देशभर में नकली और एक्सपायरी दवाओं का फैला गोरखधंधा

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बाल मुकुन्द ओझा
भारत में नकली, घटिया और अवैध दवाओं का धंधा तेजी से फैल रहा है, जिसकी वजह से रोगियों की जान जोखिम में है। विशेषज्ञों के मुताबिक जो दवाएं धोखाधड़ी से निर्मित या पैक की गई हैं, उन्हें नकली और घटिया दवाएं कहा जाता है क्योंकि उनमें या तो सक्रिय अवयवों की कमी होती है या गलत खुराक होती है। देश में बनने वाली अंग्रेजी दवाएं पिछले कुछ सालों से अपनी गुणवत्ता को लेकर सवालों के घेरे में हैं। देश में आये दिन घटिया, मिलावटी और नकली दवाओं के जखीरे पकड़े जा रहे है जो साबित करते है आमजन का स्वास्थ्य खतरे में है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन के नियमित निगरानी गतिविधि के तहत जून 26 के ड्रग अलर्ट में देशभर की 159 दवाएं एवं कास्मेटिक सैंपल फेल हुए हैं। इनमें 132 सैंपल राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं तथा 27 केंद्रीय प्रयोगशालाओं की जांच में गुणवत्ता की कसौटी पर खरे नहीं उतरे। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन के मुताबिक एंटीबायोटिक, हृदय रोग, दर्द एवं बुखार, बच्चों के सीरप, खांसी, पेट, आंखों की दवाओं सहित इंजेक्शन तथा विटामिन उत्पादों के सैंपल फेल पाए गए हैं। अधिकांश दवाएं डिसाल्यूशन, कंटेंट, एस्से, स्टेरिलिटी, पीएच, पार्टिकुलेट मैटर तथा सक्रिय औषधीय तत्व (एपीआइ) की निर्धारित मात्रा जैसे महत्वपूर्ण गुणवत्ता मानकों पर असफल रहीं। जून के ड्रग अलर्ट में हिमाचल में बनीं 45, उत्तराखंड की 30 और गुजरात की 28, मध्य प्रदेश के 13, तमिलनाडु, महाराष्ट्र व सिक्किम की सात-सात दवाओं के सैंपल फेल मिले हैं। पंजाब, हरियाणा, बिहार, राजस्थान, तेलंगाना, कर्नाटक, असम सहित अन्य राज्यों से भी कुछ दवाओं के सैंपल फेल पाए गए हैं। ये दवाएं अलग-अलग राज्यों से बाजार में उपलब्ध थीं और मरीजों तक पहुँच चुकी थीं। इस भांति साल भर में सैंकड़ों दवाएं जाँच में फेल हो चुकी है।
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक शीघ्र ही भारतीय दवा बाजार 60.9 अरब डालर के स्तर को पार कर जाएगा। ऐसे में अपने मुनाफे के लिए लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वालों पर समय रहते सख्त कार्रवाई करनी होगी। आज के इस समय में नकली दवाइयां भी खूब मिलने लग गई हैं। ज्यादा पैसे कमाने के लालच में बाजार में नकली दवाइयों की बिक्री बढ़ गई है। बाजारों-अस्पतालों में घटिया और नकली दवाएं धड़ल्ले से बिक रही हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार नकली और घटिया दवाएं बनाने की सबसे अधिक कंपनियां हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और गुजरात में है। इनमें से बहुत सी ऐसी कंपनियां सरकारी अस्पतालों में दवा की सप्लाई का ठेका लेती हैं। नकली दवाओं का सेवन करने से आपके शरीर में कई गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। ऐसे में अगर आप मेडिकल स्टोर या ऑनलाइन वेबसाइट से दवाओं को खरीदते हैं तो इस स्थिति में आपको सावधान हो जाने की जरूरत है। घटिया और नकली दवाओं को बनाना-बेचना भ्रष्टाचार ही नहीं हमारी सेहत के लिए एक बड़ा खतरा भी है। ऐसे में नियामकीय व्यवस्था को मजबूत बनाकर ही नकली और मिलावटी दवाओं से निजात मिलेगी।
गंभीर बीमारियों की छोड़िये, छोटी मोटी मौसमी बीमारियां जैसे सर्दी, जुखाम, खांसी, बुखार, एसीडीटी, रक्तचाप और गैस आदि भी यदि अंग्रेजी दवाओं से ठीक नहीं हो रही है तो आप सावधान हो जाइये क्योंकि इन दवाओं के नकली और घटिया होने का खतरा मंडरा रहा है। अनेक मीडिया रिपोर्ट्स में यह खुलासा किया गया है कि देशभर में नकली और घटियां दवाओं का धड़ल्ले से निर्माण हो रहा है जिसका पुख्ता प्रमाण सरकारी एजेंसियों की छापामारी से मिल रहा है। जाँच में ये दवाइयां नकली निकल रही है जो जनता के स्वास्थ्य से सरेआम खिलवाड़ है। आम आदमी जीवन रक्षक दवाओं में मिलावट की ख़बरों से खासा परेशान है। हमारे बीच यह धारणा पुख्ता बनती जा रही है कि बाजार में मिलने वाली अंग्रेजी दवाओं में कुछ न कुछ मिलावट जरूर है। लोगों की यह चिंता बेबुनियाद नहीं है। ये दवाएं नामी ब्रांडेड कंपनियों की पैकेजिंग में बेची जा रही हैं। देशभर में हर दूसरे या तीसरे दिन खबरें छपती रहती है कि इतने करोड़ की नकली दवाई पकड़ी गयी। इतनी दवाओं को नष्ट किया गया या सील किया गया। इसके बावजूद नकली दवाओं का धंधा बजाय कम होने के बढ़ता ही जा रहा है।
भारत दवाओं का सबसे ज्यादा प्रोडक्शन करने वाला देश है। मगर देशवासियों को अच्छी गुणवत्ता की दवाएं नहीं मिल पा रही हैं। इंडिया ब्रांड इक्विटी फाउंडेशन के मुताबिक, भारत में फार्मा इंडस्ट्री बीते कुछ सालों में तेजी से बढ़ रही है। इसमें साल 2020 से 2025 के बीच 37 प्रतिशत कंपाउंड एनुअल ग्रोथ का अनुमान जताया गया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक सबसे अधिक मात्रा में दवाइयां बनाने में भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा देश है। देश में सबसे तेज गति से बढ़ रहे इस कारोबार के 55 बिलियन डॉलर तक पहुंचने के साथ ही नकली और घटिया की दवाओं का अवैध कारोबार भी बढ़ रहा है जिससे लोगों की जान पर खतरा बढ़ता जा रहा है। एसोचैम ने अपनी एक रिपोर्ट में देश में बनने वाली कुल दवाओं का 25 प्रतिशत नकली और खराब गुणवत्ता वाली दवाएं बनने और बिकने का खुलासा किया था, जो विश्व की कुल नकली दवाओं का 35 प्रतिशत है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत सहित विभिन्न देशों में नकली दवाओं का कारोबार लगभग तीस अरब डॉलर तक पहुंच गया है।

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