कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सुप्रीम कोर्ट ने किया दोषमुक्त

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नई दिल्ली। कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सुप्रीम कोर्ट ने दोषमुक्त कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में वर्ष 2015 में ट्रायल कोर्ट की ओर से प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को जारी किए गए समन को रद्द कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले के साथ यूपीए सरकार के दौर के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में से एक में औपचारिक रूप से दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को दोषमुक्त कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करने या उनके खिलाफ संज्ञान लेने के कोई ठोस कारण नहीं थे। सुप्रीम कोर्ट ने स्पेशल सीबीआई कोर्ट के 2015 के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और पांच अन्य को तालाबिरा-2 कोल ब्लॉक आवंटन मामले में आरोपी के तौर पर समन भेजा गया था। सुप्रीम कोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली और कहा कि स्पेशल जज के पास क्लोजर को खारिज करने और अपराधों का संज्ञान लेने का कोई सही कारण नहीं था।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि सीबीआई ने अपनी जांच पूरी करने के बाद दो अलग-अलग क्लोजर रिपोर्ट फाइल की थीं, जिन्हें स्पेशल जज ने खारिज कर दिया था। इसलिए, सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च, 2015 के आदेश को रद्द कर दिया है और सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली है और मामले को मेरिट के आधार पर बंद कर दिया है।
11 मार्च 2015 को, स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर दिया था और दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और पांच अन्य लोगों को आईपीसी के सेक्शन 120-बी के तहत आपराधिक साजिश और सेक्शन 409 के तहत क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट समेत अपराधों के लिए ट्रायल का सामना करने के लिए बुलाया था। यह मामला 2005 में तालाबीरा-2 कोल ब्लॉक के एलोकेशन के संबंध में था। सुप्रीम कोर्ट ने 1 अप्रैल 2015 को इस कार्रवाई पर रोक लगा दी थी।

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