नई दिल्ली। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चुनाव आयोग पर आरोप लगाया कि एसआईआर के तीसरे चरण में अब तक करीब 32 फीसदी मतदाता प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि देश में इस तरह लगभग हर तीसरे मतदाता का नाम या तो मतदाता सूची से हटाया गया है या अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जाने के कारण उसके नाम पर अनिश्चितता बनी हुई है।
रमेश ने रविवार को आधिकारिक बयान में कहा कि आयोग ने जून 2025 में बिहार से एसआईआर का पहला चरण शुरू किया था। इसके बाद नवंबर 2025 में नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में दूसरा चरण शुरू किया गया। इन दोनों चरणों में कुल 7.8 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए, जो एसआईआर से पहले की मतदाता सूची का करीब 13 फीसदी था।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 के मध्य में 16 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर का तीसरा चरण शुरू हुआ। जयराम रमेश ने 12 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों के उपलब्ध आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि कुल 36.06 करोड़ मतदाताओं में से 6.18 करोड़ यानी 17 फीसदी से अधिक के नाम हटाए गए हैं। इसके अलावा 5.43 करोड़ मतदाताओं यानी करीब 15 फीसदी को अतिरिक्त दस्तावेज पेश करने के नोटिस दिए गए हैं। उन्होंने दोनों आंकड़ों को जोड़ते हुए कहा कि करीब 32 फीसदी मतदाताओं के मताधिकार पर संकट मंडरा रहा है।
उन्होंने राज्यवार आंकड़े देते हुए दावा किया कि दिल्ली में 53.73 फीसदी, चंडीगढ़ में 52.58 फीसदी, तेलंगाना में 48.90 फीसदी, झारखंड में 39.57 फीसदी, हरियाणा में 37.5 फीसदी, उत्तराखंड में 35.71 फीसदी, मेघालय में 35.36 फीसदी, महाराष्ट्र में 33.88 फीसदी, कर्नाटक में 27.6 फीसदी, ओडिशा में 23.67 फीसदी, आंध्र प्रदेश में 21.17 फीसदी और पंजाब में 15.23 फीसदी मतदाता प्रभावित हुए हैं।
रमेश ने कहा कि कर्नाटक, तेलंगाना और झारखंड ने उन मतदाताओं की सूची सार्वजनिक की है, जिनके नाम हटाए जाने का खतरा है, ताकि संबंधित लोग अपने नाम और स्थिति की जांच कर सकें। उनके अनुसार, दिल्ली ने भी जनता के दबाव के बाद 19 सितंबर को ऐसी सूची सार्वजनिक की है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासित अन्य राज्यों और पंजाब ने अब तक ऐसी सूची जारी नहीं की है।
उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर की प्रक्रिया में आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर तथा वंचित वर्गों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अधिकांश बड़े राज्यों में पुरुषों की तुलना में अधिक महिलाओं के नाम हटाए गए हैं।
रमेश ने कहा कि सरकार अपनी जिम्मेदारी नागरिकों पर डाल रही है और उनसे ऐसे दस्तावेज मांगे जा रहे हैं, जो कई लोगों के पास कभी रहे ही नहीं। उन्होंने एसआईआर को संविधान पर हमला बताया।



