नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा परीक्षा पेपर लीक मामलों में त्वरित कार्रवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने की घोषणा के कुछ घंटों बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई के लिए एक विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन कर दिया। यह अदालत केवल इस कानून और इससे जुड़े मामलों की सुनवाई करेगी।
विशेष न्यायाधीश की नियुक्ति
हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल अरुण भारद्वाज द्वारा जारी आदेश के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय के निर्देश पर अनु ग्रोवर बलिगा को राउज एवेन्यू कोर्ट परिसर में नवगठित फास्ट ट्रैक कोर्ट में स्पेशल जज (पीसी एक्ट) (सीबीआई)-25 के रूप में तत्काल प्रभाव से नियुक्त किया गया है।
सभी लंबित मामले होंगे स्थानांतरित
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि यह न्यायिक अधिकारी राउज एवेन्यू कोर्ट परिसर के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-स्पेशल जज (पीसी एक्ट) (सीबीआई) के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करेंगे। साथ ही, अधिनियम के तहत लंबित सभी मामलों और उनसे जुड़े मामलों को इस नई फास्ट ट्रैक कोर्ट में स्थानांतरित करने का आदेश भी दिया गया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने की थी घोषणा
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि युवाओं का भविष्य और कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक में शामिल लोगों को शीघ्र और कड़ी सजा सुनिश्चित करने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को इस संबंध में सभी आवश्यक कदम उठाने के निर्देश भी दिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार छात्रों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और देश के युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
क्या है कानून का प्रावधान
सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत प्रश्नपत्र लीक करने या अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने के दोषी पाए जाने पर अधिकतम पांच वर्ष की कैद और 10 लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है। यह कानून राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के अलावा यूपीएससी, एसएससी, आरआरबी, आईबीपीएस तथा केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों द्वारा आयोजित भर्ती एवं प्रवेश परीक्षाओं पर लागू होता है।



