आजकल किसी भी नगर, शहर या छोटे गांवों तक में चले जाएं पूरा इलाका फ्लेक्स होर्डिंगों, बैनरों, पंपलेटों, पोस्टरों से अटा पड़ा है। आजकल फ्लेक्स होर्डिंग्स बैनर का काफी चलन बढ़ चुका है। चुनाव हो या धार्मिक आयोजन या किसी भी प्रकार का विज्ञापन फ्लेक्स होर्डिंग्स, बैनर के व्यापक उपयोग के कारण हर गांव-शहर में अस्त व्यस्तता पैदा कर दी है। आमतौर पर फ्लेक्स बैनर लगाने के लिए स्थानीय प्रशासन द्वारा पूर्व अनुमति लेने की आवश्यकता होती है पर प्रायः सभी जगहों पर नियमों का घोर उल्लंघन देखने को मिलता है जिसके चलते अंधाधुंध फ्लेक्स, होर्डिंग्स, बैनर लगे मिलते हैं।
पहले कोई बहुत बड़े आयोजन होते थे तभी बैनर बनता था पर आजकल तो हर छोटे से छोटे कार्यक्रम के विज्ञापन के लिए भी कई-कई संख्या में बैनर बनाए जाते हैं। किसी बड़े नेता के जन्म दिवस पर, किसी बड़े नेता के क्षेत्र में आगमन पर स्वागत के लिए, नववर्ष, त्यौंहार और पर्वों की बधाई और शुभकामनाएं देने के लिए, धार्मिक आयोजनों का प्रचार-प्रसार करने के लिए, सत्रारंभ और परिक्षा परिणाम के समय निजी शिक्षण संस्थानों द्वारा प्रचार करने, चुनाव प्रचार करने, व्यावसायिक उत्पादों का प्रमोशन प्रचार करने आदि के लिए बड़े-बड़े होर्डिंग्स, बैनर, पंपलेट, पोस्टर सार्वजनिक संपत्तियों, ऐतिहासिक विरासत की इमारतों धरोहरों, शहीद स्मारकों, पार्क, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, मेट्रो स्टेशन, स्कूल-कॉलेज, खंभों, पुलों, द दीवारों, दिशात्मक संकेत बोर्ड, साइन बोर्ड, शहरों की दूरी बताने वाले माइलस्टोन, सर्किल आदि पर लगाए और चिपकाए जाते हैं जो न केवल शहर की सुंदरता को बिगाड़ना वाले होते हैं, बल्कि कानून का उल्लंघन भी है। कई-कई जगह तो चुनाव संपन्न होने, आयोजन संपन्न होने के बाद भी फटे पुराने बैनर लगे रहते हैं। उससे गांव शहर का सौंदर्य भी बहुत बूरी तरह प्रभावित होता है।
इस प्रकार पोस्टर पंपलेट लगाने से न केवल शहर की सुंदरता प्रभावित होती है, बल्कि स्वच्छ पर्यावरण के अधिकारों को भी प्रभावित किया जाता है जो स्वस्थ जीवन का एक अभिन्न पहलू है। बैनर का नाम आते ही मुझे याद आता है कभी कभार खास अवसर पर कपड़े का बैनर बनाया जाता था, वह भी सीमित संख्या में मात्र एक या दो, पर आजकल कपड़े के बैनर का चलन काफी कम हो गया है। पहले स्वागत अभिनंदन का एक ही बैनर बनाकर रखते थे और उसे भी संभाल कर बड़े जतन से रखा जाता था ताकि आगे भी काम आ सके। आजकल लोग कपड़े के बैनर जो पर्यावरण के लिए कम खतरनाक होते हैं का इस्तेमाल बहुत कम करते हैं। चूंकि फ्लेक्स बोर्ड प्लास्टिक सामग्री से बनते है इसलिए पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना उनका सुरक्षित रूप से निपटान करना भी संभव नहीं है। फ्लेक्स बोर्डों ने न केवल गांव शहर को खराब किया है बल्कि पर्यावरणीय खतरे भी पैदा किए हैं क्योंकि ये पीवीसी सहित गैर बायो ग्रेडेबल सामग्री से बने होते हैं। बैनर बनवाना एक सामान्य सी बात है पर एक गंभीर बुराई है जो हमारे जीवन में अहम हिस्सा सा बनता जा रहा है। जबकि हम इसे चाहें तो छोड़ सकते हैं। आमतौर पर फ्लेक्स जिसे (पॉली विनाइल क्लोराइड) कहते हैं, प्लास्टिक के समान ही सामग्री से बने होते हैं ऐसे में प्लास्टिक की तरह फ्लेक्स भी पर्यावरण के लिए हानिकारक है क्योंकि यह बायोडिग्रेडेबल नहीं है। वर्तमान में प्लास्टिक की कैरी बैग, थैलियां आदि पर पूर्णतः बैन लगाने की आवाज उठ रही है। प्लास्टिक की कैरी बैग, थैलियों, प्लास्टिक के गिलास, प्लेट, बोतल के साथ साथ पॉली विनाइल क्लोरीन (पीवीसी) और क्लोरीन युक्त प्लास्टिक यानी पीवीसी के बैनर, फ्लेक्स, होर्डिंग्स आदि पूर्णतः प्रतिबंधित कर दिए जाते हैं, उन पर बैन लग जाता है तो पर्यावरण प्रदूषण की समस्या से काफी हद तक निजात मिल सकती है। अनुपयोगी फ्लेक्स बैनर रद्दी के