जयपुर/अलवर। दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सामने आए आंकड़ों ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों पर बहस तेज कर दी है। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से साझा किए गए संदेश के अनुसार, मतदाता सूची में करीब 33 लाख प्रविष्टियां तार्किक विसंगतियों अथवा मैपिंग नहीं होने के दायरे में थीं। इनमें से लगभग 20 लाख मामलों का समाधान किए जाने की जानकारी दी गई है। इस मामले को लेकर राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने मतदाता सूची की शुद्धता, चुनाव आयोग की जवाबदेही और पात्र मतदाताओं के अधिकारों को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में किसी भी पात्र नागरिक का मताधिकार प्रभावित नहीं होना चाहिए। मतदाता सूची में विसंगतियों के समाधान के नाम पर आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए।
33 लाख प्रविष्टियों में विसंगति, 20 लाख मामलों के समाधान की जानकारी
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के संदेश के मुताबिक, मतदाता सूची में करीब 33 लाख प्रविष्टियां Logical Discrepancy/Un-mapped श्रेणी में थीं। इन समस्याओं के समाधान के लिए अभियान शुरू किया गया और संदेश साझा किए जाने तक लगभग 20 लाख मामलों का निस्तारण किए जाने की जानकारी दी गई।
संदेश में यह भी कहा गया है कि किसी भी पात्र मतदाता को मतदाता सूची से बाहर नहीं किया जाएगा। शिकायतों के समाधान के लिए 14,947 बूथ लेवल ऑफिसर (BLO), 902 सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (AERO), 70 निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO), 13 जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) और मुख्य निर्वाचन अधिकारी से संपर्क करने की व्यवस्था बताई गई है।



