जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि जनजातीय समाज अपनी समृद्ध परंपरा, विशिष्ट संस्कृति तथा प्रकृति के साथ गहरे संबंध के लिए प्रसिद्ध है। इस समाज ने ऐसे वीर सपूत दिए हैं, जिन्होंने आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। देश-प्रदेश का विकास इनकी सक्रिय भागीदारी से ही संभव हो सकेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जनजातीय समाज के कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इसी के तहत राजस्थान दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला में यह दिन आदिवासियों को समर्पित है। इन्होंने राजस्थान की इस विकास यात्रा में अतुलनीय योगदान दिया है। शर्मा सोमवार को जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर डूंगरपुर के बेणेश्वर धाम में आयोजित जनसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि 30 मार्च 1949 को भारतीय नववर्ष की चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को रेवती नक्षत्र इंद्रयोग में वृहद् राजस्थान की स्थापना हुई थी। हमारी सरकार ने चौत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन ही राजस्थान दिवस मनाने का निश्चय किया था। इसीलिए इस वर्ष 19 मार्च के दिन प्रदेशभर में इस दिवस को पूरे उत्साह के साथ मनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि बेणेश्वर धाम की ऐतिहासिक भूमि आदिवासी आस्था का सबसे बड़ा केन्द्र है। राज्य सरकार द्वारा बेणेश्वर धाम के सौंदर्यीकरण का कार्य करवाया जाएगा।
हमारा हस्तशिल्प जनजातीय स्वाभिमान की अभिव्यक्ति-
शर्मा ने कहा कि जनजातीय समाज ने अपनी आजादी से कभी समझौता नहीं किया। भगवान बिरसा मुंडा ने महज 25 वर्ष की उम्र में अंग्रेजों के शोषण के विरुद्ध संघर्ष की अलख जगाई। यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी पिछले वर्ष बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर पूरे देश में जनजातीय गौरव वर्ष मनाया। उन्होंने कहा कि हमारा हस्तशिल्प जनजातीय स्वाभिमान की अभिव्यक्ति है। पिथोरा चित्रकला, बांस की बुनाई, मिट्टी के बर्तन, लकड़ी की नक्काशी आदि सभी हमारी अनमोल सांस्कृतिक विरासत हैं। हमारी सरकार का प्रयास है कि इन सभी कलाओं को सम्मान मिले और कलाकारों को इनका उचित मूल्य मिले।
जनजातीय समाज के उत्थान के लिए अनेक निर्णय
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार प्रदेश में जनजाति उत्थान के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है। छात्रावासों में मैस भत्ता ढाई हजार से बढ़ाकर 3 हजार 250 रुपये प्रति माह किया है। साथ ही, खेल अकादमियों में मैस भत्ते में बढ़ोतरी, कक्षा 10वीं एवं 12वीं में 80 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले जनजाति विद्यार्थियों को प्रोत्साहन राशि, सीए व सीएस परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले जनजातीय विद्यार्थियों की प्रोत्साहन राशि में वृद्धि की गई है। उन्होंने कहा कि 244 नए मां-बाड़ी केंद्रों की स्थापना की गई है तथा जनजाति किसानों को मुफ्त संकर मक्का बीज एवं मिनिकिट का वितरित किया गया है। इसी तरह प्रदेश के 8 जिलों में 530 वन धन विकास केंद्रों का गठन कर डेढ़ लाख से अधिक महिलाओं को लाभान्वित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के जनजाति समाज के खिलाड़ियों ने एशियन लेक्रोस गेम्स, राष्ट्रीय लेक्रोस चौंपियनशिप सहित विभिन्न प्रतिस्पर्धाओं में पदक जीते हैं।
वन अधिकार पट्टों के लिए चलाया जाएगा विशेष अभियान
शर्मा ने कहा कि हमारी सरकार ने इस वर्ष के बजट में जनजातीय समाज के सशक्तीकरण के लिए अनेक घोषणाएं की हैं। वनों में निवास करने वाले जनजाति लोगों को व्यक्तिगत एवं सामुदायिक वन अधिकार के पट्टे दिलाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। इन वन अधिकार पट्टों की राजस्व रिकॉर्ड में भी प्रविष्टि सुनिश्चित की जाएगी, ताकि वे इस भूमि पर विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकें और बैंकों से ऋण भी प्राप्त कर सकें। उन्होंने कहा कि बेणेश्वर धाम में संगम एवं अबूदरा घाटों के निर्माण एवं वर्ष पर्यन्त जल की उपलब्धता बनाये रखने के लिए बेणेश्वर एनिकट की रिमॉडलिंग के कार्य किए जाएंगे। इसी तरह, आदिवासी बाहुल्य जिलों के ऐतिहासिक, धार्मिक स्थलों त्रिपुर सुंदरी, मानगढ़धाम, बेणेश्वरधाम, सीतामाता अभ्यारण्य, ऋषभदेव, गौतमेश्वर मंदिर, मातृ कुण्डिया आदि को सम्मिलित करते हुए 100 करोड़ रुपये से ट्राइबल टूरिस्ट सर्किट भी विकसित किया जाएगा। जनजातीय क्षेत्रीय विकास मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा गरीब को केंद्र में रखकर उनके उत्थान के लिए कार्य कर रहे हैं। विकास और जनकल्याण के कार्यों को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में आदिवासियों के तीर्थ बेणेश्वर धाम का सर्वांगीण विकास होगा। मुख्यमंत्री ने इस दौरान बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, सलूंबर एवं सिरोही जिले के 1 हजार 902 करोड़ रुपये के 326 विकास कार्यों का शिलान्यास एवं लोकार्पण किया। शर्मा ने लखपति दीदी सम्मान योजना के अंतर्गत उत्कृष्ट कार्य करने वाली लखपति दीदियों को सांकेतिक चौक और टेबलेट सौंपे।इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने परिसर में आयोजित विकास प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया तथा विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों से संवाद किया एवं बालिकाओं को स्कूटी भी वितरित की। इससे पहले मुख्यमंत्री ने डूंगरपुर में वाल्मीकी मन्दिर एवं हरि मन्दिर में दर्शन कर प्रदेश की सुख-समृद्धि एवं कल्याण की कामना की। इस दौरान राजस्व मंत्री हेमन्त मीणा, सहकारिता राज्य मंत्री गौतम दक, अध्यक्ष राजस्थान धरोहर प्राधिकरण ओंकार सिंह लखावत, सांसद चुन्नीलाल गरासिया, सी.पी. जोशी,विधायक फूल सिंह मीणा, चंद कृपलानी, शंकर लाल ढेचा, प्रताप लाल गमेती, कैलाश मीणा, मती शान्ता मीणा, गोपी चन्द मीणा, समाराम गरासिया सहित वरिष्ठ जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।



