जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम प्रदेश की आर्थिक प्रगति, रोजगार सृजन और आत्मनिर्भरता के आधार हैं। राज्य सरकार युवाओं को उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित करने, स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने तथा विकास और विरासत के समन्वय के साथ राजस्थान को देश का अग्रणी औद्योगिक राज्य बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री शनिवार को अंतर्राष्ट्रीय एमएसएमई दिवस पर जयपुर के कॉन्स्टीट्यूशनल क्लब में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों, प्रयासों एवं हमारे उद्यमियों के साहस, आत्मविश्वास और कर्मठता के चलते 33 लाख से अधिक एमएसएमई उद्यमों के साथ राजस्थान आज देश का चौथा सबसे बड़ा एमएसएमई राज्य बन गया है। प्रदेश की डबल इंजन सरकार उद्योगों और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट ने प्रदेश में निवेश और औद्योगिक विकास का एक नया विश्वास स्थापित किया है।
एक साल में 1600 से अधिक औद्योगिक भूखंड आवंटित
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की डबल इंजन सरकार द्वारा उद्योगों हेतु भूमि उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए डायरेक्ट अलॉटमेंट पॉलिसी-2025 लागू की गई है, जिसके चलते पिछले एक वर्ष में राज्यभर में 1600 से अधिक औद्योगिक भूखंडों का आवंटन किया गया है। वहीं, 23 प्राथमिक क्षेत्रों में जरूरी सुधार लागू किए हैं। साथ ही, शहरी क्षेत्रों में एमएसएमई इकाइयों के लिए लैंड यूज अप्रुवल की समय-सीमा 60 दिनों से घटाकर 30 दिन, उद्योग शुरू करने में दी जाने वाली स्वीकृति जारी करने की समय-सीमा 120 दिनों से घटाकर 30 दिन कर दी गई है। इसी प्रकार गैर-प्रदूषणकारी उद्योगों की व्हाइट कैटेगरी सूची को 104 से बढ़ाकर 877 उद्योगों तक विस्तारित किया है, जिससे हजारों एमएसएमई को राहत मिली है। उन्होंने कहा कि सरकार भविष्य की अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए राज्य में सोलर पैनल मैन्यूफैक्चरिंग पार्क, सिरेमिक पार्क, डाटा सेंटर पार्क और डिफेंस मैन्यूफैक्चरिंग पार्क जैसे नए औद्योगिक केंद्र विकसित कर रही है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार विकसित ग्राम-वार्ड अभियान के माध्यम से विकास का रोडमैप तैयार कर रही है। इसके माध्यम से हर जिले में स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि युवा स्थानीय कृषि उत्पादों के आधार पर प्रोसेसिंग यूनिट लगाकर रोजगार प्रदाता बनने की दिशा में आगे बढ़ें। उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने कहा कि सरकार उद्योगों के अनुकूल वातावरण तैयार करने के लिए रीति-नीति एवं योजनाएं तैयार कर रही है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने 33 नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए हैं। इसके लिए वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृति भी दे दी गई है। उद्योग एवं वाणिज्य राज्यमंत्री के. के. विश्नोई ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार नवाचार, सुशासन और प्रभावी प्रबंधन के माध्यम से एमएसएमई, कौशल विकास तथा उद्योग क्षेत्र को नई गति दे रही है।कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने राजस्थान औद्योगिक विकास नीति, ओडीओपी कॉफी टेबल बुक का विमोचन और रैम्प (राइजिंग एंड एक्सीलरेटिंग एमएसएमई परफॉर्मेंस) पोर्टल का शुभारंभ किया। उन्होंने उद्योग एवं वाणिज्य विभाग की विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को ऋण, अनुदान तथा सब्सिडी के 13 करोड़ रुपये से अधिक के चैक और रीको की योजनाओं के लाभार्थियों को भूमि आवंटन पत्र व ऑफर लेटर प्रदान किए। इस दौरान उद्यमी हितेश अग्रवाल, शशिकांत अग्रवाल, डॉ. अश्विनी बगड़िया एवं अभिषेक ने मुख्यमंत्री से संवाद करते हुए राज्य सरकार की उद्योग प्रोत्साहन की योजनाओं के लिए आभार जताया।
मुख्यमंत्री ने की अहम घोषणाएं – हस्तशिल्पियों, बुनकरों एवं सूक्ष्म उद्यमों के उत्पादों के लिए पीपीपी मॉडल पर हाटों का विकास एवं संचालन, पहले चरण में पुष्कर, नाथद्वारा, जैसलमेर और अलवर में हाटों का होगा विकास- पंच गौरव योजना में चिन्हित प्रजातियों एवं वनस्पति संबंधी प्रसंस्करण इकाइयों को वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट योजना में वित्तीय सहायता – रिप्स में एमएसएमई के लिए कैपिटल सब्सिडी की अवधि 10 वर्ष से घटाकर 7 वर्ष- इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए मैन्यूफैक्चरिंग पैकेज के तहत चयनित कंपोनेंट श्रेणियों के लिए रिप्स-2024 में न्यूनतम निवेश की सीमा घटाकर 15 करोड़ रुपये – वर्तमान में रिप्स-2024 के अंतर्गत अधिकतम 3 चरणों में निवेश की अनुमति है। अब भारत सरकार की ईसीएमएस योजना के अंतर्गत आने वाली परियोजनाओं को 5 चरणों में निवेश की अनुमति – इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सेमीकंडक्टर क्षेत्र में कौशल एवं प्रशिक्षण के लिए महिला एवं दिव्यांग कार्मिकों का अधिकतम भत्ता 4 हजार से बढ़ाकर 6 हजार रुपये प्रतिमाह – राजस्थान वेंचर कैपिटल फंड के माध्यम से इस वर्ष 25 नए स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।कार्यक्रम में सांसद मंजू शर्मा, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव शिखर अग्रवाल और आयुक्त नीलाभ सक्सेना सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।



