कोटड़ी : किसानों को खरीफ फसल खराबे का मुहावजा नहीं मिला

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कोटड़ी। किसानों को खरीफ फसल खराबे का मुहावजा नहीं मिला । सरवाड़ उपखंड में गत वर्ष खरीफ फसल खराबे का अभी तक भुगतान नहीं मिलने से किसानों में आक्रोश व्याप्त है। गत वर्ष खरीफ फसल में अत्यधिक बारिश से करीब 60 करोड़ रुपए का खराबा का आंकलन किया गया था। वापस मानसून शीघ्र दस्तक देने वाला है ओर अभी तक किसानों को फसल बीमा कंपनियां किसानों को खराबे का भुगतान नहीं कर पा रही है। किसान नेता बालू राम भींचर ने बताया कि गत वर्ष सरवाड़ उपखंड में 51 फीसदी ओर टाटूटी तहसील में 49 फीसदी खराबा आया था। उस समय प्रशासन ने जिला कलेक्टर के आदेशों से गांवो में पटवारियों ने खराबे की गिरदावरी करवा कर रिपोर्ट सरकार को भेज दी गई थी। प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों को बीमा कंपनियां को 2 फीसदी प्रीमियम भुगतान करना पड़ता है। बीमा कंपनियां क्रॉप कटिग ओर खराबे की गिरदावरी करवा कर फसल का खराबे का भुगतान किया जाता है। खरीफ फसल में किसान अपने खेतों में मक्का ज्वार बाजरा, मूंग उड़द कपास ओर शब्जिया की बुवाई करते हैं। किसान तिलहन में तिल, सोयाबीन ओर मुंगफली की फसल बोने का काम किया करते हैं। 2023 में भी सरकार ने किसानों की खरीफ सीजन में करीब 80 फीसदी खराबे का आंकलन किया था ओर तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गिरदावरी करवा कर किसानों को मुहावजा देने की घोषणा की थी परंतु आचार संहिता लागू हो गई ओर किसानों को मुहावजा नहीं मिल पाया। किसानों ने बताया कि अभी बैंकों में किसान कार्ड का ब्याज जमा किया जा रहा है। लेकीन किसानों के पास पैसा नहीं है। अब बारिश आने वाली है ओर किसानों को खाद बीज भी खरीदना है। किसान शाहुकारो से कर्ज लेने पर मजबूर होना पड़ रहा है। राज्य सरकार ने किसानों को लाभान्वित करने के लिए आदान अनुदान राशि देने के लिए जिला कलेक्टर के माध्यम से तहसील स्तर पर पटवारियों से किसानों की सूचियां बनाने के आदेश जारी किए थे। पटवारियों ने किसानों की सूचियां बना कर तहसीलदार के माध्यम से जिला कलेक्टर के पास भेज दी थी। फिर भी अभी तक किसानों को आदान अनुदान की राशि नहीं मिल पाई है। यह राशि डीबीटी योजना के तहत किसानों के खातों में जमा होंगी। लेकीन बजट के अभाव में किसानों को आदान अनुदान राशि नहीं जा सकी है। राज्य सरकार द्वारा खरीफ फसल में खराबे पर 13500 रू प्रति हेक्टयर शिचित क्षेत्र के लिए ओर असिंचित भुमि के लिए 6800 रू प्रति हेक्टयर दिया जाता है। किसानों को कृषि इनपुट अनुदान राशि देने में भी काफी अड़चने आती है। किसान नेता बालू राम भींचर ने बताया कि फसल बीमा कंपनियां किसानों को सही तरीके से फसल खराबे का आंकलन नहीं करती है। सरकार में बैठे अधिकारी भी किसानों को लाभान्वित करने के बजाय बीमा कंपनियां को फायदा पहुंचाने का काम करते हैं। जिसके चलते बीमा कंपनियां किसानों को सही तरीके से फसल खराबे की राशि नहीं देती ओर किसानों के खातों में 120रू, किसी के 65 रू के चैक बनाकर किसानों से खराबे के नाम पर मुहावजा का मरहम लगाने के बजाय किसानों के घावों पर नमक छिड़क रही है। किसानों को जल्दी ही मुहावजा नहीं मिला तो किसान आन्दोलन करने पर मजबूर होगें। उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ओर कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ओर केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी से किसानों को आदान अनुदान राशि दिलाने की मांग की है। इस बारे में जिले में किशनगढ़ से विधायक विकास चौधरी ने बताया कि राज्य सरकार किसानों को खराबे का भुगतान समय पर नहीं कर पा रही है। साथ ही जल्दी ही मानसून आने वाला है सरकार किसानों को डीएपी खाद भी उपलब्ध नहीं करवा पा रही है। सरकार पुरी तरह से विफल साबित हो रही है। केवल कागजों में सरकार चल रही है जबकि धरातल पर कोई भी काम नहीं हो पा रहे हैं। कांग्रेस पार्टी शीघ्र ही किसानों की विभिन्न मांगों के लिए आन्दोलन करेगी। जो सरकार किसानों को खाद बीज भी उपलब्ध नहीं करवा सकती है वो सरकार क्या विकास करवाएगी।

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