बाल मुकुंद ओझा
विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा विश्व रोगी सुरक्षा दिवस हर साल 17 सितंबर को मनाया जाता है। यह दिवस वैश्विक जागरूकता पैदा करने, रोगी सुरक्षा में सार्वजनिक जुड़ाव बढ़ाने और रोगी को होने वाले नुकसान के मुद्दों को दूर करने के लिए कार्य योजना बनाने के लिए मनाया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा इस दिन को दुनिया भर में असुरक्षित चिकित्सा प्रथाओं के कारण होने वाले नुकसान के महत्वपूर्ण बोझ को संबोधित करने के लिए पहचाना जाता है। संगठन के मुताबिक कम और मध्यम आय वाले देशों के अस्पतालों में सालाना अनुमानित 134 मिलियन प्रतिकूल घटनाएं होती हैं, इसलिए रोके जा सकने वाले नुकसान और मौतों को कम करने के लिए रोगी सुरक्षा महत्वपूर्ण है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, हर साल लाखों मरीज असुरक्षित चिकित्सा प्रक्रियाओं के कारण नुकसान उठाते हैं। अस्पताल देखभाल प्राप्त करने वाले 10 में से 1 मरीज को नुकसान होता है, जिनमें से अधिकांश मामले रोके जा सकते हैं।
विश्व रोगी सुरक्षा दिवस 2026 की थीम गैर-संक्रामक रोगों के लिए सुरक्षित देखभाल रखी गई है, जिसका नारा है जीवन के लिए सुरक्षित देखभाल । यह अभियान हृदय रोग , स्ट्रोक , मधुमेह , कैंसर और पुरानी श्वसन संबंधी बीमारियों जैसे गैर-संक्रामक रोगों की रोकथाम, निदान, उपचार और दीर्घकालिक प्रबंधन के दौरान रोगी सुरक्षा में सुधार लाने पर केंद्रित है। ये स्थितियां वैश्विक बीमारी के बोझ का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और अक्सर इनमें कई स्वास्थ्य पेशेवरों, दवाओं और नियमित जांच के माध्यम से जीवन भर देखभाल की आवश्यकता होती है। रोगी सुरक्षा के उपायों में मुख्य रूप से उपचार शुरू होने से पहले व्यापक नैदानिक मूल्यांकन और सटीक निदान, मरीजों की पहचान और दवाओं की सुरक्षा के लिए सख्त प्रोटोकॉल,समय पर नैदानिक निर्णय लेने के लिए उन्नत निदान और निगरानी प्रौद्योगिकियां, सभी नैदानिक क्षेत्रों में संक्रमण की रोकथाम और नियंत्रण के उपाय , मानकीकृत सुरक्षा चेकलिस्ट द्वारा समर्थित सुरक्षित शल्य चिकित्सा पद्धतियाँ, हृदय रोग, कैंसर, स्ट्रोक और मधुमेह जैसी जटिल स्थितियों के लिए बहुविषयक देखभाल, मरीजों और देखभाल करने वालों को सूचित निर्णय लेने और सुरक्षित रूप से ठीक होने में सहायता करने के लिए शिक्षा प्रदान करना और स्वास्थ्य मानकों का पालन करके निरंतर गुणवत्ता सुधार शामिल है।
रोगी सुरक्षा का सीधा साधा अर्थ स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में त्रुटियों और प्रतिकूल घटनाओं को रोकना है। यह सुधार, गलतियों से सीखने और सर्वोत्तम प्रथाओं को लागू करने की एक सतत यात्रा है। जहाँ स्वास्थ्य सेवा संस्थान अपने सुरक्षा प्रोटोकॉल को बेहतर बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं, वहीं एक जागरूक और सक्रिय रोगी संभावित नुकसान के विरुद्ध सबसे शक्तिशाली सुरक्षा उपायों में से एक है। जीवन में स्वास्थ्य ही अनमोल धन है। शारीरिक रूप से स्वस्थ व्यक्ति ही जीवन के विभिन्न क्षेत्रो में सफलता अर्जित कर सकते है। स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन का निवास होता है। व्यक्ति की सबसे बड़ी दौलत उसका शरीर और उसका स्वास्थ्य होता है। प्रत्येक व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य के प्रति सदैव सजग रहना चाहिए। आज हर व्यक्ति अच्छी सेहत की बात करता है और इसके प्रति काफी हद तक लोगों में जागरूकता भी आई है। मगर आज भी अधिकांश व्यक्तियों के रोग का या तो समय पर पता नहीं चल पाता है या उसका सही तरह से उपचार नहीं हो पाता है, जिसके कारण हर साल पूरी दुनिया में करोड़ों लोगों की असमय ही मृत्यु हो जाती है। स्वस्थ जीवन का अधिकार हर मनुष्य को है।
भारत में आम तौर पर लोगों में स्वास्थ्य चेतना का अभाव है। शारीरिक स्वास्थ्य के प्रति भी लोग तभी चिंतित होते हैं जब कोई रोग उन्हें घेर लेता है। आज आवश्यकता इस बात की है कि हम अस्पतालों में निर्धारित समस्त स्वास्थ्य मानकों का अनिवार्य रूप से पालन करे ताकि रोगी और देखभाल करने वाले सदस्य और कार्मिकों को कोई परेशानी न हो साथ ही विभिन्न संक्रामक बीमारियों से खुद को बचा सके।

रोगी सुरक्षा है सर्वोपरि
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