सांख्यिकी केवल संख्याओं का खेल नहीं है अपितु विकास का आइना है

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बाल मुकुन्द ओझा
आज राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस है। भारत में हर साल 29 जून को राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य रोजाना की जिंदगी और योजना एवं विकास की प्रक्रिया में सांख्यिकी के महत्त्व के प्रति लोगों को जागरुक करना है। यह दिन भारत के प्रख्यात सांख्यिकीविद प्रशांत चंद्र महालनोबिस की जन्मतिथि के अवसर पर मनाया जाता है। वे आंकड़ों के जादूगर थे। भारत सरकार ने वर्ष 2007 में आधिकारिक तौर पर प्रत्येक वर्ष 29 जून को राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी। पहला सांख्यिकी दिवस 29 जून 2007 को मनाया गया था। वर्ष 2026 का राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस भारत के लिए और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश विकसित भारत @2047 के विजन की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है, जहां डेटा-संचालित नीतियां देश की प्रगति का मुख्य आधार हैं। किसी भी योजना और परियोजना की सफलता उसके सांख्यिकीय महत्त्व पर निर्भर करती है। आंकड़े हमें नियोजित विकास की राह प्रदर्शित करते है। भारत सरकार सांख्यिकीय आंकड़ों के जरिये समय समय पर विकास का आइना दिखती है। यही हमारी प्रगति का अहसास कराती है। बाधाओं का ज्ञान भी कराती है। बिना आंकड़ों के हम किसी योजना की सफलता का अनुमान नहीं लगा पाते। सांख्यिकी केवल संख्याओं का खेल नहीं है, बल्कि यह देश के विकास की कहानी कहने वाली भाषा है। जैसा कि प्रोफेसर पी. सी. महालनोबिस ने कहा था, सांख्यिकी का उद्देश्य केवल डेटा एकत्र करना नहीं है, बल्कि उसके आधार पर सही निष्कर्ष निकालकर समाज का कल्याण करना है।
पीसी महालनोबिस बंगाली साइंटिस्ट और अप्लाइड स्टैटिस्टीशन थे जिनका जन्म 29 जून 1893 को कोलकाता में हुआ था। उन्हें पॉप्युलेशन स्टडीज की सांख्यिकी माप महालनोबिस डिस्टेंस देने के लिए जाना जाता है। वह स्वतंत्र भारत के पहले योजना आयोग के सदस्य भी थे। महालनोबिस ने इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टिट्यूट की नींव रखी और बड़े पैमाने पर सैंपल सर्वे को तैयार करने में भी योगदान दिया। उनके इस योगदान के चलते उन्हें भारत में मॉडर्न स्टैटिस्टिक्स का पिता माना जाता है।
प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें स्वतंत्रता के बाद नवगठित केंद्रीय मंत्रिमंडल का सांख्यिकी सलाहकार भी नियुक्त किया था। पंडित जवाहरलाल नेहरू के काफी नजदीक रहने के बावजूद उन्होंने कभी कोई पद आधिकारिक तौर पर स्वीकार नहीं किया। सरकार ने महालनोबिस के विचारों का उपयोग करके कृषि और बाढ़ नियंत्रण के क्षेत्र में कई अभिनव प्रयोग किए। उनके द्वारा सुझाए गए बाढ़ नियंत्रण के उपायों पर अमल करते हुए सरकार को इस दिशा में अप्रत्याशित सफलता मिली। स्वतंत्र भारत में औद्योगिक उत्पादन की बढ़ोतरी तथा बेरोजगारी दूर करने के प्रयासों को सफल बनाने के लिए महालनोबिस ने ही योजना तैयार की थी। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत में राष्ट्रीय आय का अनुमान लगाने के उद्देश्य के लिए वर्ष 1949 में महालनोबिस की अध्यक्षता में ही एक श्राष्ट्रीय आय समितिश् का गठन किया गया था। जब आर्थिक विकास को गति देने के लिए योजना आयोग का गठन किया गया तो उन्हें इसका सदस्य बनाया गया।
महालनोबिस चाहते थे कि सांख्यिकी का उपयोग देशहित में हो। उन्होंने देश को आंकड़ा संग्रहण की जानकारी दी। साथ ही भारत सरकार की दूसरी पंचवर्षीय योजना का मसौदा तैयार करने में उन्होंने अपनी अहम भूमिका निभाई। पीसी महालनोबिस बहुआयामी प्रतिभा के धनी थे। एक वैज्ञानिक होने के साथ ही साहित्य में भी उनकी जबरदस्त रुचि थी। उन्होंने रवीन्द्रनाथ टैगोर की कृतियों पर अनेक लेख लिखे थे। शांति निकेतन में रहकर महालनोबिस ने टैगोर के साथ करीब 2 महीने का समय बिताया। इस दौरान टैगोर ने उन्हें आश्रमिका संघ का सदस्य बना दिया। बाद में जब टैगोर ने विश्व भारती की स्थापना की, तो महालनोबिस को संस्थान का सचिव भी नियुक्त किया।

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