नई दिल्ली। संसद के मॉनसून सत्र के पहले ही दिन देश की राजधानी में उस वक्त भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के हजारों समर्थक सुरक्षा घेरों को तोड़ते हुए संसद भवन के बेहद करीब पहुंच गए। प्रदर्शनकारियों द्वारा संसद में घुसने के प्रयास के बाद सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया, जिसके चलते संसद भवन का मेन गेट बंद कर सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया गया। इस दौरान संसद के अंदर प्रधानमंत्री सहित सभी सांसद मौजूद थे। प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस सोमवार सुबह 9 बजे जंतर-मंतर से शुरू हुआ सीजेपी का ‘चलो संसद’ मार्च देखते ही देखते उग्र हो गया। सुबह 10 बजे के करीब बड़ी संख्या में युवा प्रदर्शनकारी राजीव चौक और मंडी हाउस मेट्रो स्टेशन से होते हुए पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने तक जा पहुंचे। संसद की ओर बढ़ रही भीड़ को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) ने मल्टी-लेवल बैरिकेडिंग कर रखी थी। जब प्रदर्शनकारियों ने इन 7 फीट ऊंचे बैरिकेड्स को पार करने की कोशिश की, तो पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे और लाठीचार्ज किया। भारी गर्मी और पुलिसिया कार्रवाई के कारण मार्च में अफरा-तफरी मच गई और कुछ प्रदर्शनकारी बेहोश भी हो गए।
दीपके ने खत्म की भूख हड़ताल, सरकार से वार्ता शुरू
इस बीच, आंदोलन में एक बड़ा मोड़ तब आया जब सीजेपी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने अचानक अपनी भूख हड़ताल खत्म करने का एलान कर दिया। दीपके ने बताया कि सरकार की ओर से बातचीत की पहल की गई है, जिसके बाद उन्होंने कार्यकर्ताओं से फिलहाल आंदोलन को स्थगित रखने की अपील की है। पार्टी के प्रवक्ता सौरभ दास और आशुतोष रांका ने इस सिलसिले में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की है। दूसरी ओर, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के तीन सदस्यों (नेहा, आमीन और मनीष) ने भी विपक्षी नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं की अपील पर अपना 23 दिनों से जारी अनशन समाप्त कर दिया है।
अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक की मार्च में शामिल होने की जिद
नीट (NEET) परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर पिछले 23 दिनों से अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने शनिवार को सफदरजंग अस्पताल में शिफ्ट किया था। अस्पताल से ही वांगचुक ने प्रशासन को पत्र लिखकर संसद मार्च में जाने के लिए डिस्चार्ज करने की मांग की। दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा छुट्टी देने से इनकार के बाद, उनकी पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो ने वांगचुक की ओर से इस मार्च का नेतृत्व किया। गीतांजलि ने कहा कि अगर सरकार संसद में शिक्षा में जवाबदेही का मुद्दा उठाने का भरोसा देती है, तो वांगचुक अनशन खत्म कर देंगे।
पुलिस की पाबंदी और विपक्ष का मिला साथ
दिल्ली पुलिस के डीसीपी सचिन शर्मा के मुताबिक, नई दिल्ली इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू होने के कारण जंतर-मंतर के बाहर किसी भी तरह के मार्च की अनुमति नहीं थी। पुलिस ने आम जनता से भी इस मार्च से दूर रहने की अपील की थी।
इस आंदोलन को विपक्षी दलों का भी भारी समर्थन मिला। दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने इसे ‘शिक्षा माफिया के खिलाफ क्रांति’ बताते हुए मार्च में हिस्सा लिया। वहीं, समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय, इकरा हसन और प्रिया सरोज ने भी मंच से प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया। इससे पहले कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने भी जंतर-मंतर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की थी और उनके संवैधानिक अधिकारों का समर्थन किया था।



