बहुगुणकारी है शिवजी का प्रिय बेलपत्र

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बाल मुकुन्द ओझा
सावन या श्रावण मास शिवजी को अत्यंत प्रिय है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस पावन महीने में भगवान शिव की पूजा करने से शुभ आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में सुख शांति और समृद्धि बनी रहती है। हमारा देश मंदिरों का देश भी कहा जाता है। यहाँ लगभग सभी मंदिरों में शिव दरबार जरूर मिल जाएंगे। शिव मंदिर वैसे देश के हर गली और कौने में स्थापित है। घरों और मंदिरों में इसे लेकर व्यापक तैयारियां चल रही है। पौराणिक मान्यता के मुताबिक भगवान शिव की सच्चे मन से पूजा की जाए तो सारे कष्टों और पापों से मुक्ति मिलती है। लोगों की मान्यता है भोलेनाथ को एक लोटा जल और बेलपत्र अर्पित कर के प्रसन्न किया जा सकता है। इस दिन देशभर के शिव मंदिरों में बच्चे से बुजुर्ग तक विशेषकर महिलायें बेलपत्र, धतूरा, पुष्प, चंदन, फूल , मौसमी फल, गंगाजल, गाय का दूध अर्पित कर भगवान शिव की आराधना करते है। हिंदू धर्म में भगवान शिव को बेलपत्र (बिल्व पत्र) अत्यंत प्रिय माना गया है। शिवपुराण, स्कंदपुराण और पद्मपुराण सहित अनेक धर्मग्रंथों में बेलपत्र के महत्व का विशेष उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि बेलपत्र अर्पण किए बिना शिव पूजा अधूरी मानी जाती है। बेलपत्र त्रिदल (तीन पत्तियों वाला) होता है, जो भगवान शिव के त्रिनेत्र, त्रिगुण (सत्व, रज, तम) और ब्रह्मा–विष्णु–महेश तीनों देवों का प्रतीक माना जाता है। जब भक्त श्रद्धा से शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करता है, तो यह समस्त देवताओं को प्रसन्न करने के समान फलदायी होता है।
सनातन धर्म में ऐसा माना गया है बरगद और बेल के वृक्ष में भगवान शिव का वास है। बिल्व पत्र बेल नामक वृक्ष के पत्तों को कहा जाता है। भगवान शिव को बिल्व पत्र अत्यंत प्रिय है। इसके वृक्ष के नीचे पूजा-पाठ करना पुण्यदायक माना जाता है। शिवपुराण के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान जब हलाहल विष निकला था तो भगवान शिव ने इस विष को अपने कंठ में धारण कर लिया था। इसके प्रभाव से उनका मस्तिष्क गरम होने लगा। जिसके बाद देवताओं ने भगवान शिव को जल चढ़ाना शुरू किया। साथ ही तासीर में ठंडा बेलपत्र के पत्ते भी चढ़ाए। इसके बाद ही भगवान शिव का मस्तिष्क ठंडा हुआ। यही वजह है कि भगवान शिव को बेलपत्र बहुत प्रिय है। यह कहा जाता है यदि श्रद्धा से बेलपत्र शिवलिंग पर अर्पित कर दिया जाए तो भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों के जीवन के कष्टों को दूर करते हैं। बिल्व के वृक्ष के नीचे शिवलिंग रखकर पूजन करने से शिव जी की कृपा प्राप्त होती है। पर्यावरण की दृष्टि से वातावरण को शुद्ध बनाए रखने के लिए बि‍ल्वपत्र के वृक्ष का महत्व है। बिल्व वृक्ष एक बहु उपयोगी औषधीय वनस्पति है। इसके उत्पाद पाचन क्रिया के दोषों से पैदा बीमारियों से रक्षा करता है। यह त्वचा रोग और डायबिटीज से हमारी रक्षा करते है। यह अपने आसपास के वातावरण को शुद्ध और पवित्र बनाए रखता है। घर के आसपास बिल्वपत्र का पेड़ होने पर वहां सांप या विषैले जीवजंतु भी नहीं आते हैं। इस पेड़ की पत्तियां एक साथ तीन की संख्या में जुड़ी होती हैं और इसे केवल एक ही पत्ती माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि बिना बेलपत्र के शिव जी की आराधना पूरी नहीं होती है। धर्मशास्त्रों में भगवान शिव को बेलपत्र आर्पित करने की एक विधि होती है। शिवलिंग पूजा में किस विधि से बेलपत्र चढ़ाया जाना चाहिए। बेल पत्र के तीनो पत्ते त्रिनेत्र स्वरूप् भगवान शिव के तीनों नेत्रों को विशेष प्रिय हैं। अगर आप शिवलिंग पूजा के दौरान बेलपत्र चढ़ाती हैं तो इससे भगवान शिव खुश होंगे और आपकी मनोकामना पूरी करेंगे। बिल्वपत्र के वृक्ष में मां लक्ष्मी का वास होता है. कहते हैं कि इसकी पूजा करने से दरिद्रता दूर होती है।

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