मोदी सरकार ने आम आदमी से चीनी की मिठास तक छीन ली, चीनी आयात करने की स्थिति बनीः टीकाराम जूली

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जयपुर। राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भाजपा पर करारा हमला बोलते हुए कहा कि सत्ता में बैठे हुक्मरानों को लोकतंत्र में सवाल पूछने वाले नागरिक बिल्कुल पसंद नहीं हैं। जूली ने कहा कि जो स्थान भावी पीढ़ी में सवाल पूछने की क्षमता और चेतना विकसित करता है यानी हमारे विद्यालय, भाजपा सरकार जानबूझकर उसी शिक्षा व्यवस्था के प्रति घोर उदासीनता बरत रही है। अपनी नाकामियों पर जवाब देने के बजाय सरकार प्रश्न उठाने वालों को दिमागी नक्सल कहकर उनका दमन करने में जुटी है, ताकि उसे जनता के कटघरे वाले सवालों का उत्तर न देना पड़े। जूली ने आगे कहाकि आज देश का युवा अपने अधिकारों को लेकर पूरी तरह जागरूक है और मोदी सरकार को युवाओं की यही मुखरता और वैचारिक चेतना रास नहीं आ रही है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी छात्रों की गूँज के जरिए लगातार उनके हक की आवाज बुलंद कर रहे हैं। राहुल गांधी और युवाओं के इस मजबूत गठबंधन ने भाजपा के शासकों की नींद उड़ा दी है। वहीं चीनी के दामों में लगातार हो रही वृद्धि पर जूली ने भाजपा पर निशाना साधा है और कहा मोदी सरकार की अकुशल नीतियों के कारण चीनी के दाम लगातार बढ़ते जा रहे हैं और पिछले एक पखवाड़े में इसके दामों में तकरीबन 20 रुपए प्रति किलों का इज़ाफ़ा हुआ है। यह तेजी उस समय आई है जब रक्षाबंधन और जन्माष्टमी जैसे त्यौहार आ रहे हैं जिससे लोगों पर महंगाई का और बोझ पड़ गया है। जूली ने कहा कि देश को आत्मनिर्भर बनाने के खोखले जुमले देने वाली भाजपा के राज में चीनी आयात करने की नौबत आ गई है। सवाल पूछोगे तो पेलेट गन और लाठियां मिलेंगीः टीकाराम जूली ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि इस सरकार की कार्यशैली साफ दर्शाती है कि अगर लोकतंत्र में कोई सवाल पूछेगा तो उसे जवाब देने के बजाय पीटा जाएगा या फिर उस पर पेलेट गन चलाई जाएगी। उन्होंने पौराणिक संदर्भ देते हुए कहा, “यदि महाभारत के युद्ध में अर्जुन ने भगवान श्रीकृष्ण से सवाल नहीं पूछे होते, तो आज मानव जाति को श्रीमद्भगवद्गीता जैसा महान ज्ञान कैसे मिलता?” सवाल पूछना हमारी परंपरा और लोकतंत्र की आत्मा है, लेकिन भाजपा इसे अपराध मानती है। देश में 10 सालों में 94 हजार सरकारी स्कूल बंदः नेता प्रतिपक्ष ने नीति आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए सरकारी शिक्षा व्यवस्था की बदहाली को उजागर किया। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट के अनुसार पिछले 10 सालों में देशभर में करीब 94,000 सरकारी स्कूल बंद हो चुके हैं। साल 2014-15 में देश में जहां 11.07 लाख सरकारी स्कूल संचालित थे, वहीं 2024-25 में यह संख्या घटकर मात्र 10.13 लाख रह गई है। इतना ही नहीं, स्कूलों की तालाबंदी के साथ-साथ पिछले दशक में स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों की कुल संख्या भी चिंताजनक रूप से कम हुई है, जहां 2014-15 में कुल नामांकन 26.95 करोड़ था, वह 2024-25 में घटकर 24.69 करोड़ ही रह गया है। राजस्थान के बजट में सिर्फ नाममात्र का प्रावधानः जूली ने राजस्थान के हालात पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि सरकारी स्कूलों की जर्जर इमारतों में के लिए 20 हजार करोड़ रुपए की जरूरत के बावजूद बजट में नाम मात्र का प्रावधान करने पर उच्च न्यायालय ने इसी वर्ष फरवरी में नाराजगी जताई थी। पेड़ और टीन शेड के नीचे पढ़ने को मजबूर बच्चेः उन्होंने कहा कि राज्य में शिक्षा व्यवस्था का इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या हो सकता है कि खुद शिक्षा मंत्री के गृह जिले कोटा में सरकारी विद्यालयों की स्थिति अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है। वहां नौनिहाल बच्चे बुनियादी सुविधाओं के अभाव में पेड़ की छांव और तपते टीन शेड के नीचे बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। सवालों के डर से एक ही दिन में असेंबली से भाग गई सरकारः जूली ने तंज कसते हुए कहा कि यह सरकार विपक्ष और जनता के जायज प्रश्नों का उत्तर देने में पूरी तरह असमर्थ है। जब विधानसभा में विपक्ष ने इन गंभीर मुद्दों पर सरकार को घेरना चाहा, तो सरकार जवाब देने के बजाय महज एक ही दिन में असेंबली से भाग खड़ी हुई। जो सरकार सवालों का सामना नहीं कर सकती, वह जनता का भला कभी नहीं कर सकती।

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