नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को फ्रांस के एवियन में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र में “सभी के लिए संतुलित, साझा और टिकाऊ आर्थिक विकास की ओर बढ़ने” विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में टिकाऊ और समावेशी विकास का संदेश दुनिया के लिए पहले से अधिक प्रासंगिक है।
विकास का केंद्र होना चाहिए आम लोगों का कल्याण
साझा और टिकाऊ विकास पर केंद्रित शिखर सम्मेलन की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि विकास को केवल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) या व्यापारिक आंकड़ों से नहीं आंका जाना चाहिए, बल्कि यह देखा जाना चाहिए कि उसका लोगों के जीवन और कल्याण पर कितना सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। इस दौरान उन्होंने “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास” के सिद्धांतों पर आधारित भारत की समावेशी विकास यात्रा का उल्लेख किया।
भारत के विकास दृष्टिकोण का वैश्विक विस्तार
प्रधानमंत्री ने कहा कि समावेशी विकास का भारत का मंत्र उसकी वैश्विक सहभागिताओं का भी मार्गदर्शन करता है। उन्होंने बताया कि भारत की जी-20 अध्यक्षता के दौरान अपनाया गया “एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य” का आदर्श वाक्य इसी सोच का प्रतीक था। उन्होंने कहा कि भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप आर्थिक गलियारा (आईएमईसी) भी इसी दृष्टिकोण पर आधारित है, जिसका उद्देश्य आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करना, निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाना तथा नवाचार को प्रोत्साहित करना है।
ग्लोबल साउथ के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि वैश्विक संकटों और संघर्षों का सबसे अधिक प्रतिकूल प्रभाव ग्लोबल साउथ के देशों पर पड़ा है। उन्होंने इन देशों पर पड़ने वाले आर्थिक और विकासात्मक बोझ को कम करने के लिए अंतरराष्ट्रीय एकजुटता और सहयोग का आह्वान किया। उन्होंने सुझाव दिया कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों को ऐसे सहायता तंत्र विकसित करने चाहिए, जो विकासशील देशों को आर्थिक लचीलापन प्रदान कर सकें।
अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और प्रशांत देशों के लिए नई कनेक्टिविटी पहल का सुझाव
प्रधानमंत्री ने अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और प्रशांत द्वीपीय देशों को जोड़ने वाली संपर्क परियोजनाओं पर भी विचार करने का आग्रह किया, जिन्हें आईएमईसी की तर्ज पर विकसित किया जा सकता है। इस दिशा में उन्होंने “सम्पर्क और व्यापार में तेजी लाने के लिए अंतरराष्ट्रीय लामबंदी साझेदारी” (इम्पैक्ट) के गठन का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इस पहल में जी-7 देशों की पूंजी, भारत की प्रतिभा और ग्लोबल साउथ के स्वामित्व को एक साथ जोड़ा जा सकता है।
वैश्विक आर्थिक स्थिरता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई
प्रधानमंत्री मोदी ने स्थिर, विश्वसनीय और समृद्ध वैश्विक अर्थव्यवस्था के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि एकीकरण, साझेदारी और साझा प्रगति में भारत के विश्वास ने उसे जी-7 सदस्य देशों सहित कई देशों के साथ व्यापार समझौते करने के लिए प्रेरित किया है। उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों का समाधान सहयोग, साझेदारी और साझा जिम्मेदारी के माध्यम से ही संभव है।



