-बाल मुकुंद ओझा
शरीर को स्वस्थ और फिट रखने की कोशिशें एक बार फिर परवान पर है। विभिन्न शोध रिपोर्टों में साफतौर पर इंगित किया गया है कि आजकल की भागदौड़ भरी और व्यस्त लाइफस्टाइल ने बच्चे से बुजुर्ग तक को समय से पूर्व ही शारीरिक रूप से अपंग करके रख दिया है। यदि हम चेतावनियों के बावजूद नहीं सुधरे तो स्वस्थ जीवन जीना भूलना होगा। आजकल लोग विशेषकर युवा कई-कई घंटे एक ही जगह पर बैठकर काम करते हुए बिता देते हैं, जिसका असर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। कोरोना के बाद वर्क फ्रॉम होम का प्रचलन बढ़ गया है। ऐसे में एक ही स्थान पर बैठकर काम करने से जहाँ शरीर में जड़ता आती है वहीं मानसिक बीमारियों का खतरा भी बना रहता है। शारीरिक गशविधियाँ फिट और हेल्दी रहने के लिए जरूरी है कि आप रोजाना फिजिकल एक्टिविटी के लिए समय निकालें और अपनी सेहत का ख्याल रखें। फिजिकल एक्टिविटी, जैसे कि एक्सरसाइज, योग और वॉक न केवल हमारे शारीरिक स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है बल्कि हमारे मानसिक और समग्र स्वास्थ्य के लिए भी बेहद जरूरी है। जब आप शारीरिक रूप से एक्टिव रहते हैं, तो शरीर की ऊर्जा बढ़ती है। जिसे “हैप्पी हार्मोन” भी कहा जाता है। यह हार्मोन हमें खुश और संतुष्ट महसूस कराता है, जिससे तनाव और एंग्जायटी जैसी समस्याएं कम हो सकती हैं।
व्यस्त जीवन शैली के कारण आजकल कमर दर्द एक मुख्य समस्या बनती जा रही है। ज्यादातर मामलों में कमर के निचले हिस्से में दर्द की शिकायत बहुत ज्यादा बढ़ती जा रही है। इस बारे में कई तरह के शोध किए जा चुके हैं। कई अनुसंधान के बाद यही नतीजे मिलते हैं कसरत या अन्य कोई भी शारीरिक गतिविधि लगातार करते रहने से कमर के निचले हिस्से में होने वाले दर्द (लोअर बैक पैन) को 16 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। यह शोध ब्रिटिश जर्नल ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं ने बताया हैं कि टहलना, कठिन व्यायाम, तथा अन्य शारीरिक गतिविधियों से कमर दर्द को कम किया जा सकता है। शोधकर्ताओं ने 160,000 से अधिक लोगों पर 36 तरह के अलग-अलग अध्ययन किए तथा प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण किया। विश्लेषण से यह नतीजा सामने आया है कि निरंतर व्यायाम करने से कमर के निचले हिस्से में होने वाले असहनीय दर्द को कम किया जा सकता है। इसके अलावा भी अन्य तरह की शारीरिक गतिविधियां दर्द से राहत दिलाती हैं। वर्तमान दौर में दिन भर एक ही जगह बैठे रहने से इस तरह की बीमारियों का जन्म हुआ हैं। मानसिक स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए जरूरी है कि आप शारीरिक रूप से सक्रिय रहें। शारीरिक गतिविधि की कमी के कारण गुड हार्मोन सेरोटोनिन का रिलीज कम हो जाता है, जो सीधे तौर पर मूड को ठीक रखने के लिए आवश्यक है। इसका हमारे शरीर पर बहुत सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इससे शरीर में लचीलापन बढ़ता है, रक्त प्रवाह बढ़ता है और इससे मूड सुधरने लगता है। इस स्थिति में आपमें सकारात्मक भावनाओं की कमी हो सकती है। हर दिन केवल 30 मिनट पैदल चलने से आपके मूड को बेहतर बनाने और आपके स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
तेज चलना, बागवानी या भारोत्तोलन आपका वजन कम करने के अलावा आपको खुश भी रख सकते हैं। शोध में इसका खुलासा हुआ है कि आपकी शारीरिक गतिविधियों की निरंतरता और उन्हें करने की क्षमता आपकी खुशी के स्तर को बढ़ाती है। शोधकर्ताओं के एक दल ने पाया कि एक सप्ताह में एक बार शारीरिक श्रम करने वाला एक सामान्य वजन का वयस्क बिना शारीरिक श्रम के पूरा सप्ताह गुजारने वाले समान वजन के वयस्क की अपेक्षा 1.4 गुना ज्यादा खुश रहा जबकि सामान्य से अधिक वजन का वयस्क 1.5 गुना ज्यादा खुश रहा।
बदलती जीवनशैली के चलते दफ्तर में घंटों बैठे रहकर काम करने और फिर घर में निष्क्रिय जीवन जीने से हमारे शरीर में जंग लगने लगा है और हम बीमारियों का आसान शिकार बनते जा रहे हैं। यह स्थिति तब और भी ज्यादा बिगड़ जाती है जब उम्र 25 पार करती है। 40 की उम्र में आते-आते ज्यादातर लोग आजकल बेहद अनफिट हो जाते हैं। ऐसे में कोलेस्ट्रॉल लेवल के बढ़ने, ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल के नॉर्मल न रह पाने, हड्डियों के भुरभुरा होने, मसल्स में तकलीफ होने, तनाव, डिप्रेशन, मोटापा आदि जैसी समस्याएं घर करने लगती हैं। डिप्रेशन तनाव, चिंता और उदासी का बहुत बड़ा कारण बनता है, जो जल्द ही आपके जीवन पर असर करना शुरू कर देता है। इससे पहले की यह गंभीर रूप धारण कर लें डिप्रेशन निपटने के उपाय करने चाहिए। अवसाद से निपटने का सबसे प्रभावी और प्राकृतिक तरीका शारीरिक गतिविधि है।

शारीरिक श्रम के प्रति लापरवाह हो रहे हमारे युवा
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