सवाई माधोपुर : दो दिवसीय रिफ्रेशर प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्पन्न

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सवाई माधोपुर। जिले के निमली कला गांव में नाबार्ड के सहयोग से आरुही विकास संस्थान द्वारा संचालित आजीविका एवं उद्यम विकास कार्यक्रम के तहत क्षीर समृद्धि महिला डेयरी विकास कार्यक्रम के चौथे बैच का दो दिवसीय रिफ्रेशर प्रशिक्षण शुक्रवार को सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को डेयरी उत्पादों की बिक्री के माध्यम से स्वरोजगार अपनाने और अपनी आय बढ़ाने के लिए प्रेरित किया गया।
रिफ्रेशर प्रशिक्षण के दौरान संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) लखपत मीणा एवं आत्मा परियोजना के निदेशक अमर सिंह ने महिलाओं को वैज्ञानिक तरीके से पशुपालन करने, पशुओं की उचित देखभाल करने तथा डेयरी व्यवसाय को आय का बेहतर साधन बनाने के लिए प्रोत्साहित किया।
प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को पशुओं के लिए संतुलित आहार, पशु स्वास्थ्य प्रबंधन, स्वच्छ दुग्ध उत्पादन और पशुपालन की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी गई। इसके साथ ही दूध से पनीर, घी और दही जैसे मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने, उनकी लागत निर्धारित करने, उचित पैकेजिंग करने तथा बाजार में बिक्री करने के तरीकों के बारे में भी बताया गया।
अधिकारियों ने कहा कि महिलाएं उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए डेयरी व्यवसाय को व्यवस्थित रूप से संचालित करें, तो इससे उनकी आमदनी में वृद्धि हो सकती है। डेयरी उत्पादों की गुणवत्ता और स्वच्छता पर ध्यान देकर वे बाजार में अपनी अलग पहचान भी बना सकती हैं।
ग्रामीण महिलाओं को उद्यम से जोड़ना उद्देश्य:- आरुही विकास संस्थान के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अखिलेश सिंह ने कहा कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को डेयरी आधारित उद्यमों के लिए प्रशिक्षित कर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने महिलाओं से प्रशिक्षण में सीखी गई तकनीकों को व्यवहार में अपनाने तथा दूध से मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार कर उनकी बाजार में बिक्री करने की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।
एलईडीपी के तहत आयोजित इस रिफ्रेशर प्रशिक्षण में महिलाओं को व्यवसाय का रिकॉर्ड रखने, उत्पादों की लागत एवं उचित विक्रय मूल्य तय करने, पैकेजिंग, विपणन और बाजार से जुड़ने संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां भी दी गईं। इस दौरान महिलाओं प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए।
कार्यक्रम में आरुही विकास संस्थान की टीम के सदस्य उपस्थित रहे। प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाओं को डेयरी व्यवसाय को एक लाभकारी स्वरोजगार के रूप में विकसित करने तथा ग्रामीण आजीविका को मजबूत बनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

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