बाल मुकुन्द ओझा
राष्ट्रीय प्रसारण दिवस के अवसर पर यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मन की बात कार्यक्रम आकाशवाणी का एक परिवर्तनकारी और क्रन्तिकारी कार्यक्रम बन चुका है। यह कार्यक्रम पिछले 12 वर्षों से मासिक रेडियो कार्यक्रम के रूप में प्रसारित हो रहा है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभिन्न व्यक्तियों और उनके अभूतपूर्व योगदान को हर महीने पूरे देश और दुनिया के सामने रखा है। प्रसारण सेवा के एक प्रमुख स्तम्भ आकाशवाणी के माध्यम से मन की बात’ ने शिक्षा, पर्यावरण, सामाजिक कल्याण और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सार्थक कार्य करने वाले व्यक्तियों की आवाज़ को बुलंद किया है, जिससे भारत और उसके बाहर लाखों लोगों को प्रेरणा मिली है। इससे आकाशवाणी को भी नया जीवन मिला है।
राष्ट्रीय प्रसारण दिवस हर साल 23 जुलाई को मनाया जाता है। आज ही के दिन हुई थी भारतीय प्रसारण सेवा की स्थापना जो बाद में आकाशवाणी के नाम से मशहूर हुई। यह बिलकुल सच है की अपनी पहचान खोती आकाशवाणी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक कार्यक्रम ने पुनर्जीवित कर नया जीवनदान दिया है। मोदी के लोकप्रिय शो मन की बात ने रेडियो की लोकप्रियता बढ़ा दी है। 23 जुलाई 1927 को भारतीय प्रसारण सेवा की स्थापना हुई थी। कालांतर में 1957 में यह आकाशवाणी के नाम से जानी गई। 98 साल के सफर में भारत की प्रसारण सेवा ने काफी उत्तार चढाव देखे है। आठवें दशक तक या यूँ कहे दूरदर्शन के आगमन तक आकाशवाणी ही शिक्षा, संचार और मनोरंजन के क्षेत्र की सिरमौर थी। उस दौरान घर घर में ही नहीं अपितु हर हाथ में रेडियो था और लोग इससे चिपके रहते थे। हर प्रकार की सूचना का संवाहक था रेडियो। 1980 के बाद संचार के आधुनिक साधनों के प्रादुर्भाव के साथ आकाशवाणी का प्रभाव घटता गया। लोगों ने रेडियो के स्थान पर टीवी को अपनाना शुरू कर दिया। इसी बीच 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद मन की बात नामक एक क्रान्तिकारी कार्यक्रम शुरू हुआ। इसी के साथ आकाशवाणी का एक तरह से पुनर्जन्म हुआ।
एक वक्त था जब, यह आकाशवाणी है, ये शब्द सुनते ही बच्चे से बुजुर्ग तक रेडियो को घेर कर खड़े हो जाते थे। दूरदर्शन के प्रादुर्भाव से पूर्व यानि अस्सी के दशक तक रेडियो पर सुनाई देने वाली यह आवाज संचार के आधुनिक साधनों के बीच गायब सी हो गई थी। पहले भारतीय प्रसारण सेवा फिर आल इंडिया रेडियो और इसके बाद आकाशवाणी के रूप में रेडियो अस्तित्व में रहा। दूरदर्शन के बढ़ते प्रभाव ने इसकी उपयोगिता पर बड़ा संकट खड़ा कर दिया, रही सही कसर निजी चैनलों और मोबाइल ने पूरी करदी। मगर हाल के वर्षों में जहां लोगों में रेडियो की चाह बढ़ी है, वहीं इसकी बिक्री भी तेज हुई है। आकाशवाणी आज भी देश में सबसे ज्यादा एरिया कवर करता है। ऑल इंडिया रेडियो की पहुंच देश की 99.20 प्रतिशत आबादी तक है। देश के 92.6 प्रतिशत भूभाग को यह कवर करता है।
आकाशवाणी अथवा ऑल इंडिया रेडियो भारत के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन संचालित सार्वजनिक क्षेत्र की रेडियो प्रसारण सेवा है। इस सेवा का नाम भारतीय प्रसारण सेवा रखा गया था। देश में रेडियो प्रसारण की शुरुआत मुंबई और कोलकाता में सन 1927 में दो निजी ट्रांसमीटरों से की गई। 1930 में इसका राष्ट्रीयकरण हुआ। 1957 में इसका नाम बदल कर आकाशवाणी रखा गया। सरकारी प्रसारण संस्थाओं को स्वायत्तता देने के इरादे से 23 नवंबर 1997 को प्रसार भारती का गठन किया गया, जो देश की एक सार्वजनिक प्रसारण संस्था है और इसमें मुख्य रूप से दूरदर्शन और आकाशवाणी को शामिल किया गया है।
आकाशवाणी को हिंदी भाषा को जन जन तक पहुँचाने का श्रेय दिया जा सकता है। आजादी से पूर्व आकाशवाणी अनेकता में एकता का सशक्त माध्यम थी। एक दूसरे के पास इसी माध्यम से सारी जानकारी पहुँचती थी। आजादी के बाद प्रगति और विकास का एक मात्र सजीव माध्यम बना आकाशवाणी। बड़े बड़े नेता और महत्वपूर्ण व्यक्ति अपनी बात आकाशवाणी के माध्यम से देशवासियों के समक्ष रखते थे। प्रसारण का एक मात्र साधन होने से देश में इसकी महत्ता और स्वीकार्यता थी। मगर धीरे धीरे निजी क्षेत्र में प्रसारण माध्यम शुरू हुए। निजी चैनलों से चौबीसों घंटे समाचार और मनोरंजन की सामग्री प्रसारित होने लगी फलस्वरूप लोगों ने आकाशवाणी से मुंह मोड़ लिया। इससे आकाशवाणी बहुत थोड़े क्षेत्रों में सिमट कर रह गयी। मगर जब से नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने और उन्होंने इसकी सुध बुध ली तब से इसका महत्त्व एक बार फिर बढ़ा।

आकाशवाणी ने मन की बात के माध्यम से सामाजिक बदलाव और नवाचार की पहल की
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