दूषित जलापूर्ति से मंडरा रहा बीमारियों का खतरा

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बाल मुकुन्द ओझा
देश में में दूषित जल आपूर्ति का खतरा बढ़ गया है। जल जीवन मिशन की जांच में पीने का पानी दूषित होने और निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं होने की जानकारी मिली है। जल जीवन मिशन द्वारा पेयजल की गुणवत्ता की रोजाना जाँच की जाती है। एक अगस्त तक देशभर में 23 लाख 25 हज़ार 81 पानी के नमूनों की जांच की गई। इनमें से 51 हज़ार 266 नमूने जाँच के दौरान दूषित पाए गए। जाँच में लगभग हर 45 वां नमूना गुणवत्ता की कसौटी पर खरा नहीं पाया गया। राजस्थान की स्थिति राष्ट्रीय औसत से भी गंभीर है। इस प्रदेश में हर दसवां पानी का नमूना दूषित पाया गया। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक देश में घटते जल स्त्रोत और प्रदूषित होता पानी किसी मिसाइल या बम से बड़ा खतरा है। प्रदूषित पानी ऐसी बीमारियों का कारण बन सकता है जिसके इलाज पर जीवन की पूरी कमाई खर्च हो सकती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि धरती पर उपलब्ध जल में से 70 प्रतिशत जल प्रदूषित है। उसमें नाईट्राइट, फास्फोरस, बैक्टीरिया मिले हुए हैं। जल पीने योग्य ही नहीं है। नदियों के जल में भी लगातार फैक्ट्रियों में से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थ डाले जाने के कारण नदियां प्रदूषित हो रही हैं।
इंटरनेशनल सेंटर फॉर सस्टेनिबिलिटी की एक रिपोर्ट पर यकीन करे तो देश का लगभग 70 प्रतिशत जल दूषित है। जल संसाधन मंत्रालय की ‘समग्र जल प्रबंधन सूचकांक’ नामक रिपोर्ट के मुताबिक हर साल गंदा पानी पीने से दो लाख लोगों की मौत होती है। हर साल करीब दो लाख लोगों को मौत गंदे और दूषित पानी के सेवन से होती है। यह देश की जीडीपी का छह प्रतिशत नुक्सान है।
दूषित और गंदे पानी के वितरण की रिपोर्टे मीडिया में आये दिन पढ़ने को मिल रही है। आज़ादी के बाद भी हम आमजन को स्वच्छ पानी आज तक सुलभ नहीं करा पाये है यह, बेहद चिंतनीय है। देशभर में पुरानी और जर्जर पेयजल पाइपलाइनें एक बड़ी समस्या हैं। इन जर्जर पाइप लाइनों में सीवर और अन्य गन्दे पानी की मिलावट से स्वास्थ्यजनक बीमारियां फेल रही है। जिसकी वजह से घरों में पहुंचने वाला पानी आमतौर पर पीने लायक नहीं रह गया है। हम जल को अमृत तुल्य बताते है और आज यही अमृत सामान जल प्रदूषित होकर हमारे शरीर में विष का काम कर रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक जब जल में भौतिक और मानवीय कारणों से कोई बाहरी या विजातीय पदार्थ मिलकर जल के स्वाभाविक या नैसर्गिक गुण को परिवर्तित कर देते हैं, जिसका कुप्रभाव जीवों के स्वास्थ्य पर पड़ता है तो ऐसा जल, प्रदूषित जल कहलाता है। सीधे अर्थों में हम कह सकते है जब पानी के विभिन्न स्रोत जैसे नदी, झील, कुआँ, तालाब, समुद्र आदि में दूषित तत्व आकर मिल जाएं, तो उस स्थिति को हम जल प्रदूषण कहते हैं। पानी में हानिकारक वस्तुओं के मिश्रण से ही जल प्रदूषित होता है। प्रदूषित जल का सबसे भयंकर प्रभाव मानव स्वास्थ्य पर पड़ता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में प्रति लाख लगभग 360 व्यक्तिओं की मृत्यु हो जाती है और अस्पतालों में भर्ती होने वाले रागियों में से 50 फसदी रोगी ऐसे होते है जिनके रोग का करण प्रदूषित जल होता है।
मानव स्वास्थ्य के लिए स्वच्छ जल का होना नितांत आवश्यक है। जल के बिना मानव जिन्दा नहीं रह सकता। क्योंकि मानव शरीर का एक बड़ा हिस्सा जल होता है। यह सब मानव को मालूम होते हुए भी जल को बिना सोचे-विचारे हमारे जल-स्रोतों में ऐसे पदार्थ मिला रहा है जिसके मिलने से जल प्रदूषित हो रहा है। जल हमें नदी, तालाब, कुएँ, झील आदि से प्राप्त हो रहा है। जनसंख्या वृद्धि, औद्योगीकरण आदि ने हमारे जल स्रोतों को प्रदूषित किया है जिसका ज्वलंत प्रमाण है कि हमारी पवित्र पावन गंगा नदी जिसका जल कई वर्षों तक रखने पर भी स्वच्छ व निर्मल रहता था लेकिन आज यही पावन नदी गंगा क्या कई नदियाँ व जल स्रोत प्रदूषित हो रहे हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अपने एक अध्ययन में कहा था देश की 323 नदियों के 351 हिस्से प्रदूषित हैं। इसके अलावा 17 फीसदी जल निकाय गंभीर तरीके से प्रदूषित हैं। उत्तर से लेकर दक्षिण तक औद्योगिक जल प्रदूषण की शिकायत एक जैसी हो चली है। आज आवश्यकता की है की हम जल को प्रदूषित होने से बचाये बचाये। जल में ऐसे तत्वों की मिलावट नहीं करें जिससे मानव के स्वास्थ्य विपरीत प्रभाव पड़ता है। जल स्वच्छ होगा तो हम भी स्वस्थ होंगे।

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