कम्युनिज्म की राह पर जा रहे राहुल गांधी, उनकी पार्टी बनी ‘मुस्लिम लीग माओइस्ट कांग्रेस’ : सुधांशु त्रिवेदी

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नई दिल्ली। पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के एक बयान को लेकर सियासत गरमा गई है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने हामिद अंसारी के हवाले से पंडित नेहरू से जुड़ी एक किताब का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि हामिद अंसारी ने खुद उजागर कर दिया है कि कांग्रेस पूरी तरह से ‘मुस्लिम लीग माओइस्ट कांग्रेस’ बन गई है। सुधांशु त्रिवेदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की 2019 में लिखी गई एक किताब के अनुसार, नेहरू जी ने कहा कि उनके लिए कम्युनिज्म और हिंदू राष्ट्रवाद उतना बड़ा खतरा नहीं है। इसके लिए मैं हामिद अंसारी को बधाई देना चाहता हूं।” सुधांशु त्रिवेदी ने विस्तार से बताते हुए कहा, “उनके अनुसार, नेहरू जी का कहना है कि उनके लिए कम्युनिज्म और हिंदू राष्ट्रवाद उतना बड़ा खतरा नहीं है। इस वजह से, मैं हामिद अंसारी को तीन बहुत जरूरी बातें करने के लिए बधाई देना चाहता हूं। पहली बात: उन्होंने पूरी तरह से यह उजागर कर दिया है कि कांग्रेस अब पूरी तरह से माओवादी मुस्लिम लीग कांग्रेस बन गई है। यानी, हामिद अंसारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कांग्रेस अब अपने पूरे ढांचे में पूरी तरह से माओवादी मुस्लिम लीग कांग्रेस बन गई है, चाहे वह किसी ऐसे व्यक्ति से संबंधित हो जिसने उनकी सरकार के तहत संवैधानिक पद संभाला हो या नहीं।”
उन्होंने कहा, “दूसरी बात, उन्हें इस बात का जिक्र करने के लिए बधाई मिलनी चाहिए कि नेहरू जी के अनुसार, कम्युनिज्म से भी बड़ा खतरा था, यानी वे कम्युनिज्म को एक खतरा मानते थे और आज की कांग्रेस अति-वामपंथी हो गई है। राहुल गांधी कम्युनिज्म में उतर गए हैं, जिसे हामिद अंसारी के अनुसार नेहरू जी एक खतरा मानते थे। तीसरी बात के लिए, मैं हामिद अंसारी की सराहना करना चाहता हूं। आप पूछते थे कि नेहरू का जिक्र क्यों लाया जाता है? नेहरू का जिक्र कौन लाया? हमने इसे नहीं उठाया, आपके समर्थकों ने इसे उठाया और किसी ऐसे व्यक्ति ने इसे उठाया जिसने संवैधानिक पद संभाला था।”
भाजपा प्रवक्ता ने केरल में कांग्रेस और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के गठबंधन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “मुस्लिम लीग की स्थापना जिन्ना ने की थी और आप केरल में उनके साथ मिलकर सरकार चला रहे हैं। आजाद भारत के इतिहास में यह एक काला अध्याय है कि मुस्लिम लीग के 5 मंत्री हैं। क्या वे पूरी तरह से सेक्युलर हैं?”
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, “अगर कोई कहता है कि इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग जिन्ना वाली मुस्लिम लीग नहीं है, तो वे झूठ बोल रहे हैं। इसके संस्थापक, मुहम्मद इस्माइल, जिन्ना की मुस्लिम लीग की मद्रास प्रेसिडेंसी के प्रमुख थे। अगर जिन्ना को ‘कायद-ए-आजम’ कहा जाता था, तो मुहम्मद इस्माइल को ‘कायद-ए-मिल्लत’ कहा जाता था। अगर यह मुस्लिम लीग वह मुस्लिम लीग नहीं है, तो यह कांग्रेस भी वह कांग्रेस नहीं है जिसे ‘इंडियन नेशनल कांग्रेस’ कहा जाता था।”

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