बाल मुकुन्द ओझा
देश में लगातार बढ़ते सड़क हादसों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ साफ़ चेताया है कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर लापरवाही किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कोर्ट ने यह भी माना कि सुरक्षित सड़क पर चलना हर नागरिक का अधिकार है और इसे सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। यह मामला नवंबर 2025 में राजस्थान और तेलंगाना में हुए 2 भीषण सड़क हादसों के बाद सामने आया, जिनमें 34 लोगों की मौत हो गई थी। इन घटनाओं के बाद सुप्रीम कोर्ट ने खुद संज्ञान लेकर पूरे देश के लिए अहम निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट के आदेश के अनुसार, अब नेशनल हाईवे पर कहीं भी गाड़ी खड़ी करना पूरी तरह प्रतिबंधित होगा। वाहन केवल तय पार्किंग स्थानों पर ही रोके जा सकेंगे। इसके साथ ही हाईवे किनारे बने अवैध ढाबों, दुकानों और अन्य अतिक्रमण को हटाने के निर्देश दिए गए हैं। सड़क हादसों के बाद तुरंत मदद पहुंचाने के लिए कोर्ट ने हर 75 किलोमीटर पर एंबुलेंस और क्रेन तैनात करने का भी निर्देश दिया है। इसके अलावा, जिन जगहों पर बार-बार हादसे होते हैं, यानी ब्लैकस्पॉट्स, उनकी पहचान कर वहां बेहतर लाइटिंग, कैमरे और चेतावनी बोर्ड लगाने के आदेश दिए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी चिंता जताई कि देश के कुल सड़क नेटवर्क में नेशनल हाईवे सिर्फ 2 प्रतिशत हैं, लेकिन यहां करीब 30 प्रतिशत सड़क हादसे होते हैं, जो बेहद गंभीर स्थिति है।
भारत में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में हर साल लाखों की संख्या में लोग अपनी जान गवां देते हैं। सड़क दुर्घटनाओं के ग्राफ में तेजी से वृद्धि हो रही है। दुर्घटनाओं में मौतें और घायल होने के समाचार प्रतिदिन पढ़ने और देखने को मिल रहे हैं। सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद देश में सड़क हादसों में कमी नहीं आई है, बल्कि साल दर साल इसमें इजाफा हो रहा है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का कहना है जब तक समाज का सहयोग नहीं मिलेगा, मानवीय व्यवहार नहीं बदलेगा और कानून का डर नहीं होगा, तब तक सड़क हादसों पर अंकुश नहीं लगेगा। गडकरी के अनुसार देश में हर साल औसतन 4.80 से 5 लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जिसमें लगभग 1.80 लाख लोगों की मौत हो जाती है। इन दुर्घटनाओं से जीडीपी को 3 फीसदी का नुकसान होता है, जो किसी बीमारी या युद्ध से भी अधिक है। सभी दुर्घटनाओं में 66.4 फीसदी मौतें 18 से 45 साल के युवाओं की होती हैं, जो देश के भविष्य के लिए गंभीर चिंता है।
वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों के अनुसार भारत में दुनिया के केवल एक फीसदी वाहन हैं इसके बावजूद पूरे विश्व में होने वाले हादसों का 11 फीसदी देश में ही घटित होते हैं। भारत ही नहीं विश्व भर में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों की संख्या बहुत ज्यादा है। भारत में सड़कों और हाईवे की संख्या बहुत तेजी से बढ़ी है। इसी के साथ हादसों की रफ्तार भी थमने का नाम नहीं ले रही। देश में सड़क दुर्घटनाओं के ग्राफ में तेजी से वृद्धि हो रही है। भारत में कोई दिन नहीं ऐसा नहीं जाता जब देश के किसी भाग में सड़क हादसा न होता हो। सड़क पर ट्रक पार्क करना दुर्घटनाओं का एक बड़ा कारण हैं और कई ट्रक लेन अनुशासन का पालन नहीं करते हैं। ऐसा लगता है जैसे सड़के आतंकी हो गयी है और हादसे थमने के नाम नहीं ले रहे है।
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के सड़क हादसों के आंकड़ों पर गौर करें तो पाएंगे देश में लोग जान हथेली पर लेकर चलते है। देश में सड़कों और हाईवे की संख्या बहुत तेजी से बढ़ी है। इसी के साथ हादसों की रफ्तार भी थमने का नाम नहीं ले रही। सड़क दुर्घटनाओं में पैदल चलने वाले लोग भी सुरक्षित नहीं है। इन सभी दुर्घटनाओं के पीछे शराब मादक पदार्थों का इस्तेमाल, वाहन चलाते समय मोबाइल पर बात करना, वाहनों में जरुरत से अधिक भीड़ होना, वैध गति से अधिक तेज गाड़ी चलाना और थकान आदि होना है। महानगरों और नगरों में किसी चौराहे पर लाल बत्ती को धता बताकर रोड पार कर जाना, गलत तरीके से ओवरटेकिंग, बेवजह हार्न बजाना, निर्धारित लेन में न चलना और तेज गति से गाड़ी चलाकर ट्रैफिक कानूनों की अवहेलना आज के युवकों का प्रमुख शगल बन गया है।
बाल मुकुन्द ओझा



