भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में जबरदस्त बढ़ोतरी, चार महीनों बाद फिर से 700 बिलियन डॉलर के पार

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नई दिल्ली। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 07 अगस्त को समाप्त हुए सप्ताह में 14.136 बिलियन डॉलर बढ़कर 707.002 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया है। यह जानकारी शुक्रवार को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा जारी किए गए डेटा में दी गई। मध्य पूर्व में तनाव के चलते आई गिरावट के बाद बीते चार महीनों में यह मौका है, जब देश का विदेशी मुद्रा भंडार 700 बिलियन डॉलर के पार निकल गया है। इससे पहले 17 अप्रैल, 2026 को समाप्त हुए हफ्ते में विदेशी मुद्रा भंडार 703.308 बिलियन डॉलर था। आरबीआई के डेटा के मुताबिक, 7 अगस्त को समाप्त हुए हफ्ते में विदेशी मुद्रा भंडार के सबसे बड़े घटक फॉरेन करेंसी एसेट्स (एफसीए) की वैल्यू 9.9946 बिलियन डॉलर बढ़कर 574.625 बिलियन डॉलर हो गई है। एफसीए में डॉलर के साथ दुनिया की कई अहम वैश्विक मुद्राएं जैसे येन, यूरो और पाउंड होती हैं, जिनकी वैल्यू को डॉलर में दिखाया जाता है। इस दौरान, विदेशी मुद्रा भंडार के दूसरे सबसे बड़े घटक गोल्ड रिजर्व की वैल्यू 3.995 बिलियन डॉलर घटकर 108.738 बिलियन डॉलर हो गई है। आरबीआई के अनुसार, 7 अगस्त को समाप्त हुए हफ्ते में एसडीआर की वैल्यू 79 मिलियन डॉलर बढ़कर 18.745 बिलियन डॉलर रही है। वहीं, भारत की आरबीआई में रिजर्व पॉजिशन 116 मिलियन डॉलर बढ़कर 4.894 बिलियन डॉलर पर पहुंच गई है। किसी भी देश के लिए उसका विदेशी मुद्रा भंडार काफी महत्वपूर्ण होता है, और इससे उस देश की आर्थिक स्थिति का पता लगता है। इससे अलावा, यह मुद्रा की विनिमय दर को स्थिर रखने में बड़ी भूमिका निभाता है। उदाहरण के लिए अगर किसी स्थिति में डॉलर के मुकाबले रुपए पर अधिक दबाव देखने को मिलता है और उसकी वैल्यू कम होती है तो केंद्रीय बैंक विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल कर डॉलर के मुकाबले रुपए को गिरने से रोक सकता है और विनिमय दर को स्थिर रखता है। बढ़ता हुआ विदेशी मुद्रा भंडार यह भी दिखाता है कि देश में डॉलर की आवक बड़ी मात्रा में बनी हुई है और यह देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाता है। साथ ही इसके बढ़ने से देश के लिए विदेशों में व्यापार करना भी आसान हो जाता है।

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