सिंधु तट पर जुटा लघु भारत— सिंधु कुंभ बना राष्ट्रीय एकता का विराट मंच वेद और उपनिषदों की रचना से जुड़े है सिंधु तट – विधानसभा अध्यक्ष

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जयपुर। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने लेह-लद्दाख में आयोजित प्रथम सिंधु कुंभ के अंतर्गत पवित्र सिंधु घाट पर मां सिंधु नदी एवं भगवान झूलेलाल की पूजा-अर्चना कर देश, प्रदेश एवं समाज की सुख-समृद्धि, शांति तथा प्रगति की कामना की है। इस प्रथम सिंधु कुंभ में देशभर के लगभग 20 राज्यों से 3500 से अधिक आए श्रद्धालुओं की सहभागिता से ऐसा लगा कि मानो सिंधु नदी के तट पर लघु भारत के दर्शन हो रहे हैं। राजस्थान से भी लगभग 500 से अधिक श्रद्धालु इस आयोजन में शामिल होने लेह-लद्दाख पहुँचे है। विभिन्न भाषाओं, परंपराओं और संस्कृतियों के लोग यहां एक सूत्र में बंधे दिखाई दे रहे हैं, जो भारत की सांस्कृतिक एकता का अनूठा उदाहरण है।
सिंधु कुंभ बना लघु भारत: बुधवार को सिंधु नदी के तट पर हुए प्रथम सिंधु कुंभ में देशभर से जुटे हजारों लोग लघु भारत का प्रतिबिंब लग रहे थे। देशभर से लगभग साढ़े तीन हजार श्रद्धालु, संत-महात्मा, सामाजिक प्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक शामिल हुए हैं। आयोजन में जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर, अनेक संत-महात्मा, राजस्‍थान विधान सभा के अध्‍यक्ष वासुदेव देवनानी, सिंधु कुंभ से जुडे इन्द्रेश कुमार, हिमाचल प्रदेश के राज्‍यपाल कविंदर गुप्‍ता और त्रिपुरा विधान सभा अध्‍यक्ष रामपादा जमातिया सहित विभिन्न क्षेत्रों के अनेक विशिष्टजन उपस्थित रहे। उनकी सहभागिता ने आयोजन की गरिमा और महत्व को बढ़ा दिया। सिंधु नदी आध्‍यात्‍म का बन रहा है पांचवां धाम – इस अवसर पर देवनानी ने कहा कि सिंधु नदी एक जलधारा ही नहीं है। यह भारतीय सभ्यता, संस्कृति और राष्ट्रीय अस्मिता की अमर प्रतीक है। यहां के तटों पर वेदों, उपनिषदों की रचना हुई है। भगवान झूलेलाल का अवतरन भी इसी पवित्र नदी के पावन तट पर हुआ। भारतीय ज्ञान परंपरा के विकास में भी सिंधु क्षेत्र का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। सिंधु के पावन तट पर श्रद्धा, संस्कृति और राष्ट्रीय एकता का जो अद्भुत संगम दिखाई देता है, वह भारत की सनातन परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के सशक्त परिचायक के साथ पांचवां धाम का स्‍वरूप बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि भगवान झूलेलाल ने मानवता को प्रेम, सद्भाव, सेवा, जल संरक्षण और लोककल्याण का संदेश दिया। सिंधु तट पर उनकी पूजा भारतीय संस्कृति, आस्था और सामाजिक समरसता की पहचान है। पर्यावरण, जल संरक्षण के साथ स्‍वच्‍छता व नशा मुक्ति का दिलाया संकल्‍प – देवनानी ने कहा कि सिंधु कुंभ के दौरान श्रद्धालुओं को पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, स्वच्छता तथा नशामुक्त समाज के निर्माण का संकल्प दिलाया गया। इन संकल्पों को प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाना चाहिए। देवनानी ने कहा कि सिंधु कुंभ केवल एक आध्‍यात्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक एकता, राष्ट्रीय गौरव, आध्यात्मिक परंपरा और अखंड राष्ट्रभाव का विराट उत्सव है। यह आयोजन देशवासियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने तथा राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है। विगत कुछ वर्षों में सिंधु नदी के तटों का हुआ अभूतपूर्व विकास – स्‍पीकर देवनानी ने कहा कि सिंधु नदी के तटों का विगत कुछ वर्षों में अभूतपूर्व विकास हुआ है। इन तटों पर लोगों की रूचि बढती जा रही है। यह तट जन आकांक्षाओं के अनुरूप आध्‍यात्‍म के पावन स्‍थल बन गये है। देवनानी ने आव्‍हान किया कि लोगों को इस पवित्र धाम के दर्शन अवश्‍य करने चाहिए।

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