लम्बे जनजागरण के बाद मिली थी गोवा को आज़ादी...

-बाल मुकुन्द ओझा भारत में प्रतिवर्ष 18 जून के दिन को गोवा क्रांति दिवस के रूप मे मनाया जाता है। यह दिन गोवा की आजादी की लडाई के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों से लिखा गया है। आज ही के दिन 18 जून 1946 में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और सम...

सड़कों पर बढ़ता संकट : आवारा पशु और हमारी सामूहिक जिम्मेदारी...

-सुनील कुमार महला आज हमारे देश के छोटे-बड़े शहरों और कस्बों की गलियों, मुख्य सड़कों तथा व्यस्त बाजारों में आवारा पशुओं, विशेषकर गोवंश की बढ़ती संख्या एक अत्यंत गंभीर, सामाजिक और संवेदनशील समस्या बन चुकी है। हर तरफ नजर दौड़ाने पर सड़कों...

चिन्ताजनक है महंगी होती दवाइयां, महंगा होता इलाज...

-ललित गर्ग भारत आज विकसित राष्ट्र बनने के स्वप्न के साथ आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण की परिकल्पना बार-बार दोहराई जा रही है। बड़े-बड़े बुनियादी ढांचे, डिजिटल क्रांति, अंतरिक्ष उपलब्धियां और आर्थिक विकास के दावों...

दुनिया हर साल खो देती है 24 अरब टन उपजाऊ भूमि...

-बाल मुकुन्द ओझा संयुक्त राष्ट्र हर साल 17 जून को मरुस्थलीकरण और सूखे का मुकाबला करने के लिए विश्व मरुस्थलीकरण एवं सूखा विरोधी दिवस मनाता है। इस वर्ष इस दिवस की थीम चारागाह : पहचानें और सम्मान करें रखी गई है। इस वर्ष की थीम पारिस्...

ममता दीदी और उनकी मुश्किलें...

-महेन्द्र तिवारी पश्चिम बंगाल की राजनीति में साल 2026 एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक उलटफेर के गवाह के रूप में दर्ज हो चुका है। लगातार 15 वर्षों तक राज्य की सत्ता पर एकछत्र राज करने वाली तृणमूल कांग्रेस और उसकी सर्वोच्च नेता ममता बनर्जी...

इज्जत की जिंदगी से मोहताज़ होते बुजुर्ग...

बाल मुकुन्द ओझा देश और दुनिया में हर साल 15 जून, विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस के तौर पर मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य बुजुर्ग के साथ होने वाले दुर्व्यवहार की तरफ लोगों का ध्यान आकर्षित कर उन्हें जागरूक करना...

सनातन आस्था का पर्व सोमवती अमावस्या और मिथुन संक्रांति...

– महेन्द्र तिवारी सनातन परंपरा और वैदिक ज्योतिष में ग्रहों के गोचर का गहरा महत्व है। वर्ष 2026 में एक अद्भुत और दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग बनने जा रहा है। 15 जून 2026 को एक ही दिन में कई बड़े धार्मिक अवसर एक साथ घटित हो रहे हैं।...

क्यों मनाया जाता है विश्व रक्तदान दिवस और क्या हैं इसके फायदे ?...

विश्व रक्तदान दिवस हर वर्ष 14 जून को मनाया जाता है। कहना ग़लत नहीं होगा कि यदि कोई भी व्यक्ति अपने जीवन में रक्त का दान करता है तो यह मानवता के हित में सबसे बड़ा काम है, लेकिन एक आंकड़े के अनुसार हमारे देश की आबादी का केवल 37 प्रत...

क्यों पहाड़ों पर ही रह जाते हैं पर्वतारोहियों के शव?...

– महेन्द्र तिवारी माउंट एवरेस्ट, जो कि संसार की सबसे ऊंची पर्वत चोटी है, सदियों से इंसानी साहस और महत्वाकांक्षा का प्रतीक रही है। समुद्र तल से 8848 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस बर्फीले शिखर को छूने का सपना दुनिया भर के अनगिनत स...

खानपान में जैविक प्रदूषण : हर दिन हजारों मौतें और लाखों बीमार...

बाल मुकुन्द ओझा विश्व स्वास्थ्य संगठन की ग्लोबल बर्डन ऑफ़ फूड़बॉर्न डिजीजेज 20 – 21 शीर्षक से जारी एक ताज़ा रिपोर्ट में दूषित भोजन के सेवन से होने वाले खतरनाक स्वास्थ्य संकट से चेताया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि खेत से घर क...

जब भारत ने सैन्य विमान निर्माण में रचा नया इतिहास...

-महेन्द्र तिवारी भारत ने रक्षा और विमानन क्षेत्र में एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिसे आने वाले वर्षों में देश की औद्योगिक और सामरिक प्रगति के महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में याद किया जाएगा। गुजरात के वडोदरा स्थित टाटा और एयरबस की अंत...

मानवता के माथे पर कलंक है बाल श्रम...

हमारी लाख कोशिशों के बाद भी देश में बाल श्रम को ख़त्म नहीं किया जा सका है। इसमें गरीबी, अशिक्षा जैसे अनेक कारण गिनाये जा सकते है मगर खेलने कूदने और शिक्षा प्राप्त करने के दिनों में बच्चों द्वारा मजदूरी करना निश्चय ही मानता पर कलंक ...

स्वाधीनता संग्राम में अमर नाम है राम प्रसाद बिस्मिल का...

-महेन्द्र तिवारी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में वैचारिक चेतना और सशस्त्र क्रांति का एक ऐसा अनूठा संगम देखने को मिलता है जिसने दमनकारी ब्रिटिश सत्ता की नींव हिलाकर रख दी थी। इस अद्वितीय संगम के सबसे प्रखर प्रतीक पुरुष थे अ...

बुलंदियों पर मोदी का आत्मविश्वास : तोड़ा नेहरू और इंदिरा का रिकॉर...

बाल मुकुन्द ओझा मोदी सरकार के कार्यकाल के बारह सालों की चर्चा इन दिनों हर किसी की जुबान पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आजाद भारत में सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री पद पर बने रहने के पंडित जवाहरलाल नेहरू के रिकॉर्ड को तोड़ दिया...

लुप्त होने लगी हैं बहुमूल्य औषधीय वनस्पतियां...

बाल मुकुन्द ओझा राष्ट्रीय जड़ी-बूटी और मसाला दिवस 10 जून को मनाया जाता है। इस दिवस की शुरूआत सन् 1999 में हुई थी। जड़ी-बूटी दिवस औषधीय पौधों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक महत्व को याद दिलाने का अवसर है। यह दिवस हमें प्रकृति...

परमाणु हथियारों की दौड़ में भारत और पाकिस्तान...

