मुख्यमंत्री के गृह जिले में ही सिलिकोसिस पीड़ितों की सुध लेने वाला कोई नहीं : टीकाराम जूली

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रुदावल। राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भरतपुर के रुदावल तहसील के गांव खेड़ा ठाकुर में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ जाकर सिलिकोसिस पीड़ितों एवं उनके परिजनों से मुलाकात की। जूली ने इस गंभीर बीमारी से जूझ रहे श्रमिकों और उनके परिवारों की व्यथा सुनी और पाया कि क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग सिलिकोसिस की चपेट में हैं, लेकिन शासन- प्रशासन की ओर से उन्हें अपेक्षित सहयोग और संबल नहीं मिल पा रहा है। नेता प्रतिपक्ष ने पीड़ितों के दुख-दर्द में शामिल होते हुए उन्हें विश्वास दिलाया कि वे पूरी संवेदनशीलता के साथ सिलिकोसिस प्रभावित परिवारों के साथ खड़े हैं तथा कांग्रेस पार्टी उनके हक की लड़ाई को मजबूती से लड़ेगी। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण है कि मुख्यमंत्री के अपने गृह जिले भरतपुर में ही लोग सरकारी उपेक्षा झेल रहे हैं; उन्हें स्वयं यहाँ आकर पीड़ितों को संबल देना चाहिए था, लेकिन सरकार ने उन्हें बेसहारा छोड़ दिया है।” जूली ने कहा “सिलिकोसिस पीड़ितों और उनके परिवारों की स्थिति देखकर मुझे बहुत दुःख हुआ, इस बात का भी दुःख हुआ कि भरतपुर तो मुख्यमंत्री जी का गृह जिला है पर सरकार यहाँ नदारद है और पीड़ित अपने हाल पर छोड़ दिए गए हैं। कांग्रेस पार्टी इन सभी की आखिरी आस और उम्मीद है, जो काम सरकार को करना चाहिए था, वो कांग्रेस कर रही है।
पीड़ितों विधवाओं ने बयां किया दर्द: दौरे के दौरान स्थानीय लोगों, महिलाओं और विधवाओं ने नेता प्रतिपक्ष के सामने अपनी पीड़ा बताई, इस दौरान काफी मार्मिक स्थिति बनी जब लोगों ने अपनी व्यथा जूली एवं गहलोत के सामने रखी। जानकारी मिली कि पिछले कई महीनों से उन्हें पेंशन का लाभ नहीं मिल रहा है, जिससे उनके सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। साथ ही, शिकायत मिली कि पालनहार योजना का पैसा भी लंबे समय से उनके खातों में नहीं आया है। जूली ने इन मामलों को बेहद संवेदनशील बताते हुए कहा कि भाजपा सरकार की प्रशासनिक विफलता के कारण गरीब और निराश्रित महिलाएं अपने हक के लिए भटकने को मजबूर हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि इन सभी मामलों को तुरंत दिखवाकर बकाया भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
कांग्रेस सरकार के ऐतिहासिक कदम: टीकाराम जूली ने जानकारी देते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार हमेशा से सिलिकोसिस पीड़ितों के प्रति संवेदनशील रही है। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2013 में कांग्रेस सरकार ने ही पहली बार सिलिकोसिस नीति लागू कर बीमारी पर ₹1 लाख और मृत्यु पर ₹3 लाख का मुआवजा शुरू किया था। इसके बाद 2019 में कांग्रेस ने राहत राशि बढ़ाकर ₹5 लाख की, जिसमें बीमारी पर ₹3 लाख और मृत्यु पर ₹2 लाख का प्रावधान किया गया। कांग्रेस शासन में न केवल ₹1500 मासिक पेंशन और पालनहार योजना का लाभ दिया गया, बल्कि पूरा इलाज मुफ्त सुनिश्चित करते हुए करीब 35,000 मरीजों को ₹911 करोड़ की आर्थिक मदद पहुंचाई गई थी।
विपक्ष निभा रहा अपना फर्ज : टीकाराम जूली ने भाजपा सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि एक तरफ विपक्ष अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए गांव-गांव जाकर जनता के दुख-दर्द सुन रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकार पूरी तरह नदारद है। उन्होंने कहा कि यह बड़े ही अफसोस की बात है कि भरतपुर मुख्यमंत्री का गृह जिला है, इसके बावजूद यहां के लोग सरकारी उपेक्षा का शिकार हैं। मुख्यमंत्री को स्वयं यहां का दौरा करना चाहिए था और इन पीड़ित परिवारों के बीच बैठकर उन्हें संबल देना चाहिए था, लेकिन सरकार ने इन्हें अपने हाल पर छोड़ दिया है।
भाजपा सरकार नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करे: नेता प्रतिपक्ष ने भाजपा सरकार से कड़ी मांग की है कि वह कांग्रेस सरकार के समय सिलिकोसिस पीड़ितों के कल्याण के लिए बनाई गई नीतियों को प्रभावी तौर पर लागू करे। उन्होंने कहा कि सरकार की यह जिम्मेदारी है कि वह यह सुनिश्चित करे कि सहायता राशि और पेंशन का लाभ पात्र व्यक्तियों तक समय पर पहुंचे। जूली ने चेतावनी दी कि यदि विधवाओं की पेंशन और पालनहार योजना का पैसा जल्द जारी नहीं किया गया और नीतियों के क्रियान्वयन में सुधार नहीं हुआ, तो कांग्रेस पार्टी जनता के साथ मिलकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलेगी।

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