’बुजुर्गों और गंभीर रोगियों की देखभाल अब घर की चौखट पर’
’सवा साल में तीन लाख से अधिक रोगियों को मिली बड़ी राहत’
जयपुर। राजस्थान सरकार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘सेवा ही संकल्प’ के विजन को धरातल पर साकार कर रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश में न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ किया गया है, बल्कि मानवीय एवं संवेदनशील पहल के तहत गंभीर एवं असाध्य रोगों से ग्रसित रोगियों को घर बैठे उपचार उपलब्ध करवाया जा रहा है। गंभीर एवं असाध्य रोगों से पीड़ित मरीजों, बेड-रिडन बुजुर्गों और ऐसे रोगियों, जिनके लिए अस्पताल तक पहुंचना कठिन है, उनके लिए होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर राज्य सरकार की जनकल्याणकारी सोच का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आई है। इस पहल से करीब सवा साल के समय में ही तीन लाख से अधिक रोगियों को लाभान्वित किया गया है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का स्पष्ट संकल्प है कि गंभीर बीमारी से जूझ रहे व्यक्ति को केवल उपचार ही नहीं, बल्कि दर्द से राहत, मानसिक सहयोग, सम्मानजनक देखभाल और बेहतर जीवन-गुणवत्ता भी मिले। सरकार की स्वास्थ्य नीति का फोकस केवल बीमारी के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार का प्रयास है कि गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीज और उनके परिवार को कठिन परिस्थितियों में अधिकतम सहारा मिले। इसी सोच के तहत कैंसर, पार्किंसन, स्ट्रोक, रीढ़ की चोट, अल्जाइमर सहित अन्य असाध्य रोगों से पीड़ित मरीजों को आवश्यक पेलिएटिव केयर सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
’2.51 लाख मरीजों को ओपीडी एवं 41 हजार को आईपीडी में सेवाएं’
राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि गंभीर मरीजों को इलाज के लिए बार-बार अस्पताल जाने की परेशानी न उठानी पड़े। जरूरत के अनुसार स्वास्थ्य सेवा मरीज के घर तक पहुंचे, इसी उद्देश्य से होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर को व्यापक रूप दिया जा रहा है। पेलिएटिव केयर कार्यक्रम के तहत राज्य में 98 जिला चिकित्सालयों, उप जिला चिकित्सालयों एवं सेटेलाइट चिकित्सालयों में पेलिएटिव केयर क्लिनिक स्थापित किए जा चुके हैं। बड़ी संख्या में रोगियों को इनका लाभ मिल रहा है। अप्रैल 2025 से अगस्त 2026 तक पेलिएटिव केयर ओपीडी में करीब 2 लाख 51 हजार मरीजों को सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। इसी अवधि में 41 हजार से अधिक मरीजों को आईपीडी में भर्ती कर उपचार एवं देखभाल प्रदान की गई। विशेषज्ञ चिकित्सा परामर्श को मरीजों तक पहुंचाने के लिए टेली-कंसल्टेशन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे गंभीर रोगियों को आवश्यक विशेषज्ञ सलाह प्राप्त करने के लिए अनावश्यक रूप से लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ती।
’4 माह में 43 हजार मरीजों को होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर’
राज्य सरकार बुजुर्गों को परिवार और समाज की अमूल्य धरोहर मानते हुए उनकी स्वास्थ्य सुरक्षा को विशेष प्राथमिकता दे रही है। इसी भावना के अनुरूप जुलाई 2025 से प्रदेश में होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर के माध्यम से बेड-रिडन मरीजों और बुजुर्गों को उनके घर पर ही आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। घर पर उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं में नर्सिंग केयर, फिजियोथेरेपी, आवश्यक दवाइयां तथा मानसिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक परामर्श शामिल हैं। इससे मरीजों को अस्पताल आने-जाने की कठिनाई से राहत मिल रही है और परिवार के सदस्यों को भी अपने प्रियजनों की देखभाल में आवश्यक चिकित्सकीय सहयोग प्राप्त हो रहा है। होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर के माध्यम से वित्तीय वर्ष 2026-27 में अगस्त माह तक करीब 43 हजार मरीजों को होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर की सुविधा प्रदान की जा चुकी है। इनमें करीब 20 हजार बुजुर्ग मरीज शामिल हैं।
’मरीजों के द्वार ‘राहत की किरण’’
मुख्यमंत्री की पहल पर स्वास्थ्य सेवा को मरीज के करीब ले जाने के लिए ‘राहत की किरण’ वाहन के माध्यम से होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर को और प्रभावी बनाया है। इस वाहन में आवश्यक दवाइयों के साथ प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी मरीजों के घर पहुंचते हैं। टीम में नर्सिंग ऑफिसर, फिजियोथेरेपिस्ट और संबंधित क्षेत्र की एएनएम या आशा कार्यकर्ता शामिल रहती हैं। टीम द्वारा घर पर ही मरीज को आवश्यक पेलिएटिव केयर प्रदान की जाती है। जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ चिकित्सकों से टेली-परामर्श की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है।
’57 हजार केयर गिवर्स प्रशिक्षित, एएनएम, आशा एवं सीएचओ को भी प्रशिक्षण’
सरकार ने केवल सेवा का विस्तार ही नहीं किया है, बल्कि इसके लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने पर भी जोर दिया है। अब तक लगभग 57 हजार केयर गिवर्स को होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर के लिए प्रशिक्षित किया जा चुका है। इसके अलावा 10 हजार एएनएम, 21 हजार से ज्यादा आशा कार्यकर्ताओं और करीब 10 हजार सीएचओ को भी होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर के लिए प्रशिक्षण दिया गया है। चरणबद्ध रूप से सभी आशा, एएनएम और सीएचओ को प्रशिक्षित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है, ताकि प्रदेश के दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों तक भी इस संवेदनशील स्वास्थ्य सेवा का लाभ पहुंचाया जा सके।
’बड़े अस्पतालों से गांव के स्वास्थ्य केंद्रों तक विस्तार’
राज्य सरकार का लक्ष्य पेलिएटिव केयर सेवाओं को केवल बड़े अस्पतालों तक सीमित रखना नहीं, बल्कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाना है। सरकार का संकल्प है कि गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को उसकी स्थिति के अनुरूप समय पर उपचार, राहत और देखभाल मिले तथा उसे गरिमापूर्ण जीवन जीने का अवसर प्राप्त हो।



