पश्चिम एशिया के पास है, मीठे जल के श्रोतो की भारी कमीं

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एशिया महाद्वीप को अगर देखा जाए तो पश्चिमी एशिया और मध्य एशियाई प्रदेशों में मीठे जल के श्रोतों की काफ़ी कमी है। क्योंकि, इन क्षेत्रों में अधिकांश रेगिस्तान है और यहां की जलवायु भी शुष्क है। बरसात न के बराबर होती है, और गर्मी चरम पर रहती हैं। और जो थोड़ी बहुत मीठे पानी की नदियां है उनका जल भी तेज धूप के कारण वाष्पीकृत होकर उड़ जाता है। इसलिए पश्चिमी एशिया के अधिकांश देश जो समुद के किनारे है समुद्र के खारे पानी को मीठा बनाकर पीने के लिए आप मजबूर हैं।इन्हीं प्लांट को डिसेनिलेशन प्लांट कहते हैं। सऊदी अरब में इन प्लांटों की संख्या सर्वाधिक है।

पश्चिम एशियाका तापमान
पश्चिम एशियाका तापमान मुख्य रूप से गर्म और शुष्क रहता है, जहाँ गर्मियाँ बहुत गर्म (40°C से अधिक) और सर्दियाँ हल्की से ठंडी होती हैं। यहाँ अरब प्रायद्वीप जैसे क्षेत्रों में भीषण गर्मी और रेगिस्तानी जलवायु है, जबकि भूमध्यसागरीय तटों पर मौसम अधिक मध्यम और नम रहता है। वर्षा बहुत कम होती है, जो मुख्य रूप से सर्दियों में होती है। जिनमें,लेबनान, इज़राइल गर्मियों में गर्म और सर्दियों में नरम/बारिश रहते हैं। ईरान, तुर्की में सर्दियाँ लंबी और बर्फीली होती है। जबकि अधिकांश क्षेत्रों में दिन गर्म और रातें ठंडी होती है। यहां अधिकांश इलाकों में सर्दियां केवल दिसम्बर से फरवरी तक ही रहती है।

डीसैलीनेशन संयंत्र के पास हमला घिनौना कृत्य
वर्तमान समय में खाड़ी के डीसैलीनेशन संयंत्र के पास हमला किया गया था जो ईरान पर अमेरिका और इजरायल के 28 फरवरी से शुरू हुए हमलों के बाद ये सबसे दुर्दशा पूर्ण कृत्य था। यह संघर्ष कई बार खाड़ी के महत्वपूर्ण जल और ऊर्जा ढांचे के करीब पहुंच चुका है। दो मार्च को दुबई के जेबेल अली बंदरगाह के पास ईरानी मिसाइलें व ड्रोन से हुए हमले दुनिया के सबसे बड़े डीसैलीनेशन संयंत्रों में से एक से लगभग 12 मील दूर ही गिरे थे। संयुक्त अरब अमीरात के फुजैराह एफ-1 जल व बिजली परिसर और कुवैत के दोहा वेस्ट डीसैलीनेशन संयंत्र के आसपास भी नुकसान की खबरें आईं। बहरीन ने भी अपने एक जल संयंत्र को ड्रोन हमलों से नुकसान पहुंचने का आरोप लगाया है, जबकि ईरान का कहना है कि अमेरिकी हमले में होर्मुज जलडमरूमध्य के पास केश्म द्वीप स्थित एक डीसैलीनेशन संयंत्र क्षतिग्रस्त हुआ, जिससे 30 गांवों की जल आपूर्ति प्रभावित हुई।
जिस मानव समाज की सुख सुविधाओं और पूर्ति के लिए युद्ध किया जा रहा है यदि उसी मानव समाज की एक बड़ी आबादी को प्यास के कारण तड़प कर मरना पड़े तो फ़िर ऐसे युद्ध में जीत का क्या अर्थ होगा? जिस जनता पर शासन करने के लिए युद्ध हो रहा है जब वही जनता न रहेगी तो कितनी भी बड़ी जीत हो वो तो निरर्थक ही साबित होगी। एशिया के वो देश, जहां डिसेनिलेशन प्लांट लगाए गए है कुवैत,संयुक्त अरब अमीरात (UAE),बहरीन,लीबिया, यमन, और जॉर्डन ये सभी पश्चिम एशियाई देश है।

पश्चिम एशिया में जल संरक्षण के उपाय
पश्चिम एशिया में संयुक्त अरब अमीरात में जल संरक्षण के कई उपायों पर काम किया जा रहा है, जिनमें अमीराती नागरिकों के लिए जल खपत संकेतक लागू करना ,जल शुल्क और सब्सिडी का पुनर्संतुलनकरना आदि शामिल हैं। अकेले अबू धाबी में 1,300 से अधिक भूजल निगरानी केंद्रों का निर्माण; और खारे भूजल से मीठा पानी बनाने में सक्षम सौर ऊर्जा संचालित विलवणीकरण संयंत्रों का विस्तार। भविष्य में किए जाने की संभावना है। वर्तमान में संघीय विद्युत और जल प्राधिकरण (FEWA) शैवाल का उपयोग करके पानी से नमक सोखने वाली एक नई तकनीक का परीक्षण कर रहे है। यदि यह तकनीक प्रभावी साबित होती है, तो संयुक्त अरब अमीरात इसे लागू करने वाला दुनिया का पहला देश होगा। यह संयुक्त अरब अमीरात की इस बढ़ी हुई जागरूकता का प्रतीक है कि जल संकट की समस्याओं का पूरी तरह से समाधान करने के लिए उपलब्ध संसाधनों के महत्वपूर्ण निवेश के साथ-साथ मौलिक सोच की आवश्यकता होती है।
सऊदी अरब, जो विश्व में खारे पानी के सबसे बड़े उत्पादक देश है, ने अपने विलवणीकरण संयंत्रों को चलाने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा विकल्पों का उपयोग करके अधिक टिकाऊ जल आपूर्ति समाधान अपनाने के अपने हालिया प्रयासों में भी सक्रियता दिखाई है। इसका जल्द ही पूरा होने वाला 130 मिलियन डॉलर का अल खफजी संयंत्र विश्व का सबसे बड़ा विलवणीकरण संयंत्र होगा, जो स्वच्छ फोटोवोल्टिक (पीवी) ऊर्जा का उपयोग करके प्रतिदिन 60,000 घन मीटर पानी का उत्पादन करेगा।
आने वाले दशक में न केवल पश्चिम एशिया बल्कि विश्व के अधिकांश भाग को मीठे जल की कमी से गुजरना पड़ सकता है। ऐसे में पश्चिम एशिया में चल रहे युद्धों के निवारण के लिए ठोस कदम उठाने का प्रयास करना होंगा। और विश्व के समस्त देशों को जल संरक्षण में अधिकता और भूमिगत जल के दोहन में कमी लाने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। तभी भविष्य की आने वाली पीढ़ियों में जल की आपूर्ति को बहाल किया जा सकेगा।

-डॉ. अंशुल उपाध्याय

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