खेल और खिलाड़ियों की आवाज़ हैं खेल पत्रकार

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-सुनील कुमार महला
खेल पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत विभिन्न पत्रकारों के योगदान को सम्मान देने, उन्हें विश्व स्तर पर एक मंच पर साथ लाने तथा खेल पत्रकारिता के उच्च मानकों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 2 जुलाई को विश्व खेल पत्रकार दिवस (वर्ल्ड स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट्स डे) मनाया जाता है। वास्तव में,इस दिवस को मनाने के पीछे का मुख्य उद्देश्य खेल को केवल और केवल मनोरंजन या प्रतियोगिता तक सीमित न मानकर खेलों को वैश्विक शांति, मित्रता, आपसी सहयोग और सद्भावना तथा एकजुटता का माध्यम बनाना है। उल्लेखनीय है कि इस दिवस की शुरुआत अंतरराष्ट्रीय खेल प्रेस संघ (एआईपीएस) की स्थापना (2 जुलाई 1924) की स्मृति में की गई थी। यहां पाठकों को जानकारी देना चाहूंगा कि एआईपीएस दुनिया भर के अनेक देशों के खेल पत्रकार संगठनों का प्रतिनिधित्व करता है और खेल पत्रकारिता के पेशेवर मानकों को बढ़ावा देने का कार्य करता है। दूसरे शब्दों में या सरल शब्दों में कहें तो एआईपीएस खेल पत्रकारों का एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जिसका मुख्यालय लॉज़ेन, स्विट्जरलैंड में स्थित है तथा यह दुनिया के 160 से अधिक देशों के खेल पत्रकारों का प्रतिनिधित्व करता है और हमारे देश भारत में इससे संबद्ध संगठन स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसजेएफआई) के नाम से जाना जाता है। बहरहाल, यहां यह कहना ग़लत नहीं होगा कि खेलों की सही, निष्पक्ष और तथ्यपरक रिपोर्टिंग में खेल पत्रकारों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। खेल पत्रकार ही खिलाड़ियों के संघर्ष, उनके जीवन, उपलब्धियों और खेलों के सामाजिक प्रभाव को आम लोगों तक पहुंचाने का काम करते हैं। आज के समय में ओलंपिक, विश्व कप और एशियाई खेलों जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की जानकारी करोड़ों लोगों तक पहुंचाने में खेल पत्रकारों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। वास्तव में, आज खेल पत्रकारिता केवल प्रिंट मीडिया तक ही सीमित नहीं रह गई है, अपितु टीवी, रेडियो, वेबसाइट, मोबाइल ऐप, पॉडकास्ट और सोशल मीडिया भी इसके प्रमुख माध्यम बन चुके हैं। डिजिटल युग में(संचार क्रांति व एआइ के युग में) खेल समाचारों की पहुंच और प्रभाव दोनों पहले की तुलना में कहीं अधिक बढ़ गए हैं। ये खेल पत्रकार ही होते हैं जो कॉरपोरेट जगत और सरकार का ध्यान खेलों तथा खिलाड़ियों की ओर आकर्षित करने का कार्य करते हैं, जिससे खिलाड़ियों को खेलों के क्षेत्र में बेहतर सुविधाएं और प्रायोजन (स्पॉन्सरशिप) मिलने लगी हैं। बहुत कम लोग जानते हैं कि नस्लभेद के खिलाफ महान मुक्केबाज मोहम्मद अली की लड़ाई को दुनिया के सामने प्रभावी ढंग से लाने में खेल पत्रकारों की कलम का महत्वपूर्ण योगदान रहा था। खेल पत्रकारिता का कार्य जितना आकर्षक दिखाई देता है, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी है। कई बार जब कोई मैच रात 12 बजे समाप्त होता है और उसी रात(देर रात्रि को) अखबार को छपना होता है, तब खेल पत्रकारों को मात्र 20 से 30 मिनट या यूं कहें कि बहुत ही कम समय के भीतर ही पूरे मैच का सटीक, विश्लेषणात्मक और त्रुटिरहित रिव्यू तैयार करना पड़ता है। वास्तव में, यह उनके कौशल, अनुभव और समर्पण का परिचायक है। बहुत कम लोग जानते होंगे कि दुनिया में सबसे पहले खेलों के लिए अलग पृष्ठ (स्पोर्ट्स सेक्शन) शुरू करने का श्रेय न्यूयॉर्क जर्नल को जाता है, जिसने वर्ष 1895 में इसकी शुरुआत की थी। आज आवश्यकता इस बात की है कि हम खेल पत्रकारों के योगदान को सम्मान दें। निष्पक्ष, सटीक और जिम्मेदार खेल पत्रकारिता को प्रोत्साहित करें, खेल पत्रकारों के अधिकारों, सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के प्रति जागरूकता बढ़ाएं तथा डिजिटल युग में तथ्यपरक और विश्वसनीय खेल समाचारों के महत्व को रेखांकित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएं। साथ ही खेलों के माध्यम से निष्पक्षता, भाईचारे और खेल भावना का संदेश समाज में फैलाने के प्रयासों को भी मजबूती प्रदान करें।

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