देवेंद्र सिंह
पति-पत्नी का रिश्ता रक्त संबंधों पर नहीं, बल्कि विश्वास, सम्मान, संवाद और पारस्परिक सहयोग पर आधारित होता है। यही कारण है कि इसे समाज का सबसे मजबूत और संवेदनशील संबंध माना जाता है। विवाह केवल दो व्यक्तियों का साथ नहीं, बल्कि दो परिवारों, दो संस्कृतियों और दो जीवनों का आजीवन संकल्प है। सदियों से भारतीय समाज में इस रिश्ते को परिवार और सामाजिक व्यवस्था की आधारशिला माना जाता रहा है। मतभेद, तकरार और मनमुटाव हर रिश्ते का स्वाभाविक हिस्सा रहे हैं, लेकिन हाल के वर्षों में वैवाहिक संबंधों से जुड़े कुछ जघन्य हत्याकांडों ने यह संकेत दिया है कि जब रिश्तों से विश्वास और संवाद समाप्त होने लगते हैं, तब परिस्थितियां अपराध का रूप भी ले सकती हैं। बीते कुछ वर्षों में देश के विभिन्न हिस्सों से सामने आए चर्चित मामलों ने इस विषय पर गंभीर सामाजिक बहस छेड़ दी है। इन घटनाओं में एक समानता यह देखने को मिली कि कई मामलों में विवाहेतर संबंध, संवादहीनता और रिश्तों में बढ़ती दूरी ने अपराध की पृष्ठभूमि तैयार की। यह चिंताजनक स्थिति केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि बदलते सामाजिक मूल्यों, पारिवारिक संरचना और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा प्रश्न भी है। वर्ष 2026 में सामने आए कुछ मामलों ने पूरे देश को झकझोर दिया। नीले ड्रम प्रकरण की मुस्कान और हनीमून के दौरान पति की हत्या के आरोपों में चर्चित सोनम रघुवंशी के बाद पुणे की सिया गोयल अपने मंगेतर की हत्या की कथित साजिश को लेकर चर्चा में रही। इन घटनाओं ने यह सवाल खड़ा किया कि आखिर ऐसे कौन-से कारण हैं, जो पति या मंगेतर की हत्या जैसी भयावह स्थिति तक पहुंचा देते हैं। पहले भी वैवाहिक हत्याएं होती थीं, लेकिन उनके पीछे घरेलू हिंसा, शराब की लत, आर्थिक विवाद या अन्य पारिवारिक कारण अधिक दिखाई देते थे। हाल के कई चर्चित मामलों में प्रेम प्रसंग और विवाहेतर संबंध प्रमुख कारण के रूप में सामने आए हैं। मेरठ का एक मामला विशेष रूप से चर्चा में रहा। पुलिस के अनुसार, दामिनी नामक महिला पर आरोप है कि उसने अपने स्कूल संचालक पति अतुल की हत्या की साजिश अपने कथित प्रेमी, जो उसी स्कूल में ड्राइवर था, के साथ मिलकर रची। आरोप है कि बीमा राशि और प्रेम संबंध इस साजिश की प्रमुख वजह बने। पुलिस के अनुसार, सोते समय बिस्तर में सांप छोड़कर हत्या को दुर्घटना का रूप देने का प्रयास किया गया। इस मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया जारी है, लेकिन इसने समाज को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि रिश्तों में छल और विश्वासघात किस हद तक पहुंच सकते हैं।
झारखंड के गिरिडीह में भी शादी से तीन दिन पहले होने वाले दूल्हे नीरज हाजरा की हत्या का मामला सामने आया। पुलिस जांच के अनुसार, मंगेतर उर्मिला कुमारी का अपने जीजा से प्रेम संबंध था और प्रस्तावित विवाह उनके संबंधों में बाधा बन रहा था। आरोप है कि दोनों ने मिलकर नीरज की हत्या कर शव को बिहार के जंगल में फेंक दिया, ताकि पहचान और साक्ष्य मिटाए जा सकें। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इसी तरह हरियाणा के रेवाड़ी की ढाणी जड़थल गांव में 21 वर्षीय मोनू की हत्या के आरोप उसकी पत्नी तन्नू, उसके कथित प्रेमी और अन्य सहयोगियों पर लगे। पुलिस के अनुसार, पत्नी तनू ने मोनू को अपने पीहर में मिलने के बहाने से बुलाया और नाक और मुहं बंद कर उसकी हत्या कर दी और शव को नहर में फेंक दिया ताकि मामला दुर्घटना या आत्महत्या का लगे। हालांकि, परिजनों के संदेह और पुलिस जांच से मामला खुल गया। इसी प्रकार मध्य प्रदेश के सतना में विपिन कुमार यादव की हत्या के मामले में पुलिस ने उसकी पत्नी और उसके पूर्व प्रेमी को आरोपी बनाया। घटना का खुलासा लगभग तीन महीने बाद तब हुआ, जब नदी किनारे से कंकाल बरामद हुआ और जांच आगे बढ़ी। इन घटनाओं ने वैवाहिक संबंधों में बढ़ते तनाव, अविश्वास और विवाहेतर संबंधों की भूमिका पर नई बहस छेड़ दी है। इन घटनाओं के बीच कई रिपोर्टों और राज्य स्तरीय पुलिस रिकॉर्ड के आधार पर यह दावा किया गया कि कुछ राज्यों में पतियों की हत्या के मामलों में वृद्धि दर्ज हुई है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के आधार पर देश में टॉप 5 राज्यों में उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश शुमार है। इन राज्यों में पिछले 5 सालों में 785 पतियों की हत्या उनकी पत्नियों द्वारा की गई। कुछ मामलों में शादी से पूर्व प्रेमी के साथ मिल कर होने वाले पति की हत्या कर दी गई। हर साल देशभर में पत्नियों द्वारा पतियों की हत्या के लगभग 275 मामले दर्ज किए जाते हैं। 