-महेन्द्र तिवारी स्टॉकहोम स्थित अंतरराष्ट्रीय शोध संस्था सिपरी की वर्ष 2026 की रिपोर्ट ने दक्षिण एशिया की सामरिक राजनीति को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। रिपोर्ट के अनुसार जनवरी 2026 तक भारत के पास लगभग 190 परमाणु वॉरहेड्स हैं, जबकि ...

आदिवासी समाज के भगवान बिरसा मुंडा...

बाल मुकुन्द ओझा आज भारतीय इतिहास के एक महान नायक, जननायक और आदिवासी समाज के भगवान कहे जाने वाले बिरसा मुंडा का शहीद दिवस है। अंग्रेजों के खिलाफ जल, जंगल और जमीन की लड़ाई लड़ने वाले बिरसा मुंडा की मौत बहुत ही रहस्यमय और दुखद परिस्थ...

क्या भारत बूढ़ा होने की ओर बढ़ रहा है?...

– महेन्द्र तिवारी भारत को लंबे समय से वैश्विक पटल पर एक ऊर्जावान और सबसे युवा आबादी वाले देश के रूप में देखा जाता रहा है। यही वह मुख्य कारण है जिसके आधार पर पिछले कुछ वर्षों में दुनिया भर के अर्थशास्त्रियों और विचारकों ने भा...

पृथ्वी और मानव जीवन की अमूल्य धरोहर है महासागर...

बाल मुकुन्द ओझा विश्व महासागर दिवस प्रतिवर्ष 8 जून को मनाया जाता है। इस दिवस को मानाने का उद्देश्य लोगों को समुद्र की विशेषता और बहुमूल्य वस्तुओं की सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाना है। इसके लिए हर वर्ष एक थीम जारी की जाती है। थीम...

नरेंद्र मोदी के नाम दर्ज होने जा रहा एक नया रिकॉर्ड...

-महेन्द्र तिवारी भारतीय लोकतंत्र विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र माना जाता है। यहाँ जनता समय-समय पर अपने नेताओं का चयन करती है और सत्ता परिवर्तन के माध्यम से लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत बनाती है। स्वतंत्रता के बाद से देश ने अनेक प्र...

शतरंज के नए विश्व नायक बने भारत के प्रज्ञानंद...

– महेन्द्र तिवारी वैश्विक शतरंज के इतिहास में 6 जून 2026 का यह दिन सुनहरे अक्षरों में अंकित हो चुका है। भारत के युवा और असाधारण रूप से प्रतिभाशाली खिलाड़ी रमेशबाबू प्रज्ञानंद ने दुनिया की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित शतरंज प्रतिय...

खाद्य जनित बीमारियों से आज भी 60 करोड़ लोग बीमार पड़ते हैं...

बाल मुकुन्द ओझा संयुक्त राष्ट्र द्वारा सात जून को विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र ने विश्व स्वास्थ्य संगठन और खाद्य और कृषि संगठन को खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी दी है। विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस...

बदलते परिवेश में भी भारत और रूस की मित्रता रहेगी कायम...

-महेन्द्र तिवारी वैश्विक कूटनीति के निरंतर बदलते स्वरूप के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भारत के संदर्भ में दिया गया हालिया बयान दोनों देशों के बीच की प्रगाढ़ और ऐतिहासिक मित्रता को एक नई ऊर्जा प्रदान करता है। पुतिन ने अत...

विश्व कीट दिवस : छोटे जीव, बड़ा संकट...

कीट प्रकृति के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मधुमक्खियाँ, तितलियाँ और अनेक अन्य कीट परागण, जैविक अपघटन तथा खाद्य श्रृंखला को बनाए रखने में सहायक होते हैं। किंतु सभी कीट लाभदायक नहीं होते। मच्छर, दीमक, टिड्डी, फल मक्खी औ...

बदलती जीवनशैली की बढ़ती कीमत डायबिटीज और मोटापे की गिरफ्त में आता...

-कांतिलाल मांडोत राजस्थान में डायबिटीज अब केवल एक बीमारी नहीं बल्कि एक गंभीर सामाजिक और स्वास्थ्य चुनौती बनती जा रही है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-6) की हाल ही में जारी रिपोर्ट ने प्रदेश की स्वास्थ्य स्थिति को...

प्राणी जीवन की रक्षा हेतु प्रकृति और पर्यावरण की सुरक्षा आवश्यक...

-बाल मुकुन्द ओझा पांच जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाने का उद्देश्य पर्यावरण के प्रति लोगों में जागरुकता फैलाना है। इस साल विश्व पर्यावरण दिवस की थीम प्रकृति से प्रेरित: जलवायु और हमारे भविष्य के लिए रखी गई है। पर्यावरण को लेकर आज ...

बंगाल में सत्ता गंवाने वाली पार्टियां कभी वापसी नहीं करतीं...

-बाल मुकुन्द ओझा बंगाल की सियासत में इस समय जैसे को तैसा की कहावत चरितार्थ हो रही है। बुरी तरह पराजित होने के बाद तृणमूल कांग्रेस और उनके नेता हार के सदमे से उबर नहीं पाये है। तृणमूल के नेताओं को देखते ही लोग गुस्से से उबल पड़ते है...

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला विवाहित पुत्रियों को भी मिलेगा सम...

-कांतिलाल मांडोत भारत का संविधान सभी नागरिकों को समानता का अधिकार प्रदान करता है। समय के साथ न्यायपालिका ने अनेक ऐसे निर्णय दिए हैं जिन्होंने समाज में व्याप्त भेदभावपूर्ण व्यवस्थाओं को चुनौती दी है और समान अधिकारों की अवधारणा को म...

कंप्यूटर और लैपटॉप बना रहे हैं बीमार...

-बाल मुकुन्द ओझा गलत आदते हमारे सेहत की दुश्मन बन गई है। हम एक्ससरसाइज से दूर हो रहे है और छोटे स्क्रीन से चिपके हुए है जिसका खामियाजा शरीर को उठाना पड़ रहा है। सुबह आँख खुलने से देर रत तक मोबाइल, लैपटॉप, ईयरफोन और स्क्रीन हमारे सा...

स्वस्थ जीवन एवं स्वस्थ पर्यावरण का आधार है साइकिल...

-ः ललित गर्ग हर वर्ष 3 जून को मनाया जाने वाला विश्व साइकिल दिवस केवल एक साधारण वाहन के सम्मान का अवसर नहीं है, बल्कि यह मानव स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समानता और सतत विकास के प्रति वैश्विक प्रतिबद्धता का प्रतीक है। आज जब...

कमजोर मानसून तो महंगाई का लगेगा तड़का, अर्थव्यवस्था होगी प्रभावित...

