रबी सीजन में भी किसानों को मांग के अनुरूप मिलेगा डीएपी और यूरिया : कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल

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जयपुर। कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि प्रदेश में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। खरीफ सीजन-2026 में राज्य सरकार ने डीएपी एवं यूरिया की मांग से अधिक आपूर्ति कर किसानों को उर्वरक उपलब्ध कराए हैं। रबी सीजन में भी किसानों की मांग के अनुरूप उर्वरकों की समयबद्ध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि किसानों को उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर चिंता करने की आवश्यकता नहीं है, केंद्र सरकार से भी उर्वरकों की निरंतर आपूर्ति जारी है।

खरीफ में मांग से अधिक उपलब्ध कराया डीएपी और यूरिया—

कृषि मंत्री ने बताया कि खरीफ सीजन-2026 में डीएपी की 5 लाख 10 हजार मीट्रिक टन मांग के विरुद्ध 5 लाख 44 हजार 995 मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध कराया गया। इसी प्रकार यूरिया की 11 लाख मीट्रिक टन मांग के मुकाबले 17 लाख 15 हजार 814 मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध कराया गया। इससे स्पष्ट है कि खरीफ सीजन में दोनों प्रमुख उर्वरकों की मांग के अनुरूप पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की गई।

डॉ. मीणा ने बताया कि रबी सीजन में बुवाई अभी प्रारंभिक अवस्था में है। वर्तमान में प्रदेश में 1 लाख 5 हजार 584 मीट्रिक टन डीएपी तथा 3 लाख 63 हजार 969 मीट्रिक टन यूरिया का स्टॉक उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त डीएपी के 14 रैक, जिनमें लगभग 35 हजार मीट्रिक टन उर्वरक है, परिवहन के दौरान हैं। इनके 14 अक्टूबर, 2026 तक किसानों के लिए उपलब्ध होने की संभावना है।

उन्होंने बताया कि वर्तमान साप्ताहिक खपत के आधार पर प्रदेश में लगभग 18 दिन के लिए डीएपी तथा 35 दिन के लिए यूरिया का स्टॉक उपलब्ध है। केंद्र सरकार से लगातार आपूर्ति होने के कारण रबी सीजन में भी उर्वरकों की उपलब्धता बनाए रखने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं।

कालाबाजारी, जमाखोरी और अवैध डायवर्जन पर सख्त कार्रवाई—

कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों को उर्वरक वितरण में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विभाग द्वारा समय-समय पर विशेष अभियान चलाकर जमाखोरी, कालाबाजारी, यूरिया के अवैध डायवर्जन, टैगिंग तथा अन्य अनियमितताओं में लिप्त विक्रेताओं के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जा रही है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2026-27 में अब तक विभाग द्वारा 11,770 उर्वरक विक्रेताओं का निरीक्षण किया गया तथा 9,585 नमूने लिए गए। अनियमितताएं पाए जाने पर 1,238 फर्मों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए। इसके अतिरिक्त 64 उर्वरक विक्रेताओं के विक्रय पर रोक लगाई गई, 128 फर्मों के उर्वरक प्राधिकार पत्र निलंबित अथवा निरस्त किए गए तथा 25 व्यक्तियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई गई। इस दौरान 11 गिरफ्तारियां भी की गई हैं।

गुणवत्ता नियंत्रण के लिए औचक निरीक्षण, सभी जिलों में कंट्रोल रूम—

कृषि मंत्री ने बताया कि उर्वरकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने तथा अनियमितताओं पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए विभाग द्वारा विशेष गुण नियंत्रण अभियान संचालित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत औचक निरीक्षण किए जा रहे हैं और नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है। सभी जिलों में कंट्रोल रूम स्थापित कर उर्वरकों की उपलब्धता, वितरण एवं आपूर्ति की निरंतर निगरानी की जा रही है, ताकि किसानों को समय पर गुणवत्तायुक्त उर्वरक मिल सकें।

डॉ. मीणा ने स्पष्ट किया कि नैनो डीएपी और नैनो यूरिया की खरीद के लिए किसानों पर कोई दबाव नहीं बनाया जा रहा है। किसान अपनी इच्छा और आवश्यकता के अनुसार इन उत्पादों को खरीदने एवं उपयोग करने का निर्णय ले सकते हैं। सरकार उपलब्ध परिणामों को ध्यान में रखते हुए नैनो उर्वरकों के उपयोग को प्रोत्साहित कर रही है।

उर्वरकों के साथ अन्य उत्पादों की जबरन टैगिंग पर रोक—

कृषि मंत्री ने कहा कि उर्वरकों के साथ अन्य उत्पादों की जबरन टैगिंग रोकने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। उर्वरक वितरण कृषि विभाग के कार्मिकों की उपस्थिति में करवाया जा रहा है, ताकि वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे और किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार उर्वरक मिल सकें। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि उर्वरकों की उपलब्धता एवं वितरण व्यवस्था पर सतत निगरानी रखते हुए किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

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