बाल मुकुन्द ओझा
अंतर्राष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस प्रत्येक वर्ष 26 जून को मनाया जाता है। नशीली वस्तुओं और पदार्थों के निवारण हेतु संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 26 जून को अंतर्राष्ट्रीय नशा व मादक पदार्थ निषेध दिवस मानाने का निर्णय लिया था। इस अवसर पर मादक पदार्थों के उत्पादन, तस्करी एवं सेवन के दुष्परिणामों से लोगों को अवगत कराया जाता है। जहाँ तक देश में प्रचलित नशे की बात है इनमें शराब सबसे ज़्यादा सेवन किए जाने वाला नशा है, जो मस्तिष्क के कार्यों, विचारों, भाव और व्यवहार पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव डालती है। एक अनुमान के मुताबिक लगभग 16 करोड़ लोग शराब का सेवन करते हैं। इनमें से 5.7 करोड़ से ज़्यादा लोग गंभीर रूप से प्रभावित हैं। भांग उन पदार्थों में दूसरे स्थान पर है। लगभग 3.1 करोड़ लोग भांग से बने उत्पादों का सेवन करते हैं, जिनमें से लगभग 25 लाख लोग उसकी गंभीर लत से पीड़ित हैं। अफीम से बने नशीले पदार्थ भी उन सबसे हानिकारक पदार्थों में से हैं, जिनका उपयोग लगभग 2.26 करोड़ लोग करते हैं। उनमें से लगभग 77 लाख लोगों को तत्काल उनसे बचाने और सहायता की आवश्यकता होती है। एक अनुमान के अनुसार, 8.5 लाख लोग नसों में इंजेक्शन के माध्यम से नशीली दवाएं लेते हैं।
देशभर में प्रतिदिन लाखों करोड़ों की ड्रग्स पकड़ी जा रही है मगर बजाय थमने के यह कारोबार लगातार बढ़ता ही जा रहा है। सरकार की सख्ती के बावजूद नशे के तस्कर अपनी कारगुजारियों से बाज़ नहीं आ रहे है क्योंकि इस धंधे में उन्हें अंधी कमाई हो रही है। नशीले पदार्थों की बड़ी खेप पकड़े जाने से एक ओर जहां यह स्पष्ट होता है कि भारतीय एजेंसियां नशे के कारोबारियों के खिलाफ सजग और सक्रिय हैं, वहीं दूसरी ओर यह भी रेखांकित होता है कि ड्रग्स के सौदागर भारत को मादक पदार्थ खपाने का जरिया बना रहे हैं या फिर उसे यहां लाकर अन्यत्र भेजना आसान पा रहे हैं। नशा समाज की रगों में प्रवेश कर चुका है, जिसके व्यापक नेटवर्क को आम लोगों के सहयोग से ध्वस्त किया जासकता है। नशा एक ऐसी बुराई है ,जिसमे मानव का जीवन समय से पहले ही अंधकार और मौत की राह पर चला जाता है। नशाखोरी क्या है? एक खतरनाक बीमारी जिसके क्षणिक सुख के चलते इंसान अपनी जिंदगी से हाथ धो बैठता है। यह केवल एक बीमारी नहीं है बल्कि यह अनेक रोगों की जननी भी है। नशा मनुष्य को अपराध की ओर ले जाता है जो शांतिपूर्ण समाज के लिए अभिशाप का जहर है। दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी वाला देश भारत है। युवा नशे के मकड़जाल में फंसकर बर्बादी के कगार पर पहुंच रहे हैं। इससे उनकी सेहत तो खराब हो ही रही है साथ ही उनका सामाजिक स्तर भी गिरता जा रहा है।
नशे के रूप में लोग शराब, गाँजा, जर्दा ,ब्राउन.शुगर, कोकीन ,स्मैक आदि मादक पदार्थों का प्रयोग करते हैं ,जो स्वास्थ्य के साथ सामाजिक और आर्थिक दोनों लिहाज से ठीक नहीं हैं। नशे का आदी व्यक्ति समाज की दृष्टी से हेय हो जाता हैं, और उसकी सामाजिक क्रियाशीलता जीरो हो जाती हैं ,फिर भी वह व्यसन को नहीं छोड़ता हैं। धूम्रपान से फेफड़े में कैंसर होता हैं, वहीँ कोकीन ,चरस ,अफीम लोगों में उत्तेजना बढ़ाने का काम करती हैं, जिससे समाज में अपराध और गैरकानूनी हरकतों को बढ़ावा मिलता हैं। इन नशीली वस्तुओं के उपयोग से व्यक्ति पागल और सुप्तावस्था में चला जाता हैं। तम्बाकू के सेवन से तपेदिक ,निमोनिया ,साँस की बीमारियों का सामना करना पड़ता हैं। इसके सेवन से जन और धन दोनों की हानि होती हैं।
आजादी के बाद देश में शराब की खपत 60 से 80 गुना अधिक बढ़ी है। यह भी सच है कि शराब की बिक्री से सरकार को एक बड़े राजस्व की प्राप्ति होती है। मगर इस प्रकार की आय से हमारा सामाजिक ढांचा क्षत-विक्षत हो रहा है और परिवार के परिवार खत्म होते जा रहे हैं। हम विनाश की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। देश में शराब बंदी के लिए कई बार आंदोलन हुआ, मगर सामाजिक, राजनीतिक चेतना के अभाव में इसे सफलता नहीं मिली। सरकार को राजस्व प्राप्ति का यह मोह त्यागना होगा तभी समाज और देश मजबूत होगा और हम इस आसुरी प्रवृत्ति के सेवन से दूर होंगे।
भारतीय प्रबंधन संस्थान रोहतक की तरफ से कराए गए एक सर्वे में पता चला है कि मादक पदार्थो का लगभग 84 प्रतिशत हिस्सा पाकिस्तान की तरफ से आता है। पाकिस्तान की सीमा से सटे राजस्थान और पंजाब के साथ ही मुंबई उसका सबसे पहला लक्ष्य होता है। नशे के अवैध कारोबार को रोकने के लिए जरूरी है की सरकार के साथ समाज जागरूक हो। यह अनेक सामाजिक, शारीरिक और आर्थिक बुराइयों और बीमारियों की जड़ है। इससे दूर रहना समाज और देश के हित में है। इसके लिए सामूहिक प्रयासों की जरुरत है। हमारा समाज तभी स्वस्थ होगा जब हम इन बुराइयों से अपने को दूर कर लेंगे। जब तक आप खुद नहीं चाहेंगे, कोई और आपका नशा नहीं छुड़ा पाएगा। सबसे पहले मन में ठान लें कि आप नशा छोड़ना चाहते हैं। फिर जो भी नशा कर रहे है उसकी तरफ देखे नहीं। अपने शरीर पर हो रहे शारीरिक नुक्सान का अनुमान करे। अपने परिवार और बच्चों के भविष्य को देखें। मन कड़ा करें और नशे को छोड़ दे।

नशाखोरी केवल एक बीमारी नहीं है अपितु हज़ार रोगों की जननी भी है
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