जब कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने अनुवाद की मूक पशुओं की भाषा

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-महेन्द्र तिवारी
मानव सभ्यता के इतिहास में यह इच्छा हमेशा से रही है कि हम अपने आस-पास के मूक पशुओं की भाषा को समझ सकें। पौराणिक कहानियों से लेकर आधुनिक विज्ञान कथाओं तक, जानवरों से बातचीत करने की क्षमता को हमेशा एक जादुई शक्ति या वरदान के रूप में प्रस्तुत किया गया है। परंतु वर्तमान समय में जब कृत्रिम बुद्धिमत्ता हमारे जीवन के प्रत्येक क्षेत्र को गहराई से प्रभावित कर रही है, यह प्राचीन स्वप्न भी अब वास्तविकता का रूप लेने लगा है। चीन के एक नए तकनीकी स्टार्टअप ने इस दिशा में एक अत्यंत क्रांतिकारी और साहसिक कदम उठाया है जिसने पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों, पशु प्रेमियों तथा तकनीकी जगत को अचंभित कर दिया है। इस चीनी कंपनी ने एक ऐसा विशेष उपकरण तैयार किया है जो पालतू जानवरों की आवाजों और उनके शारीरिक हाव-भाव का विश्लेषण करके उसे इंसानी भाषा में अनुवाद करने में सक्षम है। इस पूरे आविष्कार में सबसे अधिक ध्यान आकर्षित करने वाली बात यह है कि इस उपकरण के माध्यम से किए जाने वाले अनुवाद को 95 प्रतिशत तक सटीक बताया जा रहा है, जो कि विज्ञान और तकनीक की दुनिया में एक बहुत बड़ा और अभूतपूर्व दावा माना जा रहा है।

इस अनोखी और अत्याधुनिक तकनीक को विकसित करने का पूरा गौरव चीन के हांगझोउ शहर में कार्यरत एक नए स्टार्टअप मेंग श्याओयी को जाता है। इस संस्थान ने वर्षों के व्यापक शोध और जटिल परीक्षणों के उपरांत पेट्टीचैट नाम का एक अनूठा स्मार्ट कॉलर बाजार में पेश किया है। यह गले में पहनाया जाने वाला कोई साधारण पट्टा नहीं है, अपितु इसके अंदर कृत्रिम बुद्धिमत्ता की एक पूरी कार्यप्रणाली समाहित है। इस गैजेट की मूल संरचना को शक्ति प्रदान करने के लिए अलीबाबा क्लाउड के सुप्रसिद्ध क्वेन एआई मॉडल का प्रयोग किया गया है। इस मॉडल को विशेष रूप से पशुओं के व्यवहार, उनकी विभिन्न ध्वनियों और मनोदशाओं को समझने के लिए ही तैयार किया गया है। इस पूरी तकनीक को विकसित करने में वैज्ञानिकों और डेवलपर्स को पूरे 2 वर्ष का लंबा समय लगा है। इस लंबी अवधि के दौरान कंपनी ने अनेक अनुभवी पशु चिकित्सकों और पशु व्यवहार विशेषज्ञों का सहयोग लिया ताकि पालतू जीवों के संवाद करने के तौर तरीकों का एक अत्यंत प्रामाणिक और वैज्ञानिक डेटाबेस तैयार किया जा सके जो इस उपकरण को आधार प्रदान कर सके।

इस आधुनिक उपकरण को प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से स्टार्टअप ने पालतू पशुओं, मुख्य रूप से कुत्तों और बिल्लियों के लाखों ऑडियो और वीडियो नमूनों को एकत्रित किया और उनका बारीकी से अध्ययन किया। इन संकलित नमूनों में जानवरों के अलग-अलग परिस्थितियों में भौंकने, म्याऊं करने, घुरघुराने तथा उनके बैठने, उठने और पूंछ हिलाने जैसी विभिन्न शारीरिक मुद्राओं को रिकॉर्ड किया गया था। इस विशाल डेटा का विश्लेषण करने के पश्चात ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल को इस योग्य बनाया जा सका कि वह जानवरों के भीतर छिपी भावनाओं के संकेतों को आसानी से पकड़ सके। जब कोई पालतू पशु इस पट्टे को अपने गले में धारण करता है, तो इसमें स्थापित किए गए बेहद संवेदनशील माइक्रोफोन उसकी आवाजों को तुरंत पकड़ लेते हैं और साथ ही इसमें लगे मोशन सेंसर उसकी शारीरिक गतिविधियों को मापते हैं। यह संपूर्ण प्रक्रिया इतनी तीव्र गति से पूरी होती है कि कुछ ही सेकंडों में सारा डेटा मालिक के स्मार्टफोन में मौजूद एक विशेष ऐप पर भेज दिया जाता है। यह ऐप उस डेटा का अनुवाद करके मोबाइल स्क्रीन पर सीधे छोटे और स्पष्ट वाक्य प्रदर्शित कर देता है, जिससे मालिक को अपने पालतू पशु की स्थिति तुरंत पता चल जाती है।

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