गर्म होती पृथ्वी, ठंडी पड़ती समझ: भारत का जलवायु सच...
-प्रो. आरके जैन “अरिजीत” भारतीय सभ्यता सदियों तक ऋतुओं पर उतना ही भरोसा करती रही, जितना सूर्योदय पर। खेती, नदियाँ, पर्व-त्योहार और जीवन मौसम की नियमित लय पर आधारित थे। किंतु अब प्रकृति चेतावनी दे रही है। अप्रैल–मई 2026 में कई शहरो...


