जयपुर। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने शुक्रवार को स्वास्थ्य भवन में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं, मातृ मृत्यु के कारणों एवं संबंधित मामलों की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही बरतने के मामले में सख्त एक्शन लेने के निर्देश दिए हैं। प्रमुख शासन सचिव ने कहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर विभाग द्वारा संवेदनशीलता के साथ विशेष गंभीरता बरती जा रही है। उन्होंने बताया कि अलवर के नंगला रायसिस स्थित एक निजी अस्पताल ‘निशु हॉस्पिटल’ में अनाधिकृत व्यक्ति द्वारा प्रसूता की डिलीवरी कराने के मामले में सख्त एक्शन लिया गया है। इस मामले में उन्होंने निजी निशु हॉस्पिटल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। क्लीनिकल एस्टेबिलिशमेंट एक्ट के प्रावधानों के अनुसार अनियमितिता पाए जाने पर लाईसेंस निरस्त करते हुए समस्त गतिविधियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गयी है। साथ ही अस्पताल संचालक डॉ. भुवनेश कुमार शर्मा के खिलाफ मेडिकल कॉउंसिल ऑफ इन्डिया तथा नर्सिंगकर्मी ऱफीकन बानो के खिलाफ कार्रवाई के लिए नर्सिंग काउंसिल को पत्र लिख दिया गया है। गौरतलब है कि गत 4 अगस्त को चिकित्सक की अनुपस्थिति में डिलेवरी नर्सिंग कार्मिक द्वारा अनाधिकृत रूप से डिलेवरी करवाने के बाद प्रसूता अंजुम (पिंकी) पत्नी साहिल खान की मृत्यु हो गई थी। उन्होंने बताया कि इस तरह का मामला संज्ञान में आते ही सख्त एक्शन लिया गया है। राठौड़ ने समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि फील्ड स्तर पर जांची जाने वाली सभी गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच के सही एवं अपडेट आंकड़े तैयार कर समयबद्ध रूप से अपलोड किए जाएं। उन्होंने मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग एवं उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की समय पर पहचान के लिए आंकड़ों की स्थानीय स्तर पर गंभीरता से मॉनिटरिंग करते हुए सभी को सेवाएं सुलभ कराने के निर्देश दिए हैं। प्रमुख शासन सचिव ने कहा कि संयुक्त निदेशक, पीएमओ, सीएमएचओ, मेडिकल कॉलेज चिकित्सालयों के अधिकारी एवं विशेषज्ञ एचआरपी मामलों में विशेष गंभीरता एवं संवेदनशीलता के साथ कार्य करें। उन्होंने अजमेर संभाग में एचआरपी मामलों से संबंधित कार्यों में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित संभागीय संयुक्त निदेशक को नोटिस जारी करने के भी निर्देश दिए हैं। उन्होंने चिकित्सालयों में उपलब्ध सरप्लस, अनुपयोगी अथवा मरम्मत योग्य बायो मेडिकल उपकरणों की जानकारी ई-उपकरण सॉफ्टवेयर पर अपडेट करने के निर्देश दिए ताकि उपलब्ध उपकरणों का समुचित उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि मरम्मत योग्य उपकरणों को संबंधित मेंटेनेंस फर्म के माध्यम से समय पर रिपेयर करवाकर पुनः उपयोग में लिया जाए जिससे इन उपकरणों की सेवाओं का लाभ मरीजों को मिल सके। गायत्री राठौड़ ने स्वास्थ्य विभाग के मरम्मत योग्य भवनों एवं भवन परिसरों की स्थिति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिला कलेक्टर के सहयोग से ऐसे भवनों एवं परिसरों की पहचान की जाए, जहां आवश्यक मरम्मत एवं सुधारात्मक कार्यवाही की जरूरत है। उन्होंने भवनों की स्थिति के अनुसार प्राथमिकता निर्धारित कर आवश्यक कार्रवाई करने पर जोर दिया। उन्होंने विशेष रूप से अनुपयोगी एवं दुर्घटना संभावित भवनों/स्थलों पर आमजन का प्रवेश रोकने तथा आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना की संभावना को रोका जा सके। बैठक में प्रबंध निदेशक, आरएमएससीएल पुखराज सैन, अतिरिक्त मिशन निदेशक, एनएचएम डॉ. टी. शुभमंगला, कार्यवाहक निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. नरोत्तम शर्मा, निदेशक आरसीएच डॉ. मधु रतेश्वर, निदेशक एड्स डॉ. सुशील परमार सहित संबंधित अधिकारीगण उपस्थित रहे।

वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा बैठक: अलवर के निशु हॉस्पिटल में अनाधिकृत व्यक्ति द्वारा प्रसूता की डिलीवरी कराने के मामले में लिया सख्त एक्शन, अस्पताल किया सील
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