मानसून सत्र से पहले मायावती की नसीहत, बोलीं- हंगामा नहीं, हो सार्थक बहस

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लखनऊ। संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से पहले बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने सत्ता पक्ष और विपक्ष से राजनीतिक टकराव से ऊपर उठकर जनहित के मुद्दों पर गंभीर और सार्थक चर्चा करने की अपील की है। पार्टी ने कहा कि महंगाई, बेरोजगारी, महिला सुरक्षा, परीक्षा पत्र लीक, अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण, भ्रष्टाचार और अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दों पर संसद में ठोस समाधान तलाशे जाने चाहिए, ताकि आम जनता की समस्याओं का प्रभावी निराकरण हो सके। बसपा मुखिया मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा है कि अब जबकि संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हो रहा है, एक बार फिर यह देश व आमजन की चिंता है कि क्या इस बार भी फिर से संसद का सत्र हंगामा व स्थगन आदि की भेंट चढ़ जाएगा, या फिर जबरदस्त महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी, महिला असुरक्षा, महत्वपूर्ण परीक्षाओं के भी पेपर लीक आदि से जुड़े देश के ज्वलंत मुद्दों से उत्पन्न उत्तेजित, आक्रोशित व आन्दोलित माहौल को शांत करने व इनके संतोषजनक समाधान हेतु गंभीरता दिखाई जाएगी। उन्होंने आगे लिखा कि वैसे खासकर अयोध्या श्रीराम मंदिर में चढ़ावा की चोरी, हेराफेरी व गबन आदि को लेकर व्यापक जन आक्रोश ने भी यूपी व देश को काफी झकझोर कर रख दिया है और लोग, धर्म का चुनावी स्वार्थ हेतु राजनीतिकरण करने वालों को इसके लिये कठघरे में खड़ा करके, उनसे दिल दुखाने की जवाबदेही मांग रहे हैं, जिसकी गूंज सड़कों से लेकर अदालत तक में है और संसद में भी यह मुद्दा जरूर गर्म होगा, जिसपर भी लोगों की पैनी नजर है।
मायावती ने कहा कि इतना ही नहीं, बल्कि बंगाल में विधानसभा आम चुनाव के बाद के हालात; राजस्थान में सरकार की लापरवाही के कारण गर्भवती महिलाओं की मौत सहित विभिन्न राज्यों में बढ़ती महिला असुरक्षा; काफी आपाधापी में की जाने वाली चुनावी रेवड़ियों में भारी गड़बड़ी; सरकारी योजनाओं आदि में चर्चित भ्रष्टाचार; पुलिस मुठभेड़ का प्रचलन; वर्षों से बसे-बसाये लोगों को उजाड़कर उनकी कॉलोनियों का ध्वस्तीकरण आदि जैसे सरकारी रवैयों से संविधान की जनकल्याणकारी व्यवस्था चरमराई है।
साथ ही, उन्होंने कहा कि अमेरिका-इजरायल का ईरान के विरुद्ध लगातार युद्ध व रुपया का अवमूल्यण आदि भारत की अर्थव्यवस्था व यहां के जनजीवन को बुरी तरह से प्रभावित करते हुए देश व जनहित के ऐसे खास मुद्दे हैं, जिन पर राजनीतिक द्वेष, स्वार्थ व आरोप-प्रत्यारोप की संकीर्णता/वैमनस्य को त्यागकर सत्ता और विपक्ष दोनों को एकजुट होकर अच्छा उपाय ढूंढ कर सराहनीय कार्य करना होगा, वरना लगभग 140 करोड़ की जनसंख्या वाले अपने देश में बहुजनों का जीवन यहां और भी अधिक बुरे दिन वाला बनकर उनका भविष्य अधर में लटकाएगा, जिसकी आशंका भी व्यक्त की जा रही है।
बसपा मुखिया ने कहा कि देश को त्रस्त करने वाली इन भारी चुनौतियों व उसके प्रति चेतावनियों को ध्यान में रखकर संसद के मानसून सत्र को, बिना किसी उत्तेजना, रोष व विद्वेष के, सुचारू, शांतिपूर्ण एवं स्वस्थ्य लोकतांत्रिक परंपरा के मुताबिक चलना सुनिश्चित किया जाना चाहिए, जो वक्त की अहम जरूरत के हिसाब से सभी की जिम्मेदारी भी बनती है।
उन्होंने कहा कि इस संबंध में सभी संस्थाओं को ऐसा प्रयास जरूर करना चाहिए कि देश के कठिन सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक हालात से त्रस्त भारतीयों के जीवन का बोझ व नित्य दिन की उनकी परेशानी/दिक्कतें और अधिक नहीं बढ़ने पाएं।
मायावती ने कहा कि इसी क्रम में संसद को भी इन ज्वलंत राष्ट्रीय मुद्दों पर पूरी तरह से गंभीर व संवेदनशील होना जरूरी है और इसकी शुरुआत अगर संसद के वर्तमान मानसून सत्र से ही हो तो यह अवश्य ही बेहतर होगा। जनहितैषी गुड गवर्नेंस हेतु संसद का प्रभावी होना जरूरी है।

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