बेजुबान पक्षियों के लिए मौत का खेल बनी पतंगबाजी

ram

बाल मुकुन्द ओझा
स्वतंत्रता दिवस देश की राजधानी दिल्ली में बेजुबान पक्षियों पर कहर बनकर टूटा। इस अवसर पर हुई पतंगबाजी दिल्ली के पक्षियों के लिए खतरनाक साबित हुई। पतंगों के साथ इस्तेमाल होने वाले खतरनाक मांझे ने बड़ी संख्या में पक्षियों को अपनी चपेट में ले लिया। यह तो देश की राजधानी का हाल है जहाँ देश की सरकार बिराजमान है। दूसरे प्रदेशों और दूर दराज के स्थानों का तो भगवान ही मालिक है। साधारणतया खतरनाक मांझे को लोग शिकार होते है। मगर पक्षी भी अब आसमान में खुलकर विचरने की स्थिति में नहीं है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक स्वतंत्रता दिवस के दिन राजधानी दिल्ली के अलग-अलग पक्षी अस्पतालों और राहत केंद्रों में 800 से ज्यादा घायल पक्षी पहुंचने का अनुमान है। स्वतंत्रता दिवस पर पतंग उड़ाने का उत्साह दिल्ली में हर साल देखने को मिलता है। इस बार भी सुबह से शाम तक अनेक इलाकों में आसमान पतंगों से भरा रहा, लेकिन पतंगों के साथ इस्तेमाल होने वाले खतरनाक मांझे ने हजारों की संख्या में पक्षियों को अपनी चपेट में ले लिया। अस्पताल और राहत केंद्रों पर बहुत से पक्षियों को नहीं पहुँचाया जा सका। इनकी संख्यां हज़ारों में है। छोटी मोटी चोट वाले पक्षी चोटिल होने के बावजूद उड़ने में कामयाब हो गए। सिंथेटिक और कांच लगे मांझे के इस्तेमाल पर प्रतिबंध है। इसके बावजूद बाजार में इसकी उपलब्धता और इस्तेमाल को लेकर सवाल लगातार उठते रहे हैं। पतंग उड़ाने के दौरान या कटने के बाद मांझा जब पेड़ों या दूसरी जगहों पर उलझ जाता है, तो उसमें फंसने से पक्षियों के पंख और गले गंभीर रूप से कट सकते हैं।
देश में बहुत से पर्व और त्योहारों पर पूरा आसमान रंग-बिरंगी पतंगो से भर जाता है। लोग पतंग उड़ाते समय सावधानी नहीं बरतते हैं जिससे आसमान पर उड़ने वाले परिंदे और राह चलते लोग घायल हो जाते हैं। यह देखा जाता है पतंगें आसमान में कटकर पेड़ों, झाड़ियों, सड़कों या बिजली के तारों पर गिर जाती हैं। जो पक्षी इन क्षेत्रों का उपयोग बैठने के लिए करते हैं, वे मांझे में फंस जाते हैं और बचने के लिए संघर्ष करते हैं। धागा उनके पंखों, पंखों और पंजों में फंस जाता है। चाइनीज मांझे से गर्दन कटने से कई बाइक सवारों की मौत हो जाती है। हर साल बड़ी संख्या मे बेजुबान पक्षी भी घायल होते हैं। अनेक राज्य सरकारों ने चाइनीज मांझे पर रोक लगा रखी है। फिर भी बाजार में यह मिल जाता है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक चाईनीज मांझे का निर्माण प्लास्टिक की महीन तार के ऊपर कांच की धार व सिंथेटिक कैमिकल से होता है। जिससे इस डोर पर हार्ड कवच बन जाता है। जिससे यह न तो घिसती है व न ही टूटती है। इसकी वजह से न सिर्फ पतंगबाजी कर रहे लोगों के हाथ कट जाते हैं बल्कि गाड़ियों में यह मांझा फंसता है तो उनका बैलेंस बिगड़ता है, जिससे बाइक सवार को चोट लगती है और हादसे में मौत तक हो जाती है। हर साल हजारों की संख्या में बेजुबान पक्षी पतंगबाजी से घायल हो जाते है। एक रिपोर्ट के अनुसार असावधानी से पतंगबाजी के फलस्वरूप , गुलाब-छल्ला वाले तोते, खलिहान उल्लू जैसे पक्षी अक्सर इन घातक पतंग डोरों का शिकार बनते हैं। इसके अलावा कौवे, कबूतर और गौरैया जैसे पक्षियों को भी नहीं बख्शा जाता है। पतंगबाजी के कारण घायल होने के बाद पेरेग्रीन बाज़, चील, लैपविंग, मोर और सारस क्रेन की कई प्रजातियों को भी बचाया गया है। मांझा गिद्धों जैसी पहले से ही संकटग्रस्त पक्षी प्रजातियों के लिए एक अतिरिक्त खतरा बन जाता है। इन पक्षियों की रक्षा और संरक्षण का दायित्व भी हमारा है। पतंगबाजी जरूर करे मगर बेजुबानों का ख्याल भी रखे। इस अवसर पर अनेक समाज सेवी संस्थाएं घायल पक्षियों के उपचार की व्यवस्था करते है, जहां घायल पक्षियों को तुरंत पहुँचाया जाना चाहिए ताकि उनका समय पर उपचार किया जा सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *