खानपान में जैविक प्रदूषण : हर दिन हजारों मौतें और लाखों बीमार

ram

बाल मुकुन्द ओझा
विश्व स्वास्थ्य संगठन की ग्लोबल बर्डन ऑफ़ फूड़बॉर्न डिजीजेज 20 – 21 शीर्षक से जारी एक ताज़ा रिपोर्ट में दूषित भोजन के सेवन से होने वाले खतरनाक स्वास्थ्य संकट से चेताया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि खेत से घर की रसोई तक जैविक प्रदूषण ने अपने पैर जमा लिए है जिसके फलस्वरूप हमारे सेहत को गंभीर स्वास्थ्य संकट का सामना करना पड़ रहा है। दूषित भोजन से हर दिन 4100 लोग जहाँ अकाल मौत के शिकार हो रहे है वहीं 42 लाख से ज्यादा लोग बीमार हो रहे है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि छोटे बच्चों पर इसका खतरा सबसे ज्यादा है। पांच साल से कम उम्र के बच्चे असुरक्षित भोजन से होने वाली बीमारियों का लगभग तीन गुना अधिक शिकार होते हैं। दूषित खानपान से हर साल 88 करोड़ से अधिक लोग बीमार पड़ रहे है, 15 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो रही है। असुरक्षित भोजन सिर्फ स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था पर भी भारी असर डालता है। इससे 54 लाख करोड़ रूपये की धनराशि का आर्थिक नुक्सान झेलना पड़ रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है, फ़ूड पोइजनिक के पीछे केवल बैक्टीरिया और वायरस नहीं है, दूषित भोजन से अधिकांश मौतें रासायनिक प्रदूषण से हो रही है। प्रदूषित भोजन में आर्सेनिक, सीसा और कीटनाशक के अवशेष भी प्रमुख कारण है। सबसे अधिक मौतें भारत और चीन में हो रही है।
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक हानिकारक बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी या रासायनिक पदार्थों से युक्त असुरक्षित भोजन 200 से अधिक बीमारियों का कारण बनता है। दूषित भोजन से बच्चों में डायरिया जैसी बीमारियां तेजी से फैलती हैं, जो कई मामलों में जानलेवा साबित हो सकती हैं। इसके अलावा, भोजन में मौजूद जहरीले तत्व जैसे सीसा और मिथाइलमरकरी बच्चों के मस्तिष्क के विकास को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इससे उनके मानसिक विकास, सीखने की क्षमता और भविष्य के स्वास्थ्य पर लंबे समय तक असर पड़ सकता है। खाद्य जनित बीमारियां आमतौर पर संक्रामक या विषाक्त प्रकृति की होती हैं जो साधारण आंखों से दिखाई नहीं देती हैं। ये दूषित भोजन या पानी के माध्यम से शरीर में प्रवेश करने वाले बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी या रासायनिक पदार्थों के कारण होती हैं। खाद्य सुरक्षा यह सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है कि खाद्य श्रृंखला के हर चरण में भोजन सुरक्षित रहे – उत्पादन से लेकर कटाई, प्रसंस्करण, भंडारण, वितरण, तैयारी और उपभोग तक है। खाद्य सुरक्षा सरकारों, उत्पादकों और उपभोक्ताओं के बीच एक साझा जिम्मेदारी है। खेत से लेकर खाने की मेज तक हर किसी की भूमिका होती है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि हम जो खाना खाते हैं वह सुरक्षित है और हमारे स्वास्थ्य को नुकसान नहीं पहुंचाएगा।
खाद्यजनित रोग सामान्यत: अनुचित साज-संभाल, पकाने और खाद्य भंडारण से उत्पन्न होता है। भोजन पकाने से पहले, के दौरान और बाद में स्वच्छता की अच्छी आदतें रोग ग्रहण करने के अवसरों को कम कर सकती हैं। सार्वजनिक स्वास्थ्य समुदाय में सर्वसम्मति है की नियमित हाथ धोना खाद्य जनित रोगों के प्रसार के विरुद्ध अत्यन्त प्रभावकारी सुरक्षाओं में से एक है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि यह भोजन खाद्यजनित रोगों का कारण नहीं बनेगा, निरीक्षण करने के कार्य को खाद्य सुरक्षा के रूप में जाना जाता है। खाद्यजनित रोग पर्यावरण को प्रभावित करनेवाले, विशाल विविधताओं वाले विषों के कारण भी हो सकते हैं। मानव जीवन के लिए खाद्य पदार्थों की सुरक्षा अति महत्वपूर्ण है। लोगों को सुरक्षित और पौष्टिक भोजन का प्रकृति प्रदत अधिकार है। राज्य का दायित्व है कि प्रकृति की ओर से प्रदान किए गए अधिकारों का संरक्षण और संवर्धन करे। खाद्य सुरक्षा का अधिकार भी इसमें शामिल है। असुरक्षित भोजन न केवल स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि आर्थिक उत्पादकता और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी गंभीर दबाव डालता है। भारत में लोगों के खाने-पीने का तरीका बदल रहा है और यह बदलाव सेहत के लिए चिंता की बात बनता जा रहा है। हेल्थ एक्सपर्ट इन दिनों बदलती खाने की आदतों को सेहत के लिए खतरनाक बता रहे हैं। देश और दुनिया में जंक या फास्ट फूड का इस्तेमाल दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है, जो भविष्य के लिए अच्छा नहीं है। हर उम्र के लोगों को जंक फ़ूड खाना पसंद होता है और आमतौर पर, वे इसे तब चुनते हैं जब वे अपने परिवार के साथ कुछ खास पल बिता रहे होते हैं, जैसे जन्मदिन, शादी की सालगिरह वगैरह। वे बाज़ार में मिलने वाले अलग-अलग तरह के जंक फ़ूड खाते हैं जैसे कोल्ड ड्रिंक, वेफ़र्स, चिप्स, नूडल्स, बर्गर, पिज़्ज़ा, फ्रेंच फ्राइज़, चाइनीज़ फ़ूड वगैरह। इन दिनों, कम उम्र के लोग उन बीमारियों का शिकार हो रहे हैं जो आमतौर पर बड़ी उम्र के लोगों को होती हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *