आरयूआईडीपी के पांचवें चरण में 84 शहरों में होंगे लगभग 9500 करोड़ रुपये के विकास कार्य, जनप्रतिनिधियों एवं स्टेकहोल्डर्स से संवाद कार्यक्रम 5 अगस्त से 11 अगस्त तक

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जयपुर। राजस्थान नगरीय आधारभूत विकास परियोजना (आरयूआईडीपी) के पांचवें चरण के अंतर्गत प्रदेश के 84 शहरों में लगभग 9500 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न विकास कार्य प्रस्तावित हैं। इन कार्यों के संबंध में जनप्रतिनिधियों, पूर्व पार्षदों, प्रबुद्धजनों, मीडिया प्रतिनिधियों एवं अन्य स्टेकहोल्डर्स को जानकारी देने तथा सुझाव प्राप्त करने के उद्देश्य से 5 अगस्त को जिला कलेक्ट्रेट सभागार में प्रातः 10 बजे संवाद कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा । आरयूआईडीपी के पांचवें चरण में शहरों को स्मार्ट, सुरक्षित एवं सस्टेनेबल बनाने पर विशेष फोकस रहेगा। परियोजना के तहत अपशिष्ट जल प्रबंधन, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, शहरी यातायात सुधार, बाढ़ प्रबंधन एवं जल निकासी, विरासत संरक्षण एवं पर्यटन विकास, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर तथा अन्य आवश्यक शहरी अवसंरचना संबंधी कार्य किए जाएंगे। एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) द्वारा वित्तपोषित परियोजना “राजस्थान अर्बन लाइवेबिलिटी इम्प्रूवमेंट प्रोजेक्ट (RULIP) तथा विश्व बैंक द्वारा वित्तपोषित “सस्टेनेबल अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन ऑफ राजस्थान (SUTRA) के माध्यम से इन कार्यों का क्रियान्वयन किया जाएगा। परियोजना का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं को सुदृढ़ कर नागरिकों को बेहतर जीवन स्तर उपलब्ध कराना है।
प्रमुख प्रस्तावित कार्य
67 शहरों में अपशिष्ट जल प्रबंधन एवं शोधित जल के पुनः उपयोग के कार्य।32 शहरों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली का विकास। 7 प्रमुख शहरों में शहरी यातायात एवं गतिशीलता सुधार कार्य। 56 शहरों में बाढ़ प्रबंधन एवं ड्रेनेज नेटवर्क का सुदृढ़ीकरण। 56 शहरों में कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, विरासत संरक्षण एवं पर्यटन विकास संबंधी कार्य।
जयपुर शहर में लगभग 2233.11 करोड़ रुपये का निवेश
जयपुर शहर में प्रस्तावित विकास कार्यों पर लगभग 2233.11 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे। इसमें अपशिष्ट जल प्रबंधन, बाढ़ प्रबंधन एवं जल निकासी, विरासत संरक्षण एवं पर्यटन विकास, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, शहरी यातायात सुधार तथा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित विभिन्न परियोजनाएं शामिल हैं। संवाद कार्यक्रमों के दौरान प्रतिभागियों को परियोजना की विस्तृत जानकारी दी जाएगी तथा उनके सुझाव एवं फीडबैक भी प्राप्त किए जाएंगे, ताकि विकास कार्यों को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

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