सपने वो हैं जो आपको सोने न दें : डॉ. कलाम के प्रेरक जीवन का संदेश

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-सुनील कुमार महला
‘सपने वे नहीं जो हम सोते समय देखते हैं, सपने वे हैं जो हमें सोने नहीं देते।’ यह प्रेरक विचार भारत के महान वैज्ञानिक, ‘मिसाइल मैन ऑफ इंडिया’ (अग्नि और पृथ्वी जैसी मिसाइल परियोजनाओं में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले), विंग्स ऑफ फायर, इग्नाइटेड माइंड्स और इंडिया-2020 जैसी प्रसिद्ध पुस्तकों के लेखक, युवाओं के प्रेरणास्रोत, शिक्षा के प्रबल समर्थक तथा भारत के 11वें राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का है। प्रतिवर्ष 27 जुलाई को उनकी पुण्यतिथि मनाई जाती है। पाठकों को बताता चलूं कि 27 जुलाई 2015 को शिलांग में विद्यार्थियों को व्याख्यान देते समय उनका निधन हो गया था। जीवन के अंतिम क्षण तक वे युवाओं को ज्ञान और राष्ट्रनिर्माण का संदेश देते रहे। इस दिन पूरा देश उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करता है।

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले में स्थित प्रसिद्ध द्वीप-नगर रामेश्वरम में हुआ था। उनका पूरा नाम अवुल पकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम था तथा उनके पिता जैनुलाब्दीन मरकयार एक नाविक थे, जबकि माता आशियम्मा धार्मिक एवं दयालु स्वभाव की गृहिणी थीं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा रामेश्वरम के विद्यालय में हुई। इसके बाद उन्होंने श्वार्ट्ज हायर सेकेंडरी स्कूल, रामनाथपुरम में अध्ययन किया। वर्ष 1954 में सेंट जोसेफ्स कॉलेज, तिरुचिरापल्ली से भौतिकी में स्नातक तथा वर्ष 1955 में मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग का अध्ययन किया।डॉ. कलाम का बचपन आर्थिक कठिनाइयों में बीता। परिवार की सहायता के लिए वे विद्यालय के बाद अखबार वितरित करते थे। उनका सपना भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट बनने का था, लेकिन चयन प्रक्रिया में वे नौवें स्थान पर रहे, जबकि केवल आठ अभ्यर्थियों का चयन हुआ। उन्होंने इस असफलता को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया और आगे चलकर देश के महानतम वैज्ञानिकों में स्थान बनाया।इसरो और डीआरडीओ में कार्य करते हुए उन्होंने भारत के रक्षा एवं अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई दिशा दी। अग्नि और पृथ्वी जैसी स्वदेशी मिसाइलों के विकास में उनके महत्वपूर्ण योगदान के कारण उन्हें ‘मिसाइल मैन ऑफ इंडिया’ कहा गया। वर्ष 1998 में हुए पोखरण-2 परमाणु परीक्षण के दौरान मिशन की गोपनीयता बनाए रखने के लिए उन्होंने सैन्य वर्दी धारण की और ‘मेजर जनरल पृथ्वीराज’ नाम का उपयोग किया, ताकि विदेशी खुफिया एजेंसियों को इसकी जानकारी न मिल सके। वे केवल रक्षा विज्ञान तक ही सीमित नहीं रहे। वर्ष 1998 में उन्होंने प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. सोमा राजू के साथ मिलकर ‘कलाम-राजू स्टेंट’ विकसित किया, जिससे गरीब मरीजों के लिए हृदय का उपचार काफी सस्ता हो गया। बाद में ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं के लिए ‘कलाम-राजू टैबलेट’ भी विकसित किया गया।डॉ. कलाम केवल महान वैज्ञानिक ही नहीं, बल्कि अत्यंत सरल, संवेदनशील और आध्यात्मिक व्यक्तित्व के धनी भी थे। वे सभी धर्मों का समान सम्मान करते थे और आध्यात्मिक मूल्यों को जीवन का आधार मानते थे। बहुत कम लोग जानते हैं कि वे पक्षियों के प्रति अत्यंत संवेदनशील थे। एक बार डीआरडीओ परिसर की दीवारों पर टूटे हुए काँच लगाने का प्रस्ताव आया, लेकिन उन्होंने यह कहकर उसे अस्वीकार कर दिया कि इससे पक्षियों को चोट लग सकती है। वे सादगी और समानता की भी मिसाल थे। राष्ट्रपति भवन के एक कार्यक्रम में उनके लिए विशेष और बड़ी कुर्सी रखी गई, लेकिन उन्होंने उस पर बैठने से इनकार कर दिया, क्योंकि वह अन्य अतिथियों की कुर्सियों से अलग थी। इतना ही नहीं, उन्हें वीणा बजाना पसंद था और भारतीय शास्त्रीय संगीत में विशेष रुचि थी। वे पुस्तकों और ज्ञान को अपनी सबसे बड़ी पूँजी मानते थे तथा उन्होंने कभी धन-संपत्ति एकत्र नहीं की। राष्ट्रपति भवन में रहते हुए भी वे अपने निजी खर्च स्वयं वहन करते थे। राष्ट्रपति पद छोड़ने के समय उनके पास संपत्ति के नाम पर केवल कुछ हजार पुस्तकें, 4-5 सूट, एक टेप रिकॉर्डर, एक लैपटॉप तथा कुछ निजी सामान ही था। वास्तव में, वे अत्यंत कर्मनिष्ठ थे। इसरो और डीआरडीओ में कार्य करते समय वे प्रतिदिन लगभग 18 घंटे काम करते थे और बहुत कम, लगभग दो घंटे, ही विश्राम करते थे। उनका मानना था कि-‘यदि सूर्य की तरह चमकना है, तो पहले सूर्य की तरह जलना होगा।’डॉ. कलाम की असाधारण सेवाओं के लिए वर्ष 1997 में उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया।

अंत में यही कहा जा सकता है कि डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का जीवन इस सत्य का प्रमाण है कि साधारण परिस्थितियों में जन्म लेने वाला व्यक्ति भी अपने ज्ञान, परिश्रम, विनम्रता और अटूट संकल्प से असाधारण ऊँचाइयों तक पहुँच सकता है। उन्होंने विज्ञान को राष्ट्रनिर्माण का माध्यम बनाया, शिक्षा को विकास का आधार माना और युवाओं को भारत का भविष्य बताया। उनका व्यक्तित्व हमें सिखाता है कि सफलता केवल उपलब्धियों में नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए किए गए योगदान में निहित है। इसलिए डॉ. कलाम केवल एक महान वैज्ञानिक या राष्ट्रपति नहीं, बल्कि एक ऐसी अमर प्रेरणा हैं, जिनके विचार आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करते रहेंगे।

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