स्पीकर डॉ. देवनानी ने राजस्‍थान इलेक्ट्रोपैथी चिकित्‍सा पद्धति बोर्ड के कार्यालय का किया उद्घाटन इलेक्‍ट्रोपैथी को आम जन तक पहुँचाएं – डॉ. देवनानी

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जयपुर। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. वासुदेव देवनानी ने कहा है कि इलेक्ट्रोपैथी, प्रकृति से जुडी चिकित्सा पद्धति है। उन्‍होंने कहा कि इस चिकित्‍सा पद्धति को प्रभावशाली बनाने के लिए शिक्षण की व्‍यवस्‍था किया जाना आवश्‍यक है। साथ ही नियमित अनुसंधान करें और उनका मानकीकरण कराएं। डॉ. देवनानी ने कहा कि इससे इस चिकित्‍सा पद्धति की गुणवत्‍ता, सुरक्षा, दक्षता और निरंतरता बढेगी। डॉ. देवनानी ने इस चिकित्‍सा पद्धति को राज्‍य में शुरू करने के लिए प्रधान मंत्री नरेन्‍द्र मोदी और मुख्‍य मंत्री भजन लाल शर्मा का आभार जताते हुए कहा कि इस प्रशासनिक निर्णय से भारतीय चिकित्‍सा में नये आयाम जुडेंगे। राजस्‍थान विधान सभा अध्‍यक्ष डॉ. देवनानी शुक्रवार को यहां गांधी नगर स्थित एम-8 में राजस्‍थान इलेक्‍ट्रोपैथी चिकित्‍सा पद्धति बोर्ड के बनाए गए कार्यालय और प्रशासनिक परिसर का उद्घाटन करने के बाद आयोजित समारोह को सम्‍बोधित कर रहे थे। डॉ. देवनानी ने कार्यालय के वीडियो कॉफ्रेंसिंग सिस्‍टम का भी बटन दबाकर शुभारम्‍भ किया। डॉ. देवनानी ने इस मौके पर बोर्ड के इलेक्‍ट्रोपैथी न्‍यूज लेटर के तृतीय संस्‍करण और आरोग्‍य मेला पुस्तिका का लोकार्पण भी किया। डॉ. देवनानी ने इस मौके पर आयोजित समारोह का दीप प्रज्‍ज्‍वलन कर शुभारम्‍भ किया। डॉ. देवनानी ने कहा कि एलोपैथी, आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक, इलेक्‍ट्रोपैथी आदि चिकित्‍सा पद्धतियां भारतीय ऋषियों के हजारों वर्ष पहले के ज्ञान और शोध पर आधारित है। उन्‍होंने कहा कि गणेशजी की सूंड भारत में बहुत पहले से ही शल्‍य चिकित्‍सा मौजूद होने का प्रमाण है। डॉ. देवनानी ने कहा कि चिकित्‍सा की प्रत्‍येक पद्धति में भारत विश्‍व गुरू है। विश्‍व का मार्ग दर्शक है। उन्‍होंने कहा कि इलेक्‍ट्रोपैथी चिकित्‍सा पद्धति के पहलुओं की जानकारी नई पीढी को बताएं। वैकल्पिक भारतीय चिकित्‍सा पद्धतियों का प्रकृति के साथ सामंजस्‍य है। डॉ. देवनानी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने योग को विश्‍व में विस्‍तारित किया है। उसी का परिणाम है कि आज के युवा सुबह-सुबह उद्यानों में स्‍वप्रेरणा से योग करके अपने मन, मस्तिष्‍क और शरीर को स्‍वस्‍थ बना रहे है। उन्होंने कहा कि स्‍वस्‍थ व्‍यक्ति, स्‍वस्‍थ परिवार, स्‍वस्‍थ समाज और स्‍वस्‍थ राष्‍ट्र तब ही बनेगा जब हम सभी अपने शरीर को स्‍वस्‍थ रखने का संकल्‍प लेंगे। इसी से राष्‍ट्र प्रथम का भाव भी जगेगा। उन्‍होंने कहा कि डॉ. देवनानी ने इलेक्‍ट्रोपैथी चिकित्‍सा से जुडे लोगों का आव्‍हान किया कि वे स्‍कूलों, कॉलेजों में जाकर दिनचर्या और संतुलित आहार की जानकारी देंगे तो स्‍वस्‍थ भारत में सभी भागीदार बन सकेंगे। डॉ. देवनानी ने कहा कि मरीज को ग्राहक ना समझे। उन्‍होंने कहा कि जब चिकित्‍सा में व्‍यवसाय बढता है तो जन विश्‍वास घटता है। समारोह में विधायक कालीचरण सर्राफ ने कहा कि यह पद्धति श्रेष्‍ठ है। पौधों के रस से इस पद्धति में चिकित्‍सा होती है। राजस्‍थान सरकार द्वारा राज्‍य में इस चिकित्‍सा पद्धति का विकास राष्‍ट्र के लिए लाभदायी है। राजस्‍थान पशु चिकित्‍सा एवं पशु विज्ञान विश्‍वविद्यालय जोबनेर के कुलगुरू प्रो. त्रिभुवन शर्मा ने बताया कि इस पद्धति में अभी 114 पौधों से उपचार किया जा रहा है। इलेक्‍ट्रोपैथी चिकित्‍सा बोर्ड के अध्‍यक्ष हेमन्‍त सेठिया ने इस चिकित्‍सा पद्धति को राजस्‍थान में आरम्‍भ करने की संघर्ष यात्रा की जानकारी बताई। बोर्ड के रजिस्‍ट्रार एवं आयुर्वेद के निदेशक डॉ. आनन्‍द कुमार शर्मा ने स्‍वागत उदबोधन और आभार ज्ञापित किया। इस मौके पर स्‍पीकर डॉ. देवनानी ने कार्यालय निर्माण में सहयोग के लिए भामाशाओं विमला दुग्‍गड, रमा गोयल, पिंकी सेठिया, सर्वेश्‍वर शर्मा और प्रवीण शर्मा का माला पहनाकर और तुलसी का पौधा भेंट कर अभिवादन किया।

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