धौलपुर में धूमधाम से मनाया गया आरएसएस का विजयादशमी उत्सव, भव्य पथ संचलन में स्वयंसेवकों पर हुई पुष्पवर्षा

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धौलपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की धौलपुर नगर इकाई की ओर से आज विजयादशमी के पावन अवसर पर नगर में विजयादशमी उत्सव और भव्य पथ संचलन का आयोजन किया गया। पैलेस रोड स्थित भार्गव वाटिका में आयोजित मुख्य उत्सव की अध्यक्षता शहर के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. रामअवतार अग्रवाल ने की। कार्यक्रम में परम पूज्य पागल बाबा मुख्य अतिथि के रूप में तथा श्रद्धेय हनुमान दास जी महाराज विशिष्ट अतिथि के रूप में गरिमामयी रूप से मंच पर विराजमान रहे। इस दौरान आरएसएस के जिला संघचालक रामख्तियार सिंह भी उपस्थित रहे। उत्सव के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत सामाजिक सद्भाव कार्य प्रमुख दिनेश हलैना रहे।
मंच पर अतिथियों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पारंपरिक शस्त्र पूजन किया गया, जिसके बाद स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता दिनेश हलैना ने बेहद ओजस्वी और विचारणीय उद्बोधन दिया।
मुख्य वक्ता ने विजयादशमी के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसे सीधे त्रेतायुग से जोड़ा। उन्होंने कहा कि यह दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम द्वारा लंकापति रावण के अहंकार और अधर्म के समूल नाश का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि भगवान राम ने किसी राजा की सेना लेकर नहीं, बल्कि जंगलों में रहने वाले शोषित और उपेक्षित वनवासियों (वानर सेना) को संगठित कर, समाज के हर वर्ग को जोड़कर असत्य पर धर्म की विजय दर्ज की थी। आज भी समाज को इसी तरह एकजुट होने की आवश्यकता है। उन्होंने सनातन इतिहास का स्मरण कराते हुए कहा कि सृष्टि पर जब-जब अधर्म, अत्याचार और आसुरी शक्तियां हावी हुई हैं, तब-तब धरा पर उसे मिटाने के लिए स्वयं प्रभु और भगवती (शक्ति) ने विभिन्न रूपों में अवतार लिया है। विजयादशमी को शक्ति और शस्त्र का पर्व बताते हुए उन्होंने कहा कि महाभारत काल में पांडवों ने भी अज्ञातवास समाप्त होने पर अपने शस्त्रों का पूजन किया था। इसलिए, आज के समय में हर हिंदू परिवार को अपने घरों में अनिवार्य रूप से शस्त्र पूजन करना चाहिए ताकि समाज में आत्मरक्षा और सामर्थ्य का भाव जागृत हो सके। उन्होंने बताया कि संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलीराम हेडगेवार ने इस दिन के विशेष आध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्व को समझा था। यही कारण है कि उन्होंने हिंदू समाज को संगठित करने के लिए इसी पावन विजयदशमी के दिन सन् 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की थी। समाज सुधार के रोडमैप पर बात करते हुए उन्होंने संघ के ‘पंच परिवर्तन’ (सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी जीवनशैली और नागरिक कर्तव्य) के महत्व को समझाया। उन्होंने हर स्वयंसेवक और समाज से इसे अपने दैनिक आचरण में ढालने की अपील की। देश की आंतरिक सुरक्षा पर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्य वक्ता ने आगाह किया कि कुछ राष्ट्रविरोधी और विदेशी ताकतें भारत की बढ़ती प्रगति से परेशान हैं और देश को आंतरिक अराजकता व वैमनस्य की आग में धकेलना चाहती हैं। इनसे मुकाबला करने के लिए समाज का जागरूक और संगठित होना बेहद जरूरी है।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के साथ-साथ उपस्थित अन्य पूज्य संतों और अतिथियों ने भी स्वयंसेवकों को आशीर्वाद स्वरूप संबोधित किया।
उत्सव के ठीक बाद भार्गव वाटिका से संघ का भव्य पथ संचलन प्रारंभ हुआ। पूर्ण गणवेश धारण किए हुए, हाथों में दंड लिए और घोष की कदमताल धुन पर अनुशासित रूप से चलते सैकड़ों स्वयंसेवकों को देखना बेहद विहंगम था। निर्धारित रूट के तहत यह संचलन भार्गव वाटिका से रवाना होकर पुरानी सब्जी मंडी, हनुमान तिराहा, लालबाजार और पुराना डाकखाना चौराहा होते हुए जगन टॉकीज रोड पहुंचा। वहां से संचलन हरदेव नगर और पुराना हॉस्पिटल होते हुए पुराना शहर सब्जी गली तथा बड़ा पीर पटपरा रोड से गुजरा। इसके पश्चात स्वयंसेवक गंगाबाई बगीची के पीछे वाले मार्ग से होते हुए राणा गार्डन पैलेस पहुंचे। वहां से तलैया स्थित नेता शालिग्राम की कोठी के सामने से राधा बिहारी रोड होते हुए संचलन वापस अपने प्रारंभिक स्थल भार्गव वाटिका पहुंचा।
संचलन के स्वागत के लिए पूरे धौलपुर शहर के विभिन्न चौराहों पर भव्य तैयारियां की गई थीं। जगह-जगह मंच बनाकर और घरों की छतों से नागरिकों और सामाजिक संस्थाओं द्वारा स्वयंसेवकों पर भारी पुष्पवर्षा कर उनका आत्मीय स्वागत किया गया।

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