भाव भी नहीं बिकते। कपड़े का बैनर होता तो पर्यावरण की दृष्टि से सुरक्षित होता पर ये प्लास्टिक के बैनर पर्यावरण को प्रदूषित कर रहे हैं। कबाड़ के रूप में पहाड़ बढ़ रहा है। साथ ही इन बैनरों का एक सबसे बड़ा दुरुपयोग, दोष उस पर छपी हमारे आराध्य की, भगवान की, हमारे गुरु की फोटो का भी अपमान होता है। कभी लोगों के पैरों में आते हैं तो कभी कूड़े के ढेर पर फैंक दिए जाते हैं। फ्लेक्स होर्डिंग्स और बैनरों के अनावश्यक और अंधाधुंध उपयोग के कारण देश में प्लास्टिक के कचरे का बेवजह बोझा बढ़ रहा है और अब यह प्लास्टिक हमारे जी का जंजाल बनता जा रहा है। असल में कचरे को बढ़ाने का काम हमने ही किया है। दिखावा, प्रचार के नाम पर हम बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण को भूल गए। मानव जाती तो क्या समस्त जीव जगत पर बढ़ रहे संकट को नहीं समझ रहे। यह हम सब के लिए गहन चिंतन का विषय है।
सड़क पर बीच चौराहों, सर्किल पर लगे होर्डिंग हादसों का कारण बन सकते हैं। यातायात में बाधा एवं ट्रैफिक एग्जाम की समस्या हो सकती है, दिशात्मक संदेश बोर्ड पर बैनर लगाने से लोगों को दूरी का पता नहीं चल पाता एवं दिशा भ्रम की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है, आमजन को सड़कों पर चलने में परेशानी हो सकती है, गांव शहर की सुंदरता में कमी आती है, वृक्षों और इमारत को भी नुकसान पहुंच सकता है, हवा एवं विद्युत संचालन में बाधा और आगजनी की समस्या हो सकती है, यदि चलते वाहन के ड्राइवर का ध्यान उस पर जाता है तो हादसा होने की संभावना बढ़ सकती है। आंधी तूफान के समय उड़कर चलते वाहनों पर गिर सकते हैं या उनसे टकरा सकते हैं। ऐसा ही एक हादसा 13 मई 2024 को मुंबई में हुआ जहां बारिश एवं आंधी के दौरान एक पेट्रोल पंप पर लगे 120 फीट लंबे होर्डिंग के गिरने से कई लोगों की मृत्यु हो गई थी और कई गंभीर घायल हो गए थे।
राजस्थान सहित विभिन्न राज्यों में संपत्ति विरूपण निवारण अधिनियम, 2006 प्रभावशील है। राज्यों में स्थानीय विज्ञापन कानून और नगर पालिका अधिनियम बने हुए हैं जो बिना अनुमति के दीवारों पर पेंटिंग बनाने, अन्य प्रकार से लिखावट लिखने, अन्य रूप से कुछ अंकित करने, पोस्टर और बैनर लगाकर सार्वजनिक संपत्ति के बचाव को रोकते हैं और दंडित करते हैं। नियम तो यह है कि विज्ञापन के लिए केवल निर्धारित स्थानों और अनुमोदित माध्यमों का ही उपयोग करना चाहिए और अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो 6 महीने तक की कैद, 1000 रुपये तक का जुर्माना अथवा दोनों हो सकते हैं, मगर जिम्मेदारों की शिथिलता के कारण किसी को कोई डर भय नहीं है। कई नगर पालिकाएं अधिनियम के उक्त प्रावधानों के होते हुए भी संपत्तियों के निरूपण के मामलों में अपने कर्तव्य का पालन ठीक प्रकार से नहीं कर रही हैं। भारत के किसी भी राज्य के शहरों में विज्ञापन होर्डिंग लगाने के लिए सरकार नगर निकाय के जवाबदेही तय करती है। होर्डिंग लगाने की अनुमति संबंधी प्रक्रिया का उल्लेख नगर पालिका अधिनियम के अंतर्गत लागू किए गए नियमों एवं उप नियमों में किया जाता है। इन नियमों में होर्डिंग के किराए, आकार एवं होर्डिंग लगाने की अनुमति संबंधी शर्तें तय की गई हैं। इसके अतिरिक्त शहरों में भी स्थान विशेष के आधार पर होर्डिंग लगाने के अलग-अलग नियम है जैसे सड़क, हाईवे, शॉपिंग मॉल आदि, साथ ही निजी संपत्ति पर भी होर्डिंग लगाने के लिए नियमों का अनुपालन आवश्यक है। सार्वजनिक संपत्ति, ऐतिहासिक विरासत वाली धरोहर, दिशात्मक संकेतों, सर्किल आदि को किसी भी तरह से विरूपित करना पूर्णतया प्रतिबंधित है और जहां निर्धारित स्थान है वहां भी बिना पूर्व अनुमति के कोई भी पोस्टर, बैनर या होर्डिंग लगाना गैर कानूनी माना जाता है। यहां तक की निजी संपत्तियों, वाहनों पर भी बिना मंजूरी के विज्ञापन नहीं किया जा सकता।