एक बात साफ हो जानी चाहिए कि मानसून हमेशा सामान्य ही रहेगा यह सोचना अपने आप में गलत होगा। जिस तरह से वातावरण प्रदूषित हो रहा है, जंगल घटते जा रहे हैं, पेड़ पौधे कम हो रहे हैं वह किसी और की देन नहीं हमारे कारण ही हो रहा है। हालात यह ...

पेट्रोल बचत का ज्ञान, सरकारी गाड़ियों में खानदान...

– डॉ. प्रियंका सौरभ देश में जब भी पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें बढ़ती हैं, तब अचानक सरकारों, अधिकारियों और नेताओं को “ईंधन बचत” की चिंता सताने लगती है। टीवी चैनलों पर संदेश चलने लगते हैं, अखबारों में विज्ञापन छपते हैं और मंचों ...

जब कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने अनुवाद की मूक पशुओं की भाषा...

-महेन्द्र तिवारी मानव सभ्यता के इतिहास में यह इच्छा हमेशा से रही है कि हम अपने आस-पास के मूक पशुओं की भाषा को समझ सकें। पौराणिक कहानियों से लेकर आधुनिक विज्ञान कथाओं तक, जानवरों से बातचीत करने की क्षमता को हमेशा एक जादुई शक्ति या ...

तम्बाकू की लत कर रही है घर-परिवार तबाह...

-बाल मुकुन्द ओझा विश्व तम्बाकू निषेध दिवस हर साल दुनिया भर में 31 मई को मनाया जाता है। यह दिन लोगों को तम्बाकू के खतरों के बारे में जागरूक करने और इसके सेवन को रोकने के लिए मनाया जाता है। विश्व तंबाकू निषेध दिवस 2026 का विषय निकोट...

हिन्दी पत्रकारिता दिवस : बदलते दौर में सच की तलाश...

भारत में हर वर्ष 30 मई को हिन्दी पत्रकारिता दिवस मनाया जाता है। यह दिन केवल एक औपचारिक उत्सव नहीं, बल्कि उस वैचारिक यात्रा का स्मरण है जिसने देश की चेतना को शब्द दिए। 30 मई 1826 को पंडित जुगल किशोर शुक्ल ने कोलकाता से हिन्दी के प्...

त्रिभाषा फार्मूला है भारत की शिक्षा का नया क्षितिज...

-ललित गर्ग भारत केवल एक राष्ट्र नहीं, बल्कि भाषाओं, बोलियों, संस्कृतियों और परंपराओं का विराट संगम है। यहां भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि पहचान, संस्कृति, संवेदना और सामाजिक चेतना का आधार भी है। ऐसे बहुभाषी देश में शिक्षा ...

वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के दौर में, भारत क्यों बना हुआ है मजबूत?...

-महेन्द्र तिवारी दुनिया इस समय आर्थिक अनिश्चितता के ऐसे दौर से गुजर रही है जिसमें युद्ध, ऊर्जा संकट, महंगाई, व्यापारिक अस्थिरता और राजनीतिक तनाव एक साथ वैश्विक व्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष ने पूरी...

सावरकर और हिंदुत्व एक ही सिक्के के दो पहलू है...

-बाल मुकुन्द ओझा वीर सावरकर की जयंती के अवसर पर देश में हिंदुत्व की चर्चा होना स्वाभाविक है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मानना है, हिंदुत्व वह तत्व है जो हमारे पूरे समाज को आपस में जोड़ता है और आपसी बंधनों को मजबूत करता है। जो कोई भ...

कॉकरोच से क्रांति तक : सोशल मीडिया पर युवाओं का डिजिटल विद्रोह...

-सुनील कुमार महला हमारे देश में इन दिनों ‘कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी)’ नाम सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में है। यह चर्चा इतनी तेज़ी से बढ़ी कि इसके इंस्टाग्राम अकाउंट पर लगभग 1 करोड़ से 2.2 करोड़ (10–22 मिलियन) तक फॉलोअर्स पहुंचने के...

नौ दिन तपायेगा नौतपा

-बाल मुकुंद ओझा हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ का महीना सबसे गर्म माना जाता है और इस दौरान सूर्य देव अपने चरम पर होते हैं। वहीं मान्यता यह है कि इसी दौरान नौतपा आता है, जिसका मतलब है साल के सबसे ज्यादा गर्म 9 दिन। देश में नौतपा 25...

यह कैसा समाज है, जिसमें अदालतें समझाएं रिश्तों का धर्म...

-ललित गर्ग किसी भी सभ्यता की वास्तविक पहचान उसकी ऊँची इमारतों, चमकती सड़कों, आर्थिक प्रगति या तकनीकी उपलब्धियों से नहीं होती, बल्कि इस बात से होती है कि वह अपने बुजुर्गों, माता-पिता और निर्बल वर्ग के प्रति कितना संवेदनशील है। लेकिन...

अमेरिका-ईरान युद्ध से महंगाई के कारण आमजन प्रभावित...

-डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा भले ही 1970 के तेल संकट जैसे हालात होने की संभावना ना हो या 2008 जैसी वित्तीय मंदी के हालात ना हो फिर भी एक बात साफ है कि अमेरिका-ईरान के बीच करीब तीन माह से चल रहे युद्ध के नकारात्मक परिणाम सामने आने ल...

महान क्रांतिकारी नेता रासबिहारी बोस...

-बाल मुकुन्द ओझा आज भारत के एक महान क्रान्तिकारी नेता रासबिहारी बोस की जयंती है। रासबिहारी बोस का जन्म 25 मई 1886 को बंगाल में बर्धमान जिले के सुबालदह गाँव में हुआ था। रासबिहारी बोस ने ब्रिटिश राज के विरुद्ध गदर षडयंत्र एवं आजाद ह...

कॉकरोच जनता पार्टी और युवाओं का आभासी विद्रोह...

-महेन्द्र तिवारी भारत में राजनीति हमेशा केवल चुनाव, दलों और भाषणों तक सीमित नहीं रही। समय बदलने के साथ राजनीति की भाषा, उसके प्रतीक और विरोध के तरीके भी बदलते रहे हैं। कभी सड़कों पर नारे लगाकर विरोध दर्ज कराया जाता था, कभी कविताओं...

तेल संकट की आंच में झुलसती भारतीय अर्थव्यवस्था...

-महेन्द्र तिवारी पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में पैदा हुए संकट ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को अस्थिर कर दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच टकराव ने जिस तरह वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है, उसका असर अब के...

लू का कहर : बचाव ही उपचार है...

