पश्चिम एशिया में तनाव और कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच सेंसेक्स और निफ्टी 1 प्रतिशत की गिरावट के साथ खुले

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मुंबई। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों के बीच सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में तेज गिरावट के साथ कारोबार की शुरुआत हुई। प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लगभग 1 प्रतिशत टूटकर खुले।
सेंसेक्स 800 से अधिक अंक या 1.11 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,421.61 पर खुला, जबकि निफ्टी 286 अंक या 1.22 प्रतिशत टूटकर 23,080.70 पर कारोबार शुरू हुआ।
सेक्टोरल स्तर पर रियल्टी, मेटल, ऑटो और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) शेयरों में बिकवाली का दबाव देखने को मिला। इनमें सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई। रियल्टी शेयरों में लगभग 2 प्रतिशत की गिरावट आई जबकि मेटल, ऑटो और आईटी सूचकांक 1 प्रतिशत से अधिक फिसल गए।
निफ्टी के प्रमुख कमजोर शेयरों में विप्रो, टीसीएस, हिंदाल्को इंडस्ट्रीज, टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील, बजाज फाइनेंस और श्रीराम फाइनेंस शामिल रहे।
कमजोरी केवल प्रमुख सूचकांकों तक सीमित नहीं रही। व्यापक बाजार पर भी दबाव देखा गया और निफ्टी मिडकैप 100, मिडकैप 150 तथा स्मॉलकैप सूचकांकों में भी लगभग 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
हालांकि, बाजार में अस्थिरता तेज़ी से बढ़ी। इंडिया वीआईएक्स लगभग 15 प्रतिशत उछलकर 18 के आसपास पहुंच गया।
विश्लेषकों के अनुसार, बाजार की व्यापक तकनीकी संरचना अभी भी कमजोर बनी हुई है। निफ्टी महत्वपूर्ण मूविंग एवरेज के नीचे कारोबार कर रहा है और ‘लोअर हाई-लोअर लो’ (निम्न उच्च और निम्न निम्न) का पैटर्न बनाए हुए है, जो लगातार बिकवाली के दबाव का संकेत देता है।
उनका कहना है कि निफ्टी के लिए तत्काल समर्थन (सपोर्ट) 23,100-23,000 के दायरे में दिखाई दे रहा है, जबकि 23,500-23,700 के बीच मजबूत प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) मौजूद है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशकों की धारणा कमजोर बनी रही। लेबनान पर इजरायल के नए हमलों और ईरान के कई शहरों में विस्फोटों की खबरों ने आशंका बढ़ा दी है कि संघर्ष और व्यापक हो सकता है तथा होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए होने वाली कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
हालांकि इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि संघर्ष समाप्त करने के लिए समझौता अभी भी संभव है और उन्होंने कथित तौर पर इज़राइली नेतृत्व से तनाव को और न बढ़ाने का आग्रह किया था।
इस बीच, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी रही। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 4 प्रतिशत बढ़कर 96.90 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई 4.64 प्रतिशत की बढ़त के साथ 94.75 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
एशियाई बाजारों में भी व्यापक कमजोरी देखी गई। निकेई 225 लगभग 4 प्रतिशत गिर गया, कॉस्पी में 5 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज हुई, जबकि हैंगसेंग इंडेक्स करीब 1 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रहा था।

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