बाल मुकुन्द ओझा
विश्व मलेरिया दिवस प्रत्येक वर्ष 25 अप्रैल को मनाया जाता है। दुनियाभर में हर साल मलेरिया के लाखों मामले सामने आते हैं। मलेरिया से मरने वालों की संख्या भी काफी ज्यादा होती है। विश्व मलेरिया दिवस हर साल एक थीम के साथ मनाया जाता है। इस साल 2026 की थीम मलेरिया के खिलाफ एकजुट रखी गई है। यह थीम कार्रवाई करने और जरूरतमंद लोगों तक पहुंचने के लिए उपलब्ध साधनों और रणनीतियों का उपयोग करने की महत्वपूर्ण आवश्यकता को रेखांकित करती है। इस थीम के पीछे का मकसद लोगों को मलेरिया से निपटने के लिए तैयार रहने के लिए जागरूक करना है। भारत इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए पुरजोर प्रयासशील है। भारत ने हाल के वर्षों में मलेरिया उन्मूलन की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है और इसके लिए वैश्विक स्तर पर भारत की प्रशंसा की गई है। वैश्विक स्तर पर 2024 में अनुमानित 28.2 करोड़ (282 मिलियन) मलेरिया के मामले और 6,10,000 मौतें दर्ज की गईं, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 90 लाख अधिक मामले हैं। वर्ष 2000 से अब तक, वैश्विक स्तर पर 2.3 अरब मलेरिया के मामलों और 1.4 करोड़ मौतों को रोका गया है, जिसमें अकेले 2024 में 10 लाख जीवन बचाए गए। अब तक 47 देशों और एक क्षेत्र को मलेरिया मुक्त दर्जा मिल चुका है, जिसमें 2025 में मिस्र और तिमोर-लेस्ते शामिल हैं। हालांकि अक्टूबर 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में मलेरिया के सकारात्मक मामलों में तीन साल के औसत की तुलना में 11.91 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, जबकि 2024 की इसी अवधि की तुलना में 4.2 प्रतिशत की कमी आई थी। भारत सरकार 2030 तक मलेरिया उन्मूलन के लक्ष्य पर अडिग है और 2027 तक शून्य स्वदेशी मामलों तक पहुंचने के लिए प्रतिबद्ध है।
मलेरिया तेज बुखार वाली बीमारी है। यह संक्रमित मादा एनोफेलीज मच्छर के काटने से फैलती है। यह मच्छर साफ पानी में अंडे देती है। इस रोग को फैलाने वाले परजीवी को प्लाज्मोडियम कहते है। वहीं गर्मी में मौसमी बीमारियों के बढने का भी खतरा होने लगता है। ऐसे में हम सभी को मलेरिया और अन्य मौसमी बीमारियों से सतर्कता और जागरूकता रखनी चाहिए। मलेरिया बीमारी मच्छर के काटने से होती है इसलिए बच्चों से बुजुर्गों तक को मच्छरों से बचाव रखना चाहिए। इसके लिए आप अपने घर के आसपास पानी न भरने दें। बारिश के मौसम में किसी भी कंटेनर आदि में पानी जमा न होने दें और समय-समय पर कूलर को साफ करें।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार हमारे देश में मुख्यतः दो प्रकार का मलेरिया पाया जाता है। प्लाजमोडियम फैल्सीफेरम एवं प्लाज्मोडियम वाईवेक्स। ये मच्छर जब मलेरिया से ग्रसित व्यक्ति को काटता है तब उसके खून में मौजूद प्लाज्मोडियम को अपने शरीर में खींच लेता है। लगभग आठ से दस दिन तक ये मच्छर मलेरिया फैलाने में सक्षम हो जाता है। यह परजीवी लार के साथ उसके शरीर में प्रवेश कर जाता है। जिससे स्वास्थ्य व्यक्ति भी मलेरिया से ग्रसित हो जाता है। मच्छर प्रजनन के कारण बारिश के दौरान और बारिश के बाद यह रोग अधिक लोगों को होता है। रोगी को समय पर उपचार मिलना आवश्यक है। इलाज मिले तो मलेरिया के लक्षण जल्द ही ठीक होने लगते हैं। पूरी तरह ठीक होने में मरीजों को कम से कम दो हफ्ते का समय लगता है। समय पर इलाज ना मिले तो कई बार ये बीमारी बार-बार होने की आशंका भी बनी रहती है। सही इलाज नहीं होने से प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होने लगती है और कई अन्य तरह की बीमारियां भी घेर लेती हैं। इसलिए हमें पूरी सावधानी रखनी होगी।

मलेरिया के खिलाफ एकजुट प्रयास जरुरी
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