बाल मुकुंद ओझा देश के अधिकांश राज्य विशेषकर देश की राजधानी दिल्ली एनसीआर सहित उत्तर और मध्य भारत इस समय झुलसाने वाली गर्म हवाओं की चपेट में है। त्वचा को झुलसाने और शरीर का पानी सुखाने वाली गर्म हवाएं चल रही हैं। इसे हम लू भी कह सक...

प्रतिभाशालियों के हौसले तोड़ता रोज-रोज का पेपर लीक...

-ऋतुपर्ण दवे भारत में एक बार फिर प्रतिष्ठित मेडिकल परीक्षा का पेपर लीक हो गया। पेपर लीक एकदम आम सा हो गया है। जितनी सहजता से खामियों को छुपाते हुए परीक्षा रद्द कर दी जाती है, उसके एवज में लाखों बच्चों के मनोमस्तिष्क पर इसका क्या प...

सुरक्षित जीवन का आधार है जैव विविधता...

बाल मुकुन्द ओझा अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस 22 मई को मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा हर साल जैव विविधता के मुद्दों के बारे में लोगों की समझ और जागरूकता विकसित करने के लिए यह दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष की थीम स्थानीय रूप ...

नौतपा और भारतीय जीवन दर्शन...

-महेन्द्र तिवारी भारतीय उपमहाद्वीप की जलवायु विश्व की सबसे विविध और जटिल जलवायु प्रणालियों में गिनी जाती है। यहाँ ऋतुओं का परिवर्तन केवल मौसम का बदलाव नहीं होता, बल्कि यह कृषि, अर्थव्यवस्था, समाज और मानव जीवन की गति को भी निर्धारि...

सांस्कृतिक विविधता भारत की अन्तर्राष्ट्रीय धरोहर है...

बाल मुकुन्द ओझा संवाद और विकास के लिए सांस्कृतिक विविधता का विश्व दिवस 21 मई को मनाया जाता है। यूनेस्को द्वारा इस दिन को मनाने का उद्देश्य विभिन्न देशों की संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों को समझना तथा उनका सम्मान करना है। हर दे...

एआई का दुरुपयोग नहीं सदुपयोग हो...

-अशोक बैद आज एआई का जमाना है और मानव जीवन में दिन प्रतिदिन इसका उपयोग बढ़ता जा रहा है पर देखने में आ रहा है कुछ लोग इसका सदुपयोग की जगह दुरुपयोग ज्यादा करने लगे हैं जिससे एआई वरदान की जगह अभिशाप बनता जा रहा है। लोग एआई का दुरुपयोग...

बेजुबान पक्षी और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संगम...

– महेन्द्र तिवारी आज के आधुनिक युग में वैश्विक स्तर पर शहरीकरण अत्यंत तीव्र गति से बढ़ रहा है। इस प्रगति के साथ ही दुनिया भर के महानगर और शहर एक अत्यंत विकराल समस्या से जूझ रहे हैं, और वह समस्या है कचरा प्रबंधन की। हमारे शहर...

झुलसाती गर्मी के साथ आंधी – बारिश और लू का चौतरफा अटैक...

-बाल मुकुंद ओझा यह मौसम गर्मी का है। इस दौरान जलवायु परिवर्तन के अज़ब गज़ब नज़ारों से देश और दुनिया को को दो दो हाथ करने पड़ रहे है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने चेतावनी जारी कर कहा है कि देश के बड़े हिस्से में भीषण लू चल रही है, और दिल...

नियंत्रित अनिश्चितता के दौर में अमेरिका और चीन...

– महेन्द्र तिवारी वैश्विक राजनीति के वर्तमान दौर में अमेरिका और चीन के बीच बीजिंग में आयोजित हुई उच्च स्तरीय बैठक को एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है। वर्तमान समय में संपूर्ण विश्व एक जटिल...

सांस्कृतिक धरोहरों की सुरक्षा में संग्रहालयों की नई चुनौतियां...

-सुनील कुमार महला संग्रहालयों के महत्व, इनके इतिहास, इनकी संस्कृति और विरासत के संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने के क्रम में प्रतिवर्ष 18 मई को अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस (इंटरनेशनल म्यूजियम डे) मनाया जाता है। कहना ग़ल...

कब तक दोहराई जाती रहेंगी निर्भया जैसी त्रासदियां?...

-ः ललित गर्ग दिल्ली के नांगलोई में एक निजी बस के भीतर महिला के साथ हुई बस कंडक्टर एवं ड्राइवर के दुष्कर्म की घटना ने एक बार फिर पूरे देश की चेतना को झकझोर दिया है। यह घटना केवल एक आपराधिक वारदात नहीं, बल्कि उस भयावह सामाजिक और प्र...

हाई ब्लड प्रेशर बना साइलेंट किलर...

बाल मुकुन्द ओझा विश्व उच्च रक्तचाप दिवस हर वर्ष 17 मई को मनाया जाता है। दरअसल आजकल की सभी बीमारियां खराब जीवनशैली से जुड़ी होती हैं, ऐसे में ब्लड प्रेशर की समस्या को कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है। ब्लड प्रेशर को मैनेज करने के लि...

डेंगू पर नियंत्रण के प्रभावी प्रयास...

-बाल मुकुन्द ओझा राष्ट्रीय डेंगू दिवस प्रतिवर्ष 16 मई को पूरे भारत में मनाया जाता है। डेंगू के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने और बचाव के तरीके समझाने के उद्देश्य से यह दिवस मनाया जाता है। हमारे देश में हमने काफी हद तक डेंगू पर काबू पाने का...

नेताओं के सिर चढ़कर बोल रहा है नफरत का काला जादू...

बाल मुकुन्द ओझा राम और कृष्ण के देश में इस समय एक दूसरे के प्रति नफरत और घृणा की बयार बह रही है। पूर्व से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक तक बयानवीरों ने जैसे नफरती बयानों का ठेका ले लिया है। हिन्दू – मुस्लिम तो आज़ादी के बाद से...

संस्कार और खुशियों का खजाना है परिवार...

बाल मुकुन्द ओझा विश्व परिवार दिवस 15 मई को मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र ने 1994 को अंतर्राष्ट्रीय परिवार वर्ष घोषित किया था। समूचे संसार में लोगों के बीच परिवार की अहमियत बताने के लिए हर साल 15 मई को अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस म...

शारीरिक श्रम के प्रति लापरवाह हो रहे हमारे युवा...

-बाल मुकुंद ओझा शरीर को स्वस्थ और फिट रखने की कोशिशें एक बार फिर परवान पर है। विभिन्न शोध रिपोर्टों में साफतौर पर इंगित किया गया है कि आजकल की भागदौड़ भरी और व्यस्त लाइफस्टाइल ने बच्चे से बुजुर्ग तक को समय से पूर्व ही शारीरिक रूप स...

