बाल मुकुन्द ओझा
मानसून अपने साथ जहां खुशियों की सौगात लेकर आते है वहीं मानसून के खतरे भी कम नहीं है जिससे हर साल सैंकड़ों लोग अकाल काल कलवित हो जाते है। अतिवृष्टि, बाढ़, आकाशीय बिजली और बादल फटने की घटना आम बात हो गई है। मॉनसून आने के साथ ही आए दिन बादल फटने और बिजली गिरने से लोगों की मौत की खबरें सामने आ रही हैं। बारिश के मौसम में अक्सर आसमानी बिजली गिरने के मामले सामने आते हैं। बादलों की तेज गड़गड़ाहट की आवाज सुनकर हर कोई डर जाता है। कभी-कभी यह बहुत खतरनाक हो जाती है और जमीन पर गिरने पर जानलेवा हो जाती है। यह जहां पर गिरती है, वहा तबाही मचा देती है। बारिश के दौरान अक्सर बादलों के बीच गड़गड़ाहट के साथ बिजली चमकती है। इसके गिरने से कभी इंसान घायल हो जाता है, तो कभी इसकी चपेट में आने से मौत हो जाती है। देशभर में मौसम के करवट बदलने के बीच पहाड़ी राज्यों में बादल फटने और फ्लैश फ्लड की घटनाएं देखने को मिली है। बादल फटना एक ऐसी आपदा है जिसमें कुछ ही मिनटों में सब कुछ तबाह हो जाता है। बादल फटने की घटनाएं हिमालय रेंज में लगातार बढ़ रही हैं। यह जून और जुलाई के महीनों में होती है जब दक्षिण-पश्चिमी मानसूनी हवाएँ अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से चलती हैं और मैदानी इलाकों को पार करते हुए भारत के उत्तरी पहाड़ी इलाकों की ओर बढ़ती हैं। भारतीय मौसम विभाग के वैज्ञानिकों के मुताबिक बादल फटने की ज्यादातर घटनाएं 1 हजार से 2500 मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में दर्ज की गई हैं। इनमें उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर सबसे ज्यादा संवेदनशील क्षेत्र है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में भीषण वर्षा और बादल फटने से भारी तबाही हुई है, जिसमें 12 लोगों की मौत हो गई और 12 लापता हैं। जम्मू कश्मीर में इस महीने अब तक कम से कम 15 बार बादल फटने की घटनाएं हुई हैं। विज्ञान की भाषा में, बादल फटना एक अत्यंत तीव्र वर्षा को संदर्भित करता है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, जब किसी क्षेत्र में प्रति घंटे 100 मिलीमीटर या उससे अधिक वर्षा होती है, तो उसे बादल फटना माना जाता है। यह अक्सर एक छोटे से भौगोलिक क्षेत्र में सीमित समय के लिए होता है। बादल फटने की घटना मुख्य तौर पर कपासी वर्षा बादल के कारण होती है। हवा जब गर्म होती है, तो वह ऊपर की ओर उठती है और अपने साथ नमी भी ले जाती है। ऊपर पहुंचने पर यह ठंडी हो जाती है, जिससे नमी पानी की बूंदों में बदल जाती है। इन बूंदों के मिश्रण से वातावरण में कपासी वर्षा बादल बनते हैं, जो कि एक प्रकार का बड़ा और वर्टिकल बादल होता है। इसमें पानी की मात्रा बहुत अधिक होती है। बादल का निचला हिस्सा, जब गुरुत्वाकर्षण की वजह से पानी का भार सह पाता है, तो एक ही जगह पर अधिक पानी बरसता है, जो कि बारिश की बड़ी बूंदे होती हैं। इससे कम समय में बहुत अधिक बारिश हो जाती है, जिसे बादल फटना कहा जाता है।
इस आलेख में हम बिजली गिरने और बादल फटने की जानकारी आम पाठकों तक पहुँचाना चाहते है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक बारिश के साथ तेज चमकती रोशनी और उसके बाद कड़कड़ाती आवाज सुनाई देती है। आसमान में चमकी यह बिजली तेजी से पृथ्वी पर गिर कर इंसानों की मौत का कारण भी बनती है। आकाशीय बिजली एक शक्तिशाली करंट है। इसके गिरने के समय लोगों को खुद को बचाने का क्षण भर का समय भी नहीं मिल पाता । मौसम विभाग के अनुसार, बिजली का गिरना या आघात एक बड़ा विद्युतीय प्रवाह है जो तूफान के दौरान हवा की गति के बढ़ने और कम होने के कारण उत्पन्न होता है। इस दौरान, पृथ्वी की बाहरी परत पर सकारात्मक चार्ज होता है क्योंकि विपरीत चार्ज आकर्षित करता है, आंधी के बादलों में मौजूद नकारात्मक चार्ज पृथ्वी की बाहरी परत पर मौजूद सकारात्मक चार्ज से जुड़ना चाहता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दुनिया में हर साल बिजली गिरने की करीब 2 लाख 40 हज़ार घटनाएं दर्ज होती हैं। इन घटनाओं में कितनी जानें जाती हैं, इसे लेकर कई तरह के अध्ययन अलग आंकड़े बताते हैं। एक स्टडी की मानें तो दुनिया में 6 हज़ार लोग हर साल बिजली गिरने से मारे जाते हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की मानें तो सिर्फ भारत में हर साल 2500 लोग बिजली गिरने से मारे जाते हैं। एक गैर सरकारी अध्ययन के मुताबिक देश में हर साल 2,500 लोग इन घटनाओं के कारण मौत के शिकार हो जाते हैं।

क्यों फट जाते है बादल और क्यों गिरती है आसमान से बिजली
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