सप्तम राज्य वित्त आयोग अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी ने जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों से किया संवाद—पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाने के लिए मिले महत्वपूर्ण सुझाव

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जयपुर। सप्तम राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी की अध्यक्षता में मंगलवार को पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। संवाद के दौरान पंचायती राज संस्थाओं की वित्तीय आवश्यकताओं तथा जनहित से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।
नई जनगणना के आधार पर हो वित्तीय आवंटन
जनप्रतिनिधियों ने सुझाव दिया कि वर्तमान में राज्य वित्त आयोग द्वारा वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर अनुदान जारी किया जाता है, जबकि प्रदेश की जनसंख्या में उल्लेखनीय परिवर्तन हो चुका है। ऐसे में नई जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ग्राम पंचायतों को वित्तीय आवंटन किया जाना चाहिए।
एसएफसी अनुदान वितरण की प्रक्रिया में बदलाव का सुझाव
बैठक में यह भी सुझाव सामने आया कि राज्य वित्त आयोग के अनुदान की प्रथम किश्त में 80 प्रतिशत राशि जारी की जाए तथा शेष 20 प्रतिशत राशि बाद में उपलब्ध कराई जाए, ताकि विकास कार्यों के क्रियान्वयन में वित्तीय बाधा उत्पन्न न हो।
सफाई व्यवस्था और ऊर्जा के वैकल्पिक उपायों पर जोर
जनप्रतिनिधियों ने ग्राम पंचायतों में सफाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए पृथक सफाई कर्मियों की व्यवस्था करने का सुझाव दिया। साथ ही स्ट्रीट लाइटों के संचालन में बिजली पर निर्भरता कम करते हुए सोलर ऊर्जा आधारित व्यवस्था को बढ़ावा देने की आवश्यकता जताई।
मेंटेनेंस कार्यों के लिए भी मिले अनुदान
संवाद के दौरान यह मुद्दा भी उठाया गया कि राज्य वित्त आयोग द्वारा आधारभूत ढांचे के निर्माण के लिए तो अनुदान उपलब्ध कराया जाता है, लेकिन उनके रख-रखाव एवं मरम्मत कार्यों के लिए भी पृथक अनुदान का प्रावधान किया जाना चाहिए।
स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार हो फंड का उपयोग
जनप्रतिनिधियों ने सुझाव दिया कि जिन क्षेत्रों में सड़क निर्माण कार्य संतृप्ति स्तर तक पहुंच चुके हैं, वहां इन कार्यों के लिए निर्धारित राशि को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप अन्य विकास कार्यों में उपयोग करने की अनुमति प्रदान की जाए।
सेकेंडरी स्कूलों को भी मिले वित्तीय सहायता
यह भी सुझाव दिया गया कि पूर्व में राज्य वित्त आयोग द्वारा प्राथमिक विद्यालयों को सहायता उपलब्ध कराई जाती थी, लेकिन वर्तमान में अनेक प्राथमिक विद्यालय माध्यमिक विद्यालयों में विलय हो चुके हैं। ऐसे में माध्यमिक विद्यालयों को भी अनुदान देने का प्रावधान किया जाना चाहिए।
अतिक्रमण रोकने के लिए बने प्रवर्तन एजेंसी
जनप्रतिनिधियों ने पंचायत स्तर पर बढ़ते अतिक्रमण की समस्या के समाधान के लिए जिला/पंचायत समिति/राज्य स्तर पर एक प्रभावी प्रवर्तन (एनफोर्समेंट) एजेंसी गठित करने का सुझाव दिया, जिससे सार्वजनिक भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
ओडीएफ ग्राम पंचायतों को मिले प्रोत्साहन राशि
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) घोषित अच्छा कार्य करने वाली ग्राम पंचायतों को प्रोत्साहन राशि प्रदान करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई, ताकि स्वच्छता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली पंचायतों को प्रोत्साहित किया जा सके।
सुझावों पर गंभीरता से होगा विचार
मीडिया वार्ता के दौरान अरुण चतुर्वेदी ने कहा कि जनप्रतिनिधियों द्वारा दिए गए सुझाव स्थानीय स्तर के अनुभवों पर आधारित हैं और आयोग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। प्राप्त सभी सुझावों का गंभीरतापूर्वक परीक्षण कर उन्हें आयोग की अनुशंसाओं में शामिल करने पर विचार किया जाएगा, ताकि पंचायती राज संस्थाओं को अधिक सशक्त और सक्षम बनाया जा सके।इससे पूर्व नरेश कुमार ठकराल, सदस्य सचिव, राज्य वित्त आयोग ने आयोग के कार्य और दायित्वों के बारे में बताया। डॉ. जोगाराम, शासन सचिव एवं आयुक्त, पंचायती राज विभाग ने संवाद कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन देते हुए राज्य वित्त आयोग की पंचायती राज संस्थाओं में महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख किया। कार्यक्रम में पंचायती राज विभाग के अधिकारी, विभिन्न पंचायतों के जनप्रतिनिधि तथा संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

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