मातृभाषा, संस्कृति और शिक्षा : राजस्थानी के पक्ष में ऐतिहासिक निर...

-सुनील कुमार महला भारत की भाषाई, सांस्कृतिक और शैक्षिक चेतना के लिए 12 मई 2026 का दिन ऐतिहासिक माना जाएगा। दरअसल, 12 मई 2026 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय(माननीय सुप्रीम कोर्ट) ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए राजस्थान सरकार को य...

इंडि की एकता : मुंह में राम बगल में छुरी...

-बाल मुकुन्द ओझा बंगाल, तमिलनाडु और केरलम चुनावों के बाद दिखावे के लिए विपक्ष की एकता के गीत अवश्य गाये जा रहे है मगर असल में इंडि गठबंधन में दरार चौड़ी होती जा रही है। अपनी करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी...

परीक्षा प्रणाली पर उठते सवाल : क्या प्रतिभा से ज्यादा मजबूत हो गय...

-सुनील कुमार महला हाल ही में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने नीट-यूजी परीक्षा के संदर्भ में एक विस्तृत प्रेस रिलीज़ जारी कर यह स्पष्ट किया है कि वह निष्पक्ष, सुरक्षित और भरोसेमंद परीक्षाएं कराने तथा परीक्षा प्रणाली की ईमानदारी बन...

वैश्विक संकट के दौर में दूरगामी सोच का परिणाम है प्रधानमंत्री की ...

-डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा ऐसा नहीं है कि भारत विदेशी मुद्रा के मामलें में संकट में हो बल्कि वास्तविकता तो यह है कि 10 अप्रेल, 2026 के आंकड़ों की ही बात करें तो भारत का विदेशी मुद्रा भण्डार आज उच्चतम स्तर पर है। 700 बिलियन अमेरिकी...

समाज को स्वस्थ रखने में नर्सिंग कर्मियों की अहम भूमिका...

-बाल मुकुन्द ओझा अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस 12 मई को मनाया जाता है। यह दिवस स्वास्थ्य सेवाओं में नर्सों के योगदान को सम्मानित करने तथा उनसे संबंधित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा के लिए मनाया जाता है। यह दिन हमारे लिए नर्सों कि कड़ी मेहनत,...

भाजपा को अगले साल होने वाले चुनावों में जीत की उम्मीद...

बाल मुकुन्द ओझा भाजपा ने बंगाल और असम में बड़ी जीत के बाद अब अगले साल होने वाले गोवा, गुजरात, मणिपुर, पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में अपनी चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। इनमें पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव फर...

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस : विज्ञान, नवाचार और आत्मनिर्भरता का ...

-सुनील कुमार महला राजस्थान के पोखरण में हुए सफल परमाणु परीक्षणों तथा भारत की ऐतिहासिक तकनीकी उपलब्धियों की स्मृति में प्रतिवर्ष 11 मई को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस मनाया जाता है। वास्तव में, यह दिवस केवल हमारे देश की वैज्ञानिक सफ...

महिला आरक्षण पर राजनीतिक दलों का दोहरा चरित्र...

-ः ललित गर्ग भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी विडंबनाओं में से एक यह है कि जिस देश में महिलाओं को “शक्ति”, “मातृशक्ति” और “आधी दुनिया” कहकर सम्मानित किया जाता है, वहीं राजनीति में उन्हें समान भागीदारी देने के प्रश्न पर लगभग सभी राजनीति...

गर्मी में पशु-पक्षियों का भी रखें ख्याल...

-बाल मुकुन्द ओझा गर्मियों का मौसम विशेषकर पशु पक्षियों के लिए बहुत कष्टप्रद होता है। गर्मी शुरू होने के साथ ही पशु-पक्षी पानी की तलाश में इधर-उधर भटकते रहते हैं। पशु-पक्षियों को जिंदा रहने के लिए हर रोज पानी की जरूरत होती है। गर्म...

मणिपुर हिंसा : आक्रोश में अवसर तलाशता विपक्ष...

-संजय सक्सेना भारत के पूर्वोत्तर का एक छोटा सा राज्य मणिपुर पिछले कई सालों से क्षेत्रीय हिंसा की खबरों के कारण पूरे देश में सुर्खियां बटोर रहा है। एक तरफ मोदी सरकार लगातार दावे कर रही है कि मणिपुर में हालात बेहतर करने के लिये लगात...

महात्मा गांधी के राजनीतिक गुरु और मार्गदर्शक गोपाल कृष्ण गोखले...

बाल मुकुन्द ओझा आज महान देशभक्त और स्वतंत्रता सेनानी गोपाल कृष्ण गोखले की जयंती है। गोखले महान विचारक, समाज सुधारक, शिक्षाविद और राजनीतिज्ञ थे, जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में अनुकरणीय नेतृत्व प्रदान किया। महात्मा गांधी उन्हें अपन...

गंगोत्री से गंगासागर तक वेग के साथ बढ़ती बीजेपी की ‘हिंदूधारा’...

-संजय सक्सेना पश्चिम बंगाल में जीत के बाद एक नया ट्रेंड दिखाई दे रहा है। पहले जो बीजेपी कहा करती थी कि हमें मुसलमानों का वोट नहीं मिलता है, अब वही बीजेपी खुलेआम कहती है कि वह हिंदुओं के वोट से चुनाव जीती है। इसके साथ ही यह भी जोड़...

बढ़ते स्क्रीन टाइम के खतरे से अनजान बच्चों का बचपन...

– बाल मुकुन्द ओझा भारत में बच्चों को मोबाइल और टीवी देखने की पूरी आज़ादी है। यहाँ उम्र की कोई बाधा नहीं है। सच तो यह है भारत में बच्चों का बचपन आभासी दुनियां में खो गया है। बच्चों में ज्यादा स्क्रीन टाइम को लेकर होने वाले दुष...

भाजपा का बढ़ता जनादेश : विपक्ष के लिए आत्ममंथन का समय...

-अरविंद रावल पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के परिणामों ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि नए युग का भारतीय मतदाता अब जात-पात, नफरत और अहंकार की राजनीति से ऊपर उठ चुका है। आज का मतदाता विकास और सुरक्षा को सर्वोपरि मानता है। व...

करारी हार के बाद अपना वजूद खोता वामपंथी आंदोलन...

– बाल मुकुन्द ओझा बंगाल और त्रिपुरा के बाद केरलम में करारी हार के बाद अब कम्युनिष्टों को देश के लोगों ने पूरी तरह सत्ता से बाहर कर दिया है। कम्युनिष्टों की राजनीति तीन लोक से न्यारी है। भाजपा के विरोध के चलते कम्युनिष्ट इंडि...

