एग्जिट पोल का तिलिस्म : बंगाल में हाई वोल्टेज ड्रामा

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बाल मुकुन्द ओझा
इलेक्ट्रॉनिक मीडिया आजकल चुनाव में बड़ी भूमिका निभाने लगे है। चुनावी सर्वे करने वाली विभिन्न संस्थाओं से मिलकर किये जाने वाले सर्वेक्षणों में मतदाताओं का मूड जानने का प्रयास कर सटीक आकलन किया जाता है। कई बार ये सर्वे वास्तविकता के नजदीक होते है तो कई बार फैल भी हो जाते है। एग्जिट पोल को भी हम चुनावी सर्वे कह सकते है। यह मतदान के दिन किया जाता है। इसमें मतदान करके बाहर निकले मतदाताओं से पूछा जाता है कि उन्होंने किस पार्टी या प्रत्याशी को वोट दिया है। इससे मिले आंकड़ों का विश्लेषण किया जाता है, जिससे यह अनुमान लग जाता है कि चुनाव के नतीजे क्या होंगे। एग्जिट पोल एक तरह का तिलिस्म है। जिस पार्टी के पक्ष में जाता है वह इसे सही ठहराता है और जिसके विपक्ष में जाता है वह इसे गलत बताते देर नहीं करता। कई बार एग्जिट पोल सही निकले है। हालांकि अनेक बार एग्जिट पोल का यह तिलिस्म औंधे मुंह भी गिरा है।
प.बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी विधानसभा चुनाव का मतदान बुधवार शाम को 6 बजे संपन्न होते ही खबरिया चैनलों में एग्जिट पोल की होड़ लग गई। वोटिंग पूरी होने के कुछ ही समय बाद नतीजों को लेकर विभिन्न एजेंसियों, मीडिया संस्थानों के पूर्वानुमान, यानी एग्जिट पोल सामने आ गए। महाएग्जिट पोल में बंगाल, असम और पुडुचेरी में भाजपा की बम्पर जीत का दावा किया गया है। वहीं तमिलनाडु में डीएमके और केरल में कांग्रेस नीत यूडीएफ की जीत का अनुमान लगाया गया है। बंगाल में अधिकतर सर्वे भाजपा की जीत की बात कह रहे है तो कुछ सर्वे तृणमूल कांग्रेस की जीत की भविष्यवाणी कर रहे है। दूसरी तरफ सट्टा बाजार ने बंगाल, असम और पुडुचेरी में भाजपा सरकार, केरल में कांग्रेस और तमिलनाडु में डीएमके की सरकार बनने की भविष्यवाणी करदी है। भाजपा खेमे में एग्जिट पोल देखकर उत्साह का माहौल है। सियासी पार्टियां अपने अपने हिसाब से एग्जिट पोल को सही अथवा गलत बता रहे है। हालांकि एग्जिट पोल का रिजल्ट से कोई लेना-देना नहीं है। कई बार एग्जिट पोल और चुनावी नतीजे में बड़े अंतर देखने को मिल जाता है। पांचों विधानसभा चुनावों के लिए मतगणना 4 मई को होगी। तब यह साफ हो जाएगा कि एग्जिट पोल कितने सही हैं और कितने गलत। सबसे ज्यादा बंगाल के चुनाव को लेकर सरगर्मियां अपने उफान पर है। ममता बनर्जी और उनकी पार्टी स्ट्रांग रूम के बाहर धरना और आंदोलन कर रही है। उनका आरोप है भाजपा गड़बड़ कर रही है। वहीं भाजपा और चुनाव आयोग बैलेट बॉक्स में छेड़छाड़ के आरोपों को गलत बताया है। अभी भी वहां हाई वोल्टेज ड्रामा चल रहा है।
यह देखा गया है टीवी चैनल टीआरपी के चक्कर में अपनी लोकप्रियता दांव पर लगा देते है। यदि एग्जिट पोल सही जाता है तो बल्ले बल्ले अन्यथा साख पर विपरीत असर देखने को मिलता है। चुनाव के पहले और मतदान के बाद कई एजेंसियां सर्वेक्षण कराती हैं और संभावित जीत- हार के अनुमान पेश करती हैं। कई बार इन सर्वेक्षणों के नतीजे चुनावी नतीजों के करीब बैठते हैं तो कई बार औंधे मुंह गिर जाते हैं । मतदाताओं का मूड भांपने का दावा करने वाले ऐसे सर्वेक्षणों में कई बार लोगों और राजनीतिक दलों की दिलचस्पी दिखाई देती है। कोई दावा नहीं कर सकता कि हमारे देश में चुनाव पूर्व सर्वेक्षण तरह विश्वसनीय होते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित प्रदेश के मुख्यमंत्रियों ने सभी विधानसभा क्षेत्र की जनता के बीच पहुंचने का प्रयास किया। एक बात निर्विवाद रूप से कही जा सकती है की देशभर में सर्वाधिक चर्चित बंगाल चुनाव में भाजपा की जीत होती है तो इसका समूचा श्रेय प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को दिया जा सकता है। मोदी और शाह ने बंगाल में धुंवाधार प्रचार कर भाजपा के पक्ष में जबर्दत हवा खड़ी कर दी थी ।
बाल मुकुंद ओझा

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