-सुनील कुमार महला
हाल ही में हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के मंच से तह साफ शब्दों में कहा है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में किसी भी तरह का दोहरा रवैया नहीं होना चाहिए। यदि कोई देश आतंकवाद की निंदा करता है, लेकिन दूसरी ओर आतंकियों को आर्थिक मदद, प्रशिक्षण, हथियार, विचारधारा या सुरक्षित ठिकाने देता है, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। प्रधानमंत्री का कहना है कि आतंकवाद केवल बंदूक उठाने वाले आतंकियों से नहीं चलता। इसके पीछे पैसा देने वाले लोग, आतंकियों की भर्ती करने वाले, कट्टरपंथ फैलाने वाली विचारधारा और उन्हें पनाह देने वाले नेटवर्क भी होते हैं। इसलिए आतंकवाद को खत्म करने के लिए उसके पूरे तंत्र को समाप्त करना जरूरी है। वास्तव में, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की यह बात इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि एससीओ के मंच पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी मौजूद थे। पाठक जानते हैं कि हमारा देश एक लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद का सामना करता रहा है। इसलिए प्रधानमंत्री का बिना किसी देश का नाम लिए यह कहना कि आतंकवाद को समर्थन देने वालों को भी जवाबदेह बनाया जाना चाहिए, एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संदेश है। अंत में यही कहूंगा कि आतंकवाद को खत्म करना केवल सैन्य कार्रवाई से संभव नहीं है। इसके लिए सुरक्षा, खुफिया तंत्र, कूटनीति, आर्थिक कार्रवाई और सामाजिक एकजुटता इन सभी मोर्चों पर हम सभी को मिलकर एक साथ काम करना होगा। वास्तव में, एससीओ के देशों को मिलकर आतंकवाद की फंडिंग रोकनी होगी, आतंकियों के नेटवर्क को तोड़ना होगा और आतंकवाद को संरक्षण देने वालों के खिलाफ ठोस कदम उठाने होंगे। सरल शब्दों में कहें तो आतंकवाद को खत्म करना है तो केवल आतंकियों के खिलाफ नहीं, बल्कि उन्हें पैसा, पनाह, समर्थन और विचारधारा देने वाले पूरे तंत्र के खिलाफ एक समान और सख्त कार्रवाई करनी होगी।

सुरक्षा, एकजुटता और संकल्प से खत्म होगा आतंकवाद
ram