होर्डिंग, बैनर आदि लगाने में नियमों की अवहेलना क्यों?...

आजकल किसी भी नगर, शहर या छोटे गांवों तक में चले जाएं पूरा इलाका फ्लेक्स होर्डिंगों, बैनरों, पंपलेटों, पोस्टरों से अटा पड़ा है। आजकल फ्लेक्स होर्डिंग्स बैनर का काफी चलन बढ़ चुका है। चुनाव हो या धार्मिक आयोजन या किसी भी प्रकार का वि...

यूपी में चुनावी नगाड़े बजने शुरू : बुलडोज़र बाबा करेंगे पीडीए से दो...

बाल मुकुंद ओझा बंगाल के चुनावी घमासान के बाद अब यूपी में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों के नगाड़े बजने शुरू हो गए है। यहां भाजपा के बुलडोज़र बाबा का समाजवादी पार्टी के पीडीए से सीधा मुकाबला होगा। यह चुनाव देश के सर्वाधिक चर्चित...

उबलती धरती, डगमगाती थाली, संकट में किसान...

– डॉ. सत्यवान सौरभ जलवायु परिवर्तन के इस निर्णायक दौर में चरम गर्मी अब केवल एक मौसमी विचलन नहीं रह गई है; यह एक गहरे संरचनात्मक संकट के रूप में उभर रही है, जो वैश्विक खाद्य प्रणालियों की बुनियाद को हिला रही है। बढ़ते तापमान ...

सत्य और तथ्य को बेलाग उद्घाटित करना सच्ची पत्रकारिता है...

– बाल मुकुन्द ओझा संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा द्वारा 3 मई को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस घोषित किया गया, जिसे विश्व प्रेस दिवस के रूप में हर साल मनाया जाता है। प्रेस स्वतंत्रता के बुनियादी सिद्धांतों, मूल्यों और प्रेस की स...

अर्बन हीट आइलैंड का असर : क्यों तप रहे हैं भारत के शहर...

-सुनील कुमार महला ग्लोबल वार्मिंग आज पूरी दुनिया के सामने एक गंभीर समस्या के रूप में उभर रही है और इसका प्रभाव भारत में बेहद स्पष्ट और चिंताजनक रूप से दिखाई दे रहा है। हाल ही में जारी रियल-टाइम वैश्विक तापमान रैंकिंग के अनुसार, दु...

एग्जिट पोल का तिलिस्म : बंगाल में हाई वोल्टेज ड्रामा...

बाल मुकुन्द ओझा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया आजकल चुनाव में बड़ी भूमिका निभाने लगे है। चुनावी सर्वे करने वाली विभिन्न संस्थाओं से मिलकर किये जाने वाले सर्वेक्षणों में मतदाताओं का मूड जानने का प्रयास कर सटीक आकलन किया जाता है। कई बार ये सर्व...

गौतम बुद्ध के उपदेश और आज की दुनिया में उनकी प्रासंगिकता...

हर वर्ष वैशाख मास की पूर्णिमा तिथि पर बुद्ध पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु के नौवें अवतार महात्मा बुद्ध का जन्म हुआ था। इस वर्ष बुद्ध पूर्णिमा 1 मई 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी। ज्योतिषाचार्यों क...

दुनिया से सीख कर हम भी बदल सकते हैं देश में किसान और मजदूर के हाल...

राजेश जैन हर वर्ष एक मई आती है, भाषण होते हैं, मंच सजते हैं, श्रमिकों और किसानों के सम्मान में संदेश दिए जाते हैं और अगले ही दिन सब कुछ सामान्य हो जाता है। लेकिन सच्चाई यह है कि भारत में किसान और मजदूर आज भी विकास की मुख्यधारा के ...

दुनिया में सैन्य खर्च बढ़ा, भारत पांचवें स्थान पर...

-सुनील कुमार महला दुनिया के देश अपने रक्षा बजट या यूं कहें कि सैन्य खर्च में अभूतपूर्व बढ़ोत्तरी कर रहे हैं। वास्तव में, आज के समय में दुनिया भर में सैन्य खर्च कई कारणों से तेजी से बढ़ रहा है। प्रमुख कारणों की यदि हम यहां पर बात क...

संविधान और सियासत के जीते-जागते ज्ञानकोश थे संसदविज्ञ मधु लिमये...

बाल मुकुन्द ओझा मधु लिमये का जन्म 1 मई 1922 को महाराष्ट्र के पूना में हुआ था। भारत की राजनीति में मधु लिमये स्वच्छ, सादगी, ईमानदारी और वैचारिक प्रतिबद्धता के प्रबल पक्षधर के रूप में सर्व विख्यात रहे है। उन्होंने दो बार अपने विचारो...

हिल्टन होटल में गोलीबारी-निंदनीय और अफसोसजनक : शांति, सौहार्द और ...

-सुनील कुमार महला निवार 25 अप्रैल 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति की मौजूदगी में हिल्टन होटल में आयोजित रात्रिभोज कार्यक्रम के दौरान एक व्यक्ति द्वारा की गई गोलीबारी वास्तव में बहुत चिंता का विषय है।कितनी बड़ी बात है कि हमलावर की पहचान...

बेमिसाल कारीगरी का बेजोड़ नमूना है लाल किला...

29 अप्रैल का दिन भारत के इतिहास का अहम दिन है। विश्व विख्यात लाल किले की नींव 29 अप्रैल 1639 के दिन रखी गई थी। ऐतिहासिक लाल किले को यूनेस्को द्वारा वर्ष 2007 में विश्व धरोहर स्थल के रूप में चुना गया था। शानदार गुंबदों, बेहतरीन मेह...

आपकी बुरी आदतें आपके चार्जिंग केबल्स को खराब कर रही हैं...

ऋचा लोढ़ा चार्जिंग केबल्स हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का एक बेहद अहम हिस्सा हैं, लेकिन हम अक्सर उनकी अहमियत को तब तक नहीं समझते जब तक वे खराब नहीं हो जाते। फोन, टैबलेट या अन्य गैजेट्स की बैटरी खत्म होने पर सबसे पहले हमें अपने केबल की ...

कार्यस्थल पर सकारात्मक वातावरण का निर्माण जरुरी...

बाल मुकुंद ओझा दुनियाभर में 28 अप्रैल का दिन कार्यस्थल पर सुरक्षा एवं स्वास्थ्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन द्वारा यह दिन व्यावसायिक दुर्घटनाओं और बीमारियों की रोकथाम को बढ़ावा देने और कार्यस्थल पर स्वा...

आचार्य महाश्रमण की निर्गुण-चेतना से विश्व-शांति की नई दिशा...

