RSS की विचारधारा नहीं बदली, उनका मकसद देश को हिंदू राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ाना : थरूर

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मुंबई। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि RSS का मुख्य मकसद भारत को हिंदू राष्ट्र और हिंदुत्व के रूप में आगे बढ़ाना है और यह मूल विचारधारा आज भी नहीं बदली है। थरूर ने ये बात मुंबई में शुक्रवार शाम को इंडिया इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस (IIMUN) के कार्यक्रम में कही। उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के इसी कार्यक्रम में दिए बयानों को अच्छा संकेत माना है। उन्होंने कहा, ‘मैं दस साल से संघ प्रमुख के बयानों को देख रहा हूं। अब उनमें बदलाव दिखता है।’ भागवत ने 6 जुलाई को Gen-Z और Gen-अल्फा से 1 घंटे तक बातचीत की थी। भागवत ने कहा था, ‘जेन-जी और जेन-अल्फा, पुरानी पीढ़ी से भी ज्यादा देशभक्त और ईमानदार हैं। हमें उनकी बात समझनी चाहिए, उनसे बात नहीं हुई तभी तो जंतर-मंतर पर आंदोलन हुआ।’ अलग विचारधारा वालों के साथ भी बातचीत जरूरी: जो लोग चाहते हैं कि मुझे पार्टी (कांंग्रेस)से निकाल दिया जाए, क्योंकि मैं उस मंच पर गया था जहां मोहन भागवत भी मौजूद थे। वे यह नहीं समझते कि अलग सोच रखने वालों के साथ भी बातचीत की जा सकती है। 2029 में Gen Z सबसे बड़ा वोटिंग ग्रुप होगा: 2029 में Gen-Z सबसे बड़ा वोटिंग ग्रुप होगा। देश के ज्यादातर हिस्सों को जागना होगा और इस बात को समझना होगा कि युवा बदलाव चाहते हैं। अब सब कुछ पहले जैसा नहीं चल सकता है।दक्षिण एशिया की राजनीतिक पार्टियां अब यह नहीं मान सकतीं कि राजनीति के पुराने तरीके काम करते रहेंगे। मैं अपनी पार्टी में यही बात कहता रहा हूं कि सड़क का काम सड़क पर और सदन का काम सदन में होना चाहिए। मैं उस पार्टी का हिस्सा, जो मेरी सोच के करीब: कांग्रेस सबसे कम अलोकतांत्रिक पार्टी है। क्या आपने कभी सुना है कि बीजेपी में किसी ने असहमति जताई हो और पार्टी में बना रहा हो? मैं उस पार्टी में हूं जो मेरी सोच के सबसे करीब है। राहुल को CJP जैसा समर्थन नहीं मिला: राष्ट्रव्यापी छात्र विरोध प्रदर्शनों के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के उठाए गए कई मुद्दों को कांग्रेस नेता राहुल गांधी अपनी ‘छात्रों की गूंज’ मुहिम के जरिए पहले ही उठा चुके थे, लेकिन उन चिंताओं पर जनता से वैसा समर्थन नहीं मिल सका था। हमें लोगों को समझने की जरूरत: CJP के आंदोलन का मुख्य हिस्सा बनने से कई महीने पहले ही कांग्रेस ने ऐसी ही चिंताओं को उठाया था। हमें इस बात पर गंभीरता से आत्ममंथन करने की जरूरत है कि आखिर कांग्रेस के प्रयासों को वैसी जन-प्रतिक्रिया क्यों नहीं मिली? हमें लोगों की नब्ज को और बेहतर तरीके से समझने की जरूरत है। 17 जून: राहुल ने ‘छात्रों की गूंज’ अभियान शुरू किया राहुल गांधी ने CJP के आंदोलन से पहले 17 जून को राजस्थान के कोटा से ‘छात्रों की गूंज’ अभियान शुरू किया था, लेकिन इसे व्यापक जनसमर्थन नहीं मिला। इसके बाद यही समर्थन CJP के छात्र आंदोलन में दिखा। राहुल अलग-अलग मुद्दों पर इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए युवाओं से जुड़ रहे हैं। CJP के प्रदर्शन के बाद पीएम मोदी ने भी पेपर लीक के नए कानून और अन्य मुद्दों पर रील बनाकर अपनी बात रखी। NEET पेपर लीक के खिलाफ देशभर में प्रदर्शनों के बाद इसे RSS का युवाओं के साथ सबसे अहम संवाद माना जा रहा है। जंतर-मंतर पर 36 दिन चले आंदोलन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था।

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