-बढ़ती अग्नि दुर्घटनाओं के बीच राजस्थान को मिला समग्र फायर सेफ्टी फ्रेमवर्क
-ऊँची इमारतों के विकास को मिलेगी नई उड़ान
-फायर एनओसी हेतु भवन ऊँचाई की बाध्यता समाप्त, आधुनिक सुरक्षा मानकों पर आधारित होगा विकास
जयपुर। देशभर में बढ़ती अग्नि दुर्घटनाओं और जनसुरक्षा की चुनौतियों के बीच राजस्थान सरकार ने अग्नि सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण एवं दूरगामी कदम उठाते हुए राज्य के लिए एक समग्र एवं विस्तृत फायर सेफ्टी फ्रेमवर्क विकसित किया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की बजट घोषणा की अनुपालना में स्वायत्त शासन विभाग द्वारा “राजस्थान राज्य में सभी प्रकार के भवनों हेतु अग्नि निवारण, जीवन सुरक्षा एवं अग्नि संरक्षण उपायों से संबंधित प्रावधान-2026” जारी किए गए हैं।
नए प्रावधान राज्य में भवनों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक, वैज्ञानिक और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे। अब तक विभिन्न नियमों एवं प्रावधानों में बिखरे हुए अग्नि सुरक्षा संबंधी मानकों को एकीकृत कर भवनों के डिजाइन, संरचना, अग्निशमन उपकरणों, जीवन सुरक्षा उपायों, आपातकालीन निकासी व्यवस्था तथा फायर प्रोटेक्शन सिस्टम से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश एक ही फ्रेमवर्क के अंतर्गत उपलब्ध कराए गए हैं।
इस व्यापक सुधार से फायर एनओसी प्रक्रिया अधिक स्पष्ट, पारदर्शी, व्यावहारिक एवं समयबद्ध बनेगी। साथ ही भवन स्वामियों, डेवलपर्स, वास्तुविदों, अभियंताओं एवं अनुमोदन एजेंसियों को एक समान एवं स्पष्ट मानक उपलब्ध हो सकेंगे, जिससे अनुपालना और निगरानी दोनों अधिक प्रभावी होंगी।
नवीन प्रावधानों के अंतर्गत फायर एनओसी प्राप्त करने के लिए भवनों की ऊँचाई को स्थानीय निकायों के पास उपलब्ध अग्निशमन सीढ़ियों की ऊँचाई से जोड़ने की बाध्यता भी समाप्त कर दी गई है। अब भवनों की ऊँचाई का निर्धारण आधुनिक अग्नि सुरक्षा एवं जीवन सुरक्षा मानकों के अनुरूप किया जाएगा। इससे शहरी क्षेत्रों में नियोजित एवं सुरक्षित वर्टिकल डेवलपमेंट को प्रोत्साहन मिलेगा तथा सीमित भूमि का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सकेगा।
उल्लेखनीय है की , नवीन फायर प्रावधान न केवल नागरिकों की सुरक्षा को सुदृढ़ करेंगे बल्कि निवेश, रियल एस्टेट विकास और आधुनिक शहरी अवसंरचना को भी नई गति प्रदान करेंगे। राज्य सरकार ने सभी नगरीय निकायों को निर्देशित किया है कि फायर एनओसी एवं संबंधित अनुमतियों का निस्तारण नवीन फायर प्रावधान-2026 के अनुरूप सुनिश्चित किया जाए।
यह पहल राजस्थान में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को रोकथाम एवं जोखिम न्यूनीकरण (Preventive Safety Framework) आधारित प्रणाली की ओर ले जाने वाला एक ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है।