– ललित गर्ग मानव इतिहास के इस अशांत और संक्रमणकालीन दौर में जब विश्व का परिदृश्य युद्ध, हिंसा, आतंकवाद और वैचारिक टकरावों से आच्छादित है, तब शांति, सह-अस्तित्व और मानवीय मूल्यों की पुकार पहले से कहीं अधिक तीव्र हो उठी है। ऐस...

बौद्धिक संपदा दिवस : खेलों के विकास में नवाचार...

बाल मुकुन्द ओझा विश्व बौद्धिक संपदा दिवस हर साल 26 अप्रैल को मनाया जाता है। बौद्धिक संपदा का अर्थ संपत्ति से है, जो बुद्धिमत्ता से सृजित हुई हो जैसे कि आविष्कार, पुस्‍तकें, चित्रकला, गीत, प्रतीक चिह्न, नाम, चित्र, या व्यापार में इ...

क्यों बीमा से दूर है आम भारतीय?...

— डॉ. सत्यवान सौरभ भारत आज दुनिया की सबसे तेज़ी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शुमार है। ऊंची विकास दर, डिजिटल क्रांति, बढ़ती आय और वैश्विक मंच पर मजबूत होती स्थिति—ये सब संकेत देते हैं कि देश आर्थिक रूप से आगे बढ़ रहा है। लेकिन इस च...

मलेरिया के खिलाफ एकजुट प्रयास जरुरी...

बाल मुकुन्द ओझा विश्व मलेरिया दिवस प्रत्येक वर्ष 25 अप्रैल को मनाया जाता है। दुनियाभर में हर साल मलेरिया के लाखों मामले सामने आते हैं। मलेरिया से मरने वालों की संख्या भी काफी ज्यादा होती है। विश्व मलेरिया दिवस हर साल एक थीम के साथ...

साइबर अपराध का बदलता चेहरा...

– महेन्द्र तिवारी डिजिटल युग ने मानव जीवन को जितना सरल और सुविधाजनक बनाया है, उतना ही जटिल और जोखिमपूर्ण भी बना दिया है। आज बैंकिंग से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य, खरीदारी और संचार तक लगभग हर काम इंटरनेट और मोबाइल के माध्यम से हो...

पृथ्वी पर हरियाली तो जीवन में खुशहाली...

बाल मुकुन्द ओझा पृथ्वी दिवस हर साल 22 अप्रैल को मनाया जाता है। इसकी स्थापना अमेरिकी सीनेटर जेराल्ड नेल्सन द्वारा 1970 में एक पर्यावरण शिक्षा के रूप में की गयी और अब इसे 192 से अधिक देशों में प्रति वर्ष मनाया जाता है। पृथ्वी दिवस 2...

भारतीय जहाजों पर फायरिंग के मायने ?...

– महेन्द्र तिवारी होर्मुज जलडमरूमध्य की भौगोलिक स्थिति इसे वैश्विक राजनीति के केंद्र में खड़ा करती है और 18 अप्रैल 2026 की घटना ने इस तथ्य को एक बार फिर निर्विवाद रूप से प्रमाणित कर दिया है। उस दिन की सुबह जब भारत के ध्वज वाल...

पौष्टिक आहार को लेकर दुनियाभर में व्यापक हलचल...

बाल मुकुन्द ओझा आज दुनियाभर में खानपान को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म हो रहा है। क्या खाये और क्या न खाये इस पर बहस चल रही है। स्वास्थ्य एवं पोषण का होना किसी भी मानव के लिए पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मस्तिष...

परिसीमन के पेंच में फंसा आधी आबादी का हक...

– महेन्द्र तिवारी भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में आधी आबादी की आकांक्षाओं को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला खड़ा किया है। सरकार द्वारा प्रस्तुत संविधान (131वां संशोधन) विधेयक का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2023 में पारित कानून को धर...

सुरक्षित सड़क पर चलना हर नागरिक का अधिकार...

बाल मुकुन्द ओझा देश में लगातार बढ़ते सड़क हादसों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ साफ़ चेताया है कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर लापरवाही किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कोर्ट ने यह भी माना कि ...

बिहार में संभावनाएं विकास की: अब सत्ता सम्राट की...

-ललित गर्ग बिहार की राजनीति लंबे समय से बदलाव, प्रयोग और नेतृत्व के उतार-चढ़ाव का साक्षी रही है। ऐसे परिदृश्य में जब लंबे इंतजार और जटिल कूटनीतिक समीकरणों के बाद पहली बार भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में शासन स्थापित होने की स्थित...

अक्षय तृतीया दान परम्परा के सूत्रपात का दिन...

हर देश की संस्कृति में कुछ पर्व त्यौंहार और विशिष्ट उत्सवों का समायोजन किया जाता है ताकि जीव जगत को नई दिशा, प्रकाश का नया मार्ग मिल सके। चारों और उल्लास, उमंग का वातावरण बन सके और वह जीवन में खुशियों के गुलाल बीखेर सके। भारत देश ...

विश्व धरोहर दिवस : सभ्यता की अमूल्य धरोहरों को बचाने का संकल्प...

-सुनील कुमार महला प्रत्येक वर्ष 18 अप्रैल को विश्व धरोहर दिवस मनाया जाता है। इसे विश्व विरासत दिवस, वर्ल्ड हेरिटेज डे तथा आधिकारिक रूप से अंतर्राष्ट्रीय स्मारक एवं स्थल दिवस (इंटरनेशनल डे फोर मोन्यूमेंट्स एंड साइट्स) कहा जाता है। ...

अनंत समृद्धि का दिन है अक्षय तृतीया...

रमेश सर्राफ धमोरा हमारे देश में समय-समय पर बहुत से त्यौहार मनाये जाते हैं। इसलिए हमारे देश को त्योहारों का देश भी कहते है। हिन्दू धर्मावलम्बियों के प्रमुख त्योहारों में से एक अक्षय तृतीया है जिसे हम आखा तीज भी कहते हैं। अक्षय तृती...

भारत में हीमोफीलिया का बढ़ता खतरा...

विश्व फेडरेशन ऑफ हीमोफीलिया द्वारा हर साल 17 अप्रैल को हीमोफिलिया दिवस मनाया जाता है। विश्व हीमोफिलिया दिवस 2026 का विषय निदान : देखभाल का पहला कदम रखा गया है। विश्व फेडरेशन ऑफ हीमोफिलिया के मुताबिक हीमोफिलिया एक रक्त विकार है जिस...

अंकों की दौड़ नहीं, समझ और संतुलन की ज़रूरत : सीबीएसई बोर्ड परीक्...