274 हत्याओें के आंकड़ों के साथ उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर आता है। वही बिहार का 186 मामलों के साथ दूसरा और 138 मामलों के साथ राजस्थान तीसरे नंबर पर आता है। महाराष्ट्र में हर साल 100 मामले और मध्य प्रदेश में 87 मामले सामने आते हैं। इन मामलों में अधिकतर हत्याएं अवैध संबंधों, प्रेम प्रसंग और पारिवारिक विवादों के चलते पत्नियों द्वारा अपने प्रेमियों या अन्य लोगों की मदद से की गईं। हालांकि, कुछ विश्लेषकों के अनुसार एनसीआरबी की सार्वजनिक वार्षिक रिपोर्टों में पत्नी द्वारा पति की हत्या को लेकर कोई अलग से विशिष्ट राष्ट्रीय श्रेणी नहीं है, यह डेटा राज्य-स्तरीय पुलिस रिकॉर्ड और व्यापक मीडिया विश्लेषण से संकलित किया जाता है। फिर भी यह तथ्य चिंता का विषय है कि वैवाहिक संबंधों से जुड़े अपराधों में विवाहेतर संबंध, पारिवारिक विवाद, आर्थिक स्वार्थ और आपसी अविश्वास बार-बार प्रमुख कारण के रूप में सामने आते हैं। यह केवल कानून का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक और मनोवैज्ञानिक चुनौती भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी रिश्ते की सबसे बड़ी ताकत संवाद होती है। जब पति-पत्नी एक-दूसरे से खुलकर बात करना बंद कर देते हैं, तब छोटी-छोटी समस्याएं भी धीरे-धीरे गंभीर विवाद का रूप लेने लगती हैं। सम्मान की कमी, मानसिक तनाव, असुरक्षा, संदेह और संवादहीनता रिश्तों को भीतर से कमजोर कर देती है। यदि समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं निकाला जाए, तो कई बार परिणाम अत्यंत दुखद हो सकते हैं। संयुक्त परिवारों के विघटन ने भी इस स्थिति को प्रभावित किया है। पहले परिवार के बड़े सदस्य कई बार पति-पत्नी के बीच उत्पन्न विवादों को समय रहते सुलझा देते थे। आज एकल परिवारों में ऐसा सहयोग कम होता जा रहा है। व्यस्त जीवनशैली, सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव और भावनात्मक दूरी भी रिश्तों पर असर डाल रही है। ऐसे में कई लोग अपनी समस्याओं का समाधान बातचीत के बजाय गलत रास्तों में खोजने लगते हैं। हालांकि, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि कुछ चर्चित घटनाओं के आधार पर पूरे समाज या किसी एक वर्ग के बारे में कोई व्यापक निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए। देश में करोड़ों पति-पत्नी आज भी विश्वास, प्रेम, त्याग और सम्मान के साथ सुखद वैवाहिक जीवन जी रहे हैं। कुछ आपराधिक घटनाएं समाज का प्रतिनिधित्व नहीं करतीं, बल्कि अपवाद हैं। इसलिए इन मामलों को सनसनी के बजाय सामाजिक चेतावनी के रूप में समझने की आवश्यकता है। रिश्तों में असंतोष या मतभेद होना असामान्य नहीं है। लेकिन यदि संबंध निभाना संभव नहीं रह जाए, तो उसके लिए कानूनी और सामाजिक विकल्प उपलब्ध हैं। पारिवारिक परामर्श, मनोवैज्ञानिक सहायता, मध्यस्थता और न्यायिक प्रक्रिया ऐसे रास्ते हैं, जो किसी भी प्रकार की हिंसा से कहीं अधिक उचित और सभ्य समाधान प्रदान करते हैं। किसी भी परिस्थिति में हत्या या हिंसा समस्या का समाधान नहीं हो सकती। आज आवश्यकता इस बात की है कि परिवारों में संवाद की संस्कृति को पुनः मजबूत किया जाए। विवाह पूर्व और विवाहोपरांत काउंसिलिंग को प्रोत्साहन मिले, मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़े और रिश्तों में मतभेद होने पर लोग विशेषज्ञों तथा कानूनी संस्थाओं की सहायता लेने में संकोच न करें। परिवारों में विश्वास, पारदर्शिता और सम्मान का वातावरण विकसित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। विवाह का संबंध अधिकार से अधिक उत्तरदायित्व का संबंध है। जब तक पति-पत्नी एक-दूसरे की भावनाओं को समझने, सम्मान देने और संवाद बनाए रखने का प्रयास करते रहेंगे, तब तक संबंध मजबूत बने रहेंगे। लेकिन जहां संवाद समाप्त हो जाता है, वहां संदेह जन्म लेता है और संदेह कई बार ऐसे फैसलों तक पहुंचा देता है, जिनका परिणाम पूरे परिवार को जीवनभर भुगतना पड़ता है। समाज के लिए सबसे बड़ा संदेश यही है कि रिश्तों को बचाने का सबसे प्रभावी माध्यम संवाद है, जबकि उन्हें नष्ट करने का सबसे तेज रास्ता अविश्वास और हिंसा। यदि किसी रिश्ते में दरार आ भी जाए, तो उसका समाधान बातचीत, परामर्श और कानून के दायरे में ही तलाशा जाना चाहिए। यही स्वस्थ समाज, सुरक्षित परिवार और मजबूत वैवाहिक जीवन की वास्तविक आधारशिला है।

विश्वास और संवाद टूटे तो बिखरते रिश्ते, जन्म लेते खतरनाक अपराध
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