-सुनील कुमार महला हाल ही में, बुधवार को 15 अप्रैल 2026 को सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) ने कक्षा 10वीं का परीक्षा परिणाम घोषित किया, जिसमें इस वर्ष कुल 93.70% छात्र सफल हुए हैं। यह आंकड़ा पिछले वर्ष के 93.66% की तुलन...

पश्चिम एशिया के पास है, मीठे जल के श्रोतो की भारी कमीं...

एशिया महाद्वीप को अगर देखा जाए तो पश्चिमी एशिया और मध्य एशियाई प्रदेशों में मीठे जल के श्रोतों की काफ़ी कमी है। क्योंकि, इन क्षेत्रों में अधिकांश रेगिस्तान है और यहां की जलवायु भी शुष्क है। बरसात न के बराबर होती है, और गर्मी चरम प...

सजने लगा है बुढ़ापे का बाजार...

हमारे देश में बुजुर्गों की देखभाल का स्वरुप अब बदलने लगा है, हालाँकि यह कहानी अभी अमीर बुजुर्गों तक पहुंची है मगर इसके विस्तार की चर्चाएं सुनाई देने लगी है। बुजुर्गों को कल तक परिवार का वट वृक्ष मानकर देखभाल की जाती थी अब यह परिवा...

युवाओं के दो दुश्मन : चिंता और तनाव...

ऑफ़िस ऑफ़ नेशनल स्टैटिस्टिक्स [ओएनएस] के ताजा सर्वे में देशवासियों को युवाओं में थकान और तनाव को नजरअंदाज करने पर सचेत किया है। सर्वे में यह बात सामने आई है कि आज का युवा वर्ग ‘एंग्जायटी’ यानी चिंता का सबसे ज्यादा शिका...

होर्मुज की नाकेबंदी से टूटती अनगिनत उम्मीदें...

– महेन्द्र तिवारी होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के नक्शे पर महज एक संकरी रेखा है, लेकिन इस रेखा के दोनों किनारों पर आज जो ताकतें आमने-सामने खड़ी हैं, उनकी टकराहट की गूँज पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था की नींव तक पहुँच रही है। होर्मुज...

बुज़ुर्गों की आँखों में झलकती बेबसी हमारे समाज का आईना...

-नफीस आफरीदी भारतीय संस्कृति में वृद्धों के लिए सदैव आदर का स्थान रहा है। परिवार में वे मार्गदर्शक, अनुभव के स्रोत और नैतिक मूल्यों के संवाहक रहे। समाज में यदि बुज़ुर्गों को सम्मान, सुरक्षा और स्नेह मिलता है तो वह समाज न केवल सभ्य...

डॉ. आंबेडकर जयंती : लोग मुझे याद करेंगे, मेरे मरने के बाद...

बाल मुकुन्द ओझा आज 14 अप्रैल को पूरा देश डॉ भीम राव आंबेडकर की 135 वीं जयंती मना रहा है। देश में आज सर्वाधिक चर्चा बाबा साहेब आम्बेडकर की हो रही है। जब भी डॉ. आंबेडकर की जयंती आती है, समाजवादी चिंतक डॉ राम मनोहर लोहिया का यह कथन म...

अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के बीच इजऱायल का हिज़्बुल्लाह पर आक्राम...

सौरभ वार्ष्णेय पश्चिम एशिया एक बार फिर विरोधाभासों के दौर से गुजर रहा है। एक ओर अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता की संभावनाएं बन रही हैं, वहीं दूसरी ओर इजऱायल ने लेबनान में हिज़्बुल्लाह के ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं। यह स्थ...

जलियांवाला बाग नरसंहार : खून से लिखी आजादी की दास्तां...

बाल मुकुन्द ओझा जलियांवाला हत्याकांड को आज 107 साल पूरे हो चुके है लेकिन इसकी याद आज भी हमारी आंखों को नम कर जाती है। भारतीय इतिहास में 13 अप्रैल 1919 उन तारीखों में से एक है जो अंग्रेजों के अमानवीय चेहरे को सामने ला देता है। उस द...

सामाजिक न्याय के योद्धा महात्मा ज्योतिबा फुले...

बाल मुकुन्द ओझा आज महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती है। महात्मा फुले 19वीं सदी के एक महान समाज सुधारक, विचारक, समाजसेवी, लेखक, दार्शनिक तथा क्रान्तिकारी कार्यकर्ता थे। देश से छुआछूत को खत्म करने और समाज के वंचित तबके को सशक्त बनाने ...

किशोर आक्रामकता एवं हिंसा पर अंकुश लगाने की पहल हो...

-ललित गर्ग- भारतीय किशोरों में बढ़ रही हिंसक प्रवृत्ति एवं क्रूर मानसिकता चिन्ताजनक है, नये भारत एवं विकसित भारत के भाल पर यह बदनुमा दाग है। पिछले कुछ समय से किशोरों में बढ़ती हिंसा की प्रवृत्ति निश्चित रूप से डरावनी, मर्मांतक एवं ख...

क्रांतिसूर्य ज्योतिबा फुले...

-डॉ. निर्मल सुवासिया महात्मा ज्योतिबा फुले महाराष्ट्र के एक क्रांतिकारी विचारक, शिक्षक और समाज सुधारक थे जिन्होंने 19वीं सदी में शिक्षा में असमानता, जाति-व्यवस्था, स्त्री-अधिकार और किसान-समस्या के खिलाफ सबसे बड़ी लड़ाई लड़ी। 11 अप्...

घर में नहीं दाने अम्मा चली भुनाने...

बाल मुकुन्द ओझा यह कहावत पाकिस्तान पर सटीक बैठती है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 8 अप्रैल 2026 को अमेरिका और ईरान ने पाकिस्तान की मध्यस्थता में दो हफ्ते का अस्थायी सीजफायर कर लिया। मिडिल ईस्ट में युद्ध रोकने के प्रस्ताव को अमेरिका और...

बेमौसम बारिश ने बिगाड़ा जलवायु का संतुलन...

बाल मुकुन्द ओझा अप्रैल माह से गर्मी और तेज धूप की शुरुआत हो जाती है, लेकिन बेमौसम बारिश ने देशवासियों को चिंन्तित कर चौंका दिया है। आम आदमी के साथ खेत और खलिहानों लिए मुश्किलें खड़ी हो रही है।मौसम विभाग ने देश के कई हिस्सों में भा...

महिला सशक्तिकरण से बदलती भारत की विकास गाथा...

-विजया रहाटकर भारत की विकास गाथा को अक्सर संख्याओं, विकास दरों, अवसंरचना विस्तार और आर्थिक उपलब्धियों के रूप में व्यक्त किया जाता है। लेकिन, पिछले दशक का सबसे बड़ा बदलाव आँकड़ों से परे है। यह एक गहरे सामाजिक बदलाव में परिलक्